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तो खुली हवा में सांस लेंगे जेलों में बंद सिक्ख युवा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Dec 2013 09:20 AM IST
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पंजाब सहित देश की विभिन्न जेलों में सजा पूरी कर चुके सिख युवकों की रिहाई न होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के हस्तक्षेप केबाद दबाव में आई राज्य सरकार इस मामले को कानूनी रुप से उठाने के लिए तैयार हो गई है। उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने इसकी पुष्टि की।
पंजाब की जेलों में बंद 94, हरियाणा में 76 और चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में सात सिख युवक सजा पूरी होने के बाद भी रिहाई का इंतजार कर रहे हैं।
इनमें ऐसे भी कैदी हैं जो दो दशक से अधिक समय से जेल में बंद हैं। इन कैदियों की रिहाई के आवेदन सरकारी फाइलों में धूल फांक रहे हैं जबकि जेल अथारिटी की ओर से डिप्टी कमिश्नरों को भेजी गई फाइलों पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है, लिहाजा रिहाई लटकी है।
कुछ ऐसे भी केस सामने आए हैं जिनमें राज्य सरकार ने बिना कारण बताए ही आवेदन रद्द कर दिए हैं। आपराधिक मामलों में उम्रकैद भुगत चुके कुछ कैदियों को रिहा किया जा चुका है क्योंकि उनके पास सियासी पहुंच थी, लेकिन आम कैदियों की सुनवाई नहीं हो रही है।
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इस मामले को गंभीरता से लेते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने पांचों सिंह सहिबान को साथ लेकर सुखबीर बादल के सामने यह मुद्दा उठाने की बात कही थी। इसे देखते हुए सरकार हरकत में आई। वीरवार को उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल, जिनके पास गृह विभाग भी है, ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को कानूनी रुप से उठाएगी। उन्होंने दावा किया कि पंजाब की जेलों में ऐसे मामले नहीं हैं।
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श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के हस्तक्षेप केबाद दबाव में आई राज्य सरकार इस मामले को कानूनी रुप से उठाने के लिए तैयार हो गई है। उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने इसकी पुष्टि की।
पंजाब की जेलों में बंद 94, हरियाणा में 76 और चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में सात सिख युवक सजा पूरी होने के बाद भी रिहाई का इंतजार कर रहे हैं।
इनमें ऐसे भी कैदी हैं जो दो दशक से अधिक समय से जेल में बंद हैं। इन कैदियों की रिहाई के आवेदन सरकारी फाइलों में धूल फांक रहे हैं जबकि जेल अथारिटी की ओर से डिप्टी कमिश्नरों को भेजी गई फाइलों पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है, लिहाजा रिहाई लटकी है।
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कुछ ऐसे भी केस सामने आए हैं जिनमें राज्य सरकार ने बिना कारण बताए ही आवेदन रद्द कर दिए हैं। आपराधिक मामलों में उम्रकैद भुगत चुके कुछ कैदियों को रिहा किया जा चुका है क्योंकि उनके पास सियासी पहुंच थी, लेकिन आम कैदियों की सुनवाई नहीं हो रही है।
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इस मामले को गंभीरता से लेते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने पांचों सिंह सहिबान को साथ लेकर सुखबीर बादल के सामने यह मुद्दा उठाने की बात कही थी। इसे देखते हुए सरकार हरकत में आई। वीरवार को उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल, जिनके पास गृह विभाग भी है, ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को कानूनी रुप से उठाएगी। उन्होंने दावा किया कि पंजाब की जेलों में ऐसे मामले नहीं हैं।