सपनों के चकनाचूर होने का दर्द: बहनों के गहने बेच अमेरिका गया था जतिंदर, CRPF इंस्पेक्टर का बेटा भी डिपोर्ट
शनिवार देर रात अमेरिका से डिपोर्ट होकर अमृतसर एयरपोर्ट पर आए भारतीयों में मोगा के धर्मकोट के गांव पंडोरी आरियां का 23 साल का जसविंदर सिंह भी शामिल है। उसे लेकर मोगा के धर्मकोट के डीएसपी रमनदीप सिंह और उनके परिवार के लोग गांव पंडोरा आरियां पहुंचे।
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अमेरिका से डिपोर्ट होकर आ रहे पंजाबियों की कहानी एक जैसी है। कोई जमीन बेचकर तो कोई कर्ज का बोझ सर पर लादकर अमेरिका अपने सपनों को पूरा करने गया था। अब डिपोर्ट होकर आए तो सारे हसीन सपने चकनाचूर होकर बिखर गए।
अमेरिका जाने के लिए बेच दिए थे बहनों के गहने, सब खत्म
अमृतसर के कस्बा जंडियाला गुरु के गांव बंडाला के अधीन पत्ती हिंदू निवासी जतिंदर सिंह भी अमेरिका के डिपोर्ट होकर शनिवार रात को अमृतसर पहुंचा है। जतिंदर के पिता गुरबचन सिंह और मां हरजिंदर कौर को जिला प्रशासन की टीमों से पता चला था कि उनके बेटे को अमेरिका सरकार ने गिरफ्तार कर भारत भेज दिया है, क्योंकि वह डंकी रूट से अमेरिका में प्रवेश कर गया था।
हरजिंदर कौर और गुरबचन सिंह ने बताया कि रिश्तेदारों के जरिये एक एजेंट से मुलाकात हुई। एजेंट ने 45 लाख रुपये लेकर जतिंदर सिंह को अमेरिका में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। सारे परिवार ने सभी रिश्तेदारों से थोड़ा कर्ज उठाना शुरू कर दिया। पैसे कम पड़े तो जतिंदर सिंह की दो बहनों के साथ पैसों की बात की गई। जतिंदर सिंह की दोनों बहनों ने मायके वालों की तरफ से शादी में दिए गए गहने बेच डाले। परिवार ने पांच महीने पहले बेटे को अमेरिका के लिए रवाना कर दिया, लेकिन बाद में पता चला कि एजेंट ने उनके साथ धोखा किया है।
55 लाख देकर डंकी रूट से अमेरिका पहुंचा था बिक्रमजीत
सीआरपीएफ इंस्पेक्टर बलदेव सिंह की उसके बेटे बिक्रमजीत सिंह ने एक नहीं सुनी। उसने जिद करके परिवार के सामने डंकी रूट से अमेरिका जाने की मांग रखी थी। बिक्रमजीत का सपना था कि वह किसी तरह अमेरिका सेटल हो जाए। बेटे की जिद के चलते बलदेव सिंह ने किसी तरह 55 लाख रुपये का इंतजाम कर एजेंट को दे दिए थे। एजेंट ने पहले तो यह बताया था कि वह एक नंबर में बिक्रमजीत को अमेरिका में अच्छी नौकरी दिला देगा, लेकिन बेटे को भेजने के बाद उन्हें पता चला कि एजेंट ने उनके बेटे को डंकी रूट से अमेरिका भेजा है। अमेरिका की पुलिस ने उसे 29 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया।
बलदेव सिंह ने बताया कि बिक्रमजीत सिंह अमेरिका में जाने का इच्छुक था। कई बार उसे समझाया और यहीं किसी कारोबार में पैसा लगाने की सलाह भी दी, लेकिन बेटा नहीं माना। एक एजेंट से तालमेल किया गया। उसने 55 लाख में अमेरिका में अच्छी नौकरी की दिलाने की बात कही थी। बैंक से 25 लाख का कर्ज लिया गया। एक दुकान बेची। एजेंट ने 18 अगस्त को पहले मुंबई, कोलंबिया, पनामा के जंगल और फिर मेक्सिको की दीवार फंदवा कर बिक्रमजीत सिंह को अमेरिका में प्रवेश करवा दिया। वहां अमेरिकी पुलिस ने 29 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि बीच बीच में कभी बेटा उनके साथ फोन पर बात करके जानकारी दिया करता था, लेकिन 29 जनवरी के बाद बेटे से कोई बात नहीं हो सकी।
किसी से बात नहीं कर रहा सुखचैन
अमेरिका से डिपोर्ट होकर घर लाैटा खडूर साहिब के गांव घरियाला का सुखचैन सिंह अब इस कदर परेशान है कि वह किसी से भी बात करने के लिए तैयार नहीं। उसकी मां कुलदीप कौर, पत्नी सर्बजीत कौर व भाई गुरलाल सिंह लगातार सुखचैन सिंह को हिम्मत रखने के लिए कह रहे हैं। परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी आर्थिक मदद की जाए, ताकि कर्ज उतर सके।
कुलदीप कौर ने कहा कि जमीन बेचकर व 30 लाख का कर्ज लेकर वर्ष 2022 में सुखचैन सिंह को विदेश भेजा था। उम्मीद थी कि बेटा विदेश जाकर काम करेगा व घर की गरीबी दूर होगी। मेक्सिको का बार्डर पार कर सुखचैन अमेरिका पहुंचा, लेकिन वहां की सरकार ने सुखचैन को बेड़ियों में जकड़कर अमेरिका से डिपोर्ट किया जैैसे वह कोई खतरनाक अपराधी हो। परिवार भले ही इस बात से खुश है कि सुखचैन सुरक्षित वापस घर लौट आया हैै, लेकिन अब सुखचैन ने खुद को कमरे में बंद कर लिया है। वह किसी से भी बात नहीं कर रहा। सुखचैन व उसका परिवार इस बात से परेशान है कि सिर पर चढ़ा लाखों रुपये का कर्ज अब कैसे उतरेगा।
डेढ़ एकड़ जमीन बेचकर अमेरिका गया था जसविंदर
शनिवार देर रात अमेरिका से डिपोर्ट होकर अमृतसर एयरपोर्ट पर आए भारतीयों में मोगा के धर्मकोट के गांव पंडोरी आरियां का 23 साल का जसविंदर सिंह भी शामिल है। उसे लेकर मोगा के धर्मकोट के डीएसपी रमनदीप सिंह और उनके परिवार के लोग गांव पंडोरा आरियां पहुंचे। हालांकि परिवार और जसविंदर सिंह ने मीडिया के सामने आने से माना कर दिया। जसविंदर सिंह डेढ़ महीना पहले करीब 45 लाख रुपए एजेंट को देकर विदेश गया था। 27-28 जनवरी को बॉर्डर क्रॉस करते समय अमेरिका पुलिस ने उसे पकड़ लिया था। जसविंदर सिंह किसान परिवार से है। परिवार में माता-पिता और 5 भाई-बहन हैं। जसविंदर सिंह अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ा है। डेढ़ एकड़ जमीन बेचकर एजेंट को पैसे देकर घर की आर्थिक हालत में सुधार के लिए वह विदेश गया था। परिवार का कहना है कि वे मीडिया के सामने नहीं आएंगे न ही कुछ बोलना है। उन्होंने एजेंट से बात की है। एजेंट का कहना है कि वह पैसा वापस दे देगा। हमने बड़ी उम्मीद से बेटे को विदेश भेजा था, पर सब कुछ खत्म हो गया।