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शहर ही नहीं, गांवों में भी चला झाड़ू
अखिल तलवार/ अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 21 May 2014 01:16 AM IST
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इस लोकसभा चुनाव में पंजाब में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन से सबको हैरान कर दिया है।
पार्टी ने 13 में से चार सीटें जीतीं और 24 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए हैं। अगर ‘आप’ यह प्रदर्शन आगे जारी रखती है तो 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पंजाब के दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और शिअद-भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
दोनों दलों में इसे लेकर अभी से मंथन भी शुरू हो गया है। लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी पंजाब के 33 विधानसभा हलकों में पहले स्थान पर रही, जिनमें से बीस हलके ऐसे हैं जहां पार्टी की जीत का अंतर बहुत ज्यादा रहा है।
नौ विधानसभा हलकों में पार्टी दूसरे स्थान पर रही। मौजूदा नतीजों के लिहाज से पार्टी सूबे की 17 सीटों पर शिअद और 16 सीटों पर कांग्रेस के लिए मुसीबत बनी।
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जिन 42 विधानसभा हलकों में ‘आप’ ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, उनमें शहरी के अलावा अर्द्धशहरी और ग्रामीण हलके भी शामिल हैं।
आम आदमी पार्टी संगरूर में नौ में से आठ हलकों में पहले और एक में दूसरे स्थान पर रही। फरीदकोट में सात हलकों में पहले स्थान पर, पटियाला में चार सीटों पर पहले व एक सीट पर दूसरे स्थान पर रही।
लुधियाना में ‘आप’ चार सीटों पर पहले, एक सीट पर दूसरे स्थान पर रही। फतेहगढ़ साहिब जैसी सीट जहां ग्रामीण और अर्द्धशहरी हलके ही हैं, में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया।
यहां छह हलकों में पार्टी पहले और एक में दूसरे स्थान पर रही। जीती हुई चार सीटों के अलावा ‘आप’ ने दो और सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया।
आनंदपुर साहिब में ‘आप’ जीत के लगभग करीब पहुंची। यहां वह चार हलकों में पहले और एक में दूसरे स्थान पर रही।
जालंधर में ‘आप’ चार सीटों पर दूसरे स्थान पर रही।
उधर, कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन का मानना था कि शहरी हलकों में युवाओं का रुझान ‘आप’ की तरफ है।
लेकिन ग्रामीण इलाकों में ऐसे रिस्पॉन्स की उम्मीद किसी को नहीं थी। आमतौर पर पंजाब में शहरी सीटों पर कांग्रेस व भाजपा का और ग्रामीण सीटों पर कांग्रेस व शिअद का मुकाबला होता आया है।
ग्रामीण सीटों पर ‘आप’ की मौजूदगी अगले विधानसभा चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय बना सकते हैं।
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पार्टी ने 13 में से चार सीटें जीतीं और 24 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए हैं। अगर ‘आप’ यह प्रदर्शन आगे जारी रखती है तो 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पंजाब के दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और शिअद-भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
दोनों दलों में इसे लेकर अभी से मंथन भी शुरू हो गया है। लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी पंजाब के 33 विधानसभा हलकों में पहले स्थान पर रही, जिनमें से बीस हलके ऐसे हैं जहां पार्टी की जीत का अंतर बहुत ज्यादा रहा है।
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नौ विधानसभा हलकों में पार्टी दूसरे स्थान पर रही। मौजूदा नतीजों के लिहाज से पार्टी सूबे की 17 सीटों पर शिअद और 16 सीटों पर कांग्रेस के लिए मुसीबत बनी।
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जिन 42 विधानसभा हलकों में ‘आप’ ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, उनमें शहरी के अलावा अर्द्धशहरी और ग्रामीण हलके भी शामिल हैं।
आम आदमी पार्टी संगरूर में नौ में से आठ हलकों में पहले और एक में दूसरे स्थान पर रही। फरीदकोट में सात हलकों में पहले स्थान पर, पटियाला में चार सीटों पर पहले व एक सीट पर दूसरे स्थान पर रही।
लुधियाना में ‘आप’ चार सीटों पर पहले, एक सीट पर दूसरे स्थान पर रही। फतेहगढ़ साहिब जैसी सीट जहां ग्रामीण और अर्द्धशहरी हलके ही हैं, में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया।
यहां छह हलकों में पार्टी पहले और एक में दूसरे स्थान पर रही। जीती हुई चार सीटों के अलावा ‘आप’ ने दो और सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया।
आनंदपुर साहिब में ‘आप’ जीत के लगभग करीब पहुंची। यहां वह चार हलकों में पहले और एक में दूसरे स्थान पर रही।
जालंधर में ‘आप’ चार सीटों पर दूसरे स्थान पर रही।
उधर, कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन का मानना था कि शहरी हलकों में युवाओं का रुझान ‘आप’ की तरफ है।
लेकिन ग्रामीण इलाकों में ऐसे रिस्पॉन्स की उम्मीद किसी को नहीं थी। आमतौर पर पंजाब में शहरी सीटों पर कांग्रेस व भाजपा का और ग्रामीण सीटों पर कांग्रेस व शिअद का मुकाबला होता आया है।
ग्रामीण सीटों पर ‘आप’ की मौजूदगी अगले विधानसभा चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय बना सकते हैं।