{"_id":"faf8f38a-8df8-11e2-b06d-d4ae52bc57c2","slug":"street-workers-is-now-serving-as-doctor-in-aiims","type":"story","status":"publish","title_hn":"कभी रेहड़ी चलाते थे अब एम्स में हैं डॉक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कभी रेहड़ी चलाते थे अब एम्स में हैं डॉक्टर
चंडीगढ़/आशीष तिवारी
Updated Sat, 16 Mar 2013 10:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उड़ान पंखों से नहीं, हौसलों से होती है। यही कर दिखाया है जोधपुर के डॉक्टर ओमप्रकाश ने। कभी अपने परिवार का पेट भरने के लिए रेहड़ी चलाने वाले ये होनहार अब देश के सबसे प्रमुख चिकित्सा संस्थान एम्स में सर्जरी के डॉक्टर हैं।
विज्ञापन
डॉ. ओमप्रकाश ने पीजीआई चंडीगढ़ से एमएस किया है। वे शुक्रवार को पीजीआई के 33वें दीक्षांत समारोह में अपनी पत्नी के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से डिग्री लेने पहुंचे थे। इस दौरान अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपनी पत्नी को दिया। बेशक मेरी पत्नी अनपढ़ हैं, लेकिन उन्होंने ही मेरी जिंदगी को संवारा है।
विज्ञापन
अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि बचपन में ही पिता का देहांत हो गया तो नौ भाई-बहनों की जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। ऐसे में पढ़ाई कर पाना भी मुश्किल था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
विज्ञापन
दो वक्त की रोटी के जुगाड़ के लिए उन्होंने रेहड़ी भी चलाई और मजदूर से लेकर मिस्त्री का भी काम किया। छोटी सी दुकान के जरिये भी परिवार की गाड़ी आगे बढ़ाई।
जब वे कक्षा नौ में पढ़ते थे तो उनकी शादी हो गई। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ममता अनपढ़ हैं, लेकिन उन्हें कभी इस बात का मलाल नहीं रहा। उन्होंने अपनी बीबी ममता का माथा चूमकर कहा कि यह सही मायने में लक्ष्मी है।
मैं तो यही मानता हूं कि इतनी विपरीत परिस्थितियों में जिंदगी चल रही थी लेकिन ममता और उनके गांववासियों ने मेरा पूरा सहयोग दिया। पुणे से एमबीबीएस करने के दौरान पत्नी ममता ने पूरे परिवार को बांधे रखा।
इस वक्त मैं दिल्ली के एम्स के सर्जरी विभाग में बतौर सीनियर रेजीडेंट काम कर रहा हूं। आज पीजीआई से एमएस की डिग्री लेने लायक बना हूं तो इसमें भी मेरी पत्नी का बड़ा योगदान है।