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राम रहीम को पैरोल: SGPC ने भाजपा को घेरा, धामी बोले- अपने फायदे के लिए दी फरलो, राजोआना को रिहा करने की मांग

Tue, 28 Jan 2025 10:41 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: अंकेश ठाकुर Updated Tue, 28 Jan 2025 10:41 PM IST
सार

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने हत्या व दुराचार के अपराधों के लिए जेल में सजा काट रहे डेरा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को फिर से पैरोल दिए जाने के सरकार के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है।

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SGPC objection to granting parole to Gurmeet Ram Rahim
Gurumeet ram rahim - फोटो : ANI

विस्तार

साध्वी यौन उत्पीड़न केस में सुनारिया जेल में सजा काट रहा सिरसा डेरा प्रमुख नौवीं बार पैरोल पर जेल से बाहर आ गया है। दिल्ली चुनाव से पहले राम रहीम को 30 दिन की पैरोल मिल गई है।

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वहीं, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने हत्या व दुराचार के अपराधों के लिए जेल में सजा काट रहे डेरा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को फिर से पैरोल दिए जाने के सरकार के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है।
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एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि यह फैसला सरकार के दोहरे रवैये को दर्शाता है। सरकार राजनीतिक फायदे के लिए राम रहीम को बार-बार फरलो व पैरोल देती है, जबकि देश की विभिन्न जेलों में तीन दशक से बंद सिखों को सजा पूरी होने के बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया जा रहा। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी उन्हें रिहा नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बलवंत सिंह राजोआना की माफी पर निर्णय लेने के लिए सरकार को न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश के बावजूद भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।
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धामी ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले ही राजनीतिक लाभ के लिए राम रहीम के जघन्य अपराधों पर आंखें मूंदकर उसे चुनावों के दौरान फरलो और पैरोल दे दी थी और अब फिर से दिल्ली विधानसभा और हरियाणा नगर निगम चुनावों में राजनीतिक लाभ के लिए उसे बाहर निकाला गया है, जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार की ऐसी नीतियों से सिखों में अलगाव की भावना पैदा हो रही है। धामी ने मांग की है कि राम रहीम की पैरोल तुरंत रद्द की जाए और उसे वापस जेल भेजा जाए।

डेरे के अंदर नहीं है प्रवेश 
डेरा प्रमुख में डेरा सच्चा सौदा में पहुंचने के बाद अनुयायी व अतिरिक्त स्टाफ को भी नये डेरे में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। पुरी तरह से डेरा प्रबंधन सख्ती बरतते हुए नजर आया। वहीं, पुराने डेरे में नियमित रूप से अनुयायियों का आना जाना लगा हुआ है। अभी तक अनुयायियों की भीड़ धीरे धीरे बढ़ने लगी हे।


वर्ष 2017 के बाद पहुंचे डेरा प्रमुख 
डेरा प्रमुख 2017 के बाद पहली बार डेरा सच्चा सौदा पहुंचे है। उनके डेरे से जाने के बाद कुछ वर्षों में डेरे के आस पास का माहौल पूरी तरह से बदल चुका है। डेरे के प्रबंधन की सक्रियता भी अब पहले जैसी नहीं रहती थी। डेरे की गद्दी को लेकर होने वाले विवादों पर भले ही डेरा प्रमुख ने विराम लगा दिया था। उसके बाद भी डेरे के अनुयायियों में जोश नहीं देखने को मिलता था। डेरा प्रमुख के सिरसा आने के बाद  एक बार पुन: सक्रियता प्रबंधन की बढ़ जाएगी। वहीं, राजनीतिक गतिविधियां भी डेरे के साथ मिलकर अब तेज होती नजर आएगी। 

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