{"_id":"35755d2dbce07e0cbc9bd0fe39f8735e","slug":"punjab-vat-deputy-cm-sukhbir-given-relief-steel-steel-industries","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस्पात और स्टील उद्योगों को सुखबीर ने दी राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस्पात और स्टील उद्योगों को सुखबीर ने दी राहत
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 24 Dec 2013 11:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने राज्य की स्टील उद्योग को बड़ी राहत देते हुए नया वैट ढांचा लागू करने को मंजूरी दी है।
अब इस उद्योग पर वैट को वर्तमान 4.95 फीसदी से घटाकर 2.5 कर दिया गया है।
इस्पात एवं स्टील रोलिंग मिलों, ऑल इंडिया री-रोलिंग मिलों, पाईप निर्माताओं के प्रतिनिधियों के साथ डिप्टी सीएम की विशेष बैठक के दौरान यह निर्णय हुआ।
इस मौके पर सुखबीर बादल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य इस्पात एवं स्टील उद्योग को पैरों पर खड़े करना है। नई वैट दरें पहली फरवरी 2014 से लागू कर दी जाएंगी।
इस नए टैक्स ढांचे से स्क्रैप, मैलटिंग और रोलिंग, इंगट, बिलेट्स, बलूमस और अन्य अर्ध तैयार वस्तुएं, तैयार सामान एवं अंतरराज्यीय वैट को 4.95 से घटाकर 2.5 फीसदी कर दिया गया है।
इससे पंजाब का उद्योग पड़ोसी राज्यों के उद्योगों से मुकाबला करने के सक्षम हो जाएगा, जो पहले ही टैक्सों में बड़ी राहत हासिल कर रही हैं।
इस अवसर पर उद्योगपतियों के शिष्टमंडल की अगुवाई कर रहे जोगिंदर पाल सिंगला, देवी दयाल पराशर, विनोद वशिष्ट, मोहिंदर गुप्ता सहित समूह उद्योगपतियों ने उप-मुख्यमंत्री द्वारा उनकी मांगें स्वीकार करने पर आभार जताया।
विज्ञापन
उद्योगपतियों की मांग पर बादल ने इस्पात एवं स्टील उद्योग, जिसमें तैयार वस्तुएं भी शामिल हैं, पर एडवांस टैक्स लागू करने को भी मंजूरी दी है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट की चोरी रोकने के लिए यह भी फैसला किया गया कि आईटीसी को दो चरणों तक सीमित कर दिया जाए।
लघु स्टील रोलिंग मिलों एवं फर्नेस मिलों को भी बड़ी राहत देते हुए उनके वैट को बिजली के प्रयोग एवं उत्पादन से जोड़ने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है।
जिस तहत रोलिंग मिलों के लिए बिजली के 1250 यूनिटों का प्रयोग से एक मीट्रिक टन तैयार वस्तुओं का उत्पादन जबकि फर्नेस यूनिटों के लिए 750 यूनिटों के प्रयोग पर एक मीट्रिक टन उत्पादन करना होगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नए फैसले से जहां टैक्स चोरी रुकेगी, वहीं राज्य में कच्चे माल की आवक को प्रोत्साहन से उत्पादन भी बढ़ेगा।
प्रतिवर्ष 185 करोड़ राजस्व का नुकसान
इस्पात एवं स्टील उद्योग से वर्ष 2012-13 दौरान कुल 1091 करोड़ रुपये टैक्स इकट्ठा हुआ था। जिसमें से 403 करोड़ वैट रिफंड कर कुल शुद्ध टैक्स 688 करोड़ था। नई व्यवस्था से राजस्व को 185 करोड़ का नुकसान होगा।
विज्ञापन
अब इस उद्योग पर वैट को वर्तमान 4.95 फीसदी से घटाकर 2.5 कर दिया गया है।
इस्पात एवं स्टील रोलिंग मिलों, ऑल इंडिया री-रोलिंग मिलों, पाईप निर्माताओं के प्रतिनिधियों के साथ डिप्टी सीएम की विशेष बैठक के दौरान यह निर्णय हुआ।
इस मौके पर सुखबीर बादल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य इस्पात एवं स्टील उद्योग को पैरों पर खड़े करना है। नई वैट दरें पहली फरवरी 2014 से लागू कर दी जाएंगी।
इस नए टैक्स ढांचे से स्क्रैप, मैलटिंग और रोलिंग, इंगट, बिलेट्स, बलूमस और अन्य अर्ध तैयार वस्तुएं, तैयार सामान एवं अंतरराज्यीय वैट को 4.95 से घटाकर 2.5 फीसदी कर दिया गया है।
विज्ञापन
इससे पंजाब का उद्योग पड़ोसी राज्यों के उद्योगों से मुकाबला करने के सक्षम हो जाएगा, जो पहले ही टैक्सों में बड़ी राहत हासिल कर रही हैं।
इस अवसर पर उद्योगपतियों के शिष्टमंडल की अगुवाई कर रहे जोगिंदर पाल सिंगला, देवी दयाल पराशर, विनोद वशिष्ट, मोहिंदर गुप्ता सहित समूह उद्योगपतियों ने उप-मुख्यमंत्री द्वारा उनकी मांगें स्वीकार करने पर आभार जताया।
विज्ञापन
उद्योगपतियों की मांग पर बादल ने इस्पात एवं स्टील उद्योग, जिसमें तैयार वस्तुएं भी शामिल हैं, पर एडवांस टैक्स लागू करने को भी मंजूरी दी है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट की चोरी रोकने के लिए यह भी फैसला किया गया कि आईटीसी को दो चरणों तक सीमित कर दिया जाए।
लघु स्टील रोलिंग मिलों एवं फर्नेस मिलों को भी बड़ी राहत देते हुए उनके वैट को बिजली के प्रयोग एवं उत्पादन से जोड़ने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है।
जिस तहत रोलिंग मिलों के लिए बिजली के 1250 यूनिटों का प्रयोग से एक मीट्रिक टन तैयार वस्तुओं का उत्पादन जबकि फर्नेस यूनिटों के लिए 750 यूनिटों के प्रयोग पर एक मीट्रिक टन उत्पादन करना होगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नए फैसले से जहां टैक्स चोरी रुकेगी, वहीं राज्य में कच्चे माल की आवक को प्रोत्साहन से उत्पादन भी बढ़ेगा।
प्रतिवर्ष 185 करोड़ राजस्व का नुकसान
इस्पात एवं स्टील उद्योग से वर्ष 2012-13 दौरान कुल 1091 करोड़ रुपये टैक्स इकट्ठा हुआ था। जिसमें से 403 करोड़ वैट रिफंड कर कुल शुद्ध टैक्स 688 करोड़ था। नई व्यवस्था से राजस्व को 185 करोड़ का नुकसान होगा।