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पीपीसीसी की बैठक में नहीं गूंजी विरोधियों की आवाज

Tue, 07 Jan 2014 01:11 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 07 Jan 2014 01:11 AM IST
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Punjab Congress Meetng, Pratap singh bajwa,
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नवगठित कार्यकारिणी की पहली बैठक में सोमवार को वक्ताओं ने उन नेताओं को निशाने पर लिया, जिन्होंने कार्यकारिणी से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
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वक्ताओं का कहना था कि ऐसे लोग पार्टी को कमजोर बना रहे हैं। कुछ पदाधिकारियों ने तो यहां तक कहा कि कार्यकारिणी में पहली बार उन्हें इतना प्रतिनिधित्व दिया गया है।
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नवगठित कार्यकारिणी से वे लोग ही नाराज हैं जो या तो स्वयं को दलितों का नेता समझते हैं या जिन्हें अब ऐसा लग रहा है कि अब उनका समय नहीं आएगा।

सोमवार को प्रदेश कांग्रेस भवन में लगभग सभी पदाधिकारी मौजूद रहे। कुछ दिनों से पार्टी के प्रदेश प्रधान बाजवा का विरोध में इस्तीफों का जो सिलसिला शुरू हुआ था, उसे देखते हुए माना जा रहा था कि कार्यकारिणी की पहली बैठक काफी हंगामेदार रहेगी, लेकिन इसके उलट बैठक में बाजवा के विरोध में एक भी सुर नहीं उठा।
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उपप्रधान ब्रह्म मोहिंद्रा और रनदीप सिंह नाभा ने कहा कि जिन लोगों को पद नहीं मिले हैं, वे पार्टी को कमजोर कर रहे हैं। महासचिव अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और उपप्रधान चरनजीत सिंह चन्नी ने कहा कि उनके पद लेकर नाराज लोगों को दे दिए जाएं।

सचिव वीरेंदर शर्मा ने कहा कि अब तक हुए सभी इस्तीफे मंजूर कर लेने चाहिए। दलित नेताओं सतनाम कैंथ, जोगिंदर सिंह मान, पवन आदिया और रामलाल जस्सी ने कहा कि पहली बार दलितों को इतना प्रतिनिधित्व मिला है।

इससे पूर्व कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह से ही कांग्रेस भवन में पदाधिकारियों का आगमन शुरू हो गया था। पंजाब के सह प्रभारी हरीश चौधरी फ्लाइट कैंसिल होने के कारण नहीं पहुंच सके।

दोपहर करीब साढ़े बारह बजे बाजवा के पहुंचने पर समर्थकों ने ढोल की थाप पर भंगड़ा डालकर उनका स्वागत किया।

समर्थक जुटा कर दिखाया दमखम
प्रताप सिंह बाजवा गुट को उम्मीद थी कि विरोधी मीटिंग में हंगामा कर सकते हैं, क्योंकि सह प्रभारी हरीश चौधरी ने भी मीटिंग में शामिल होना था।

कांग्रेस भवन में बाजवा गुट के करीब एक हजार लोग मौजूद थे, ताकि अगर मीटिंग में विरोधी हंगामा करें तो बाहर उसका जवाब दिया जा सके।

कामयाब रही बाजवा की रणनीति
प्रताप सिंह बाजवा की रणनीति के तहत पहली मीटिंग अपने पक्ष में करवा ली। बाजवा को पता था कि सबसे ज्यादा विरोध 148 कार्यकारी सदस्य और विशेष आमत्रित सदस्य करेंगे।

इसलिए उन्होंने पहली मीटिंग में इन लोगों को बुलाया ही नहीं। सिर्फ 35 महासचिव, 14 उपप्रधान, 61 सचिव और 27 जिला प्रधान बुलाए थे। इनमें से ज्यादातर लोग पद पाने से संतुष्ट थे।

कैप्टन की सेकेंड लाइन को भी मिलाया
प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने रणनीति के तहत कैप्टन अमरिंदर सिंह के दो सबसे खास लोगों राणा गुरजीत सिंह व अरविंद खन्ना को कमेटी से अलग रखा।


पर कैप्टन की सेकेंड लाइन को कार्यकारिणी में पद दिए। कैप्टन गुट के माने जाते राणा गुरमीत सोढी, तेजिंदर सिंह बिट्टू, रमेश सिंगला, परमिंदर सिंह पिंकी समेत कई नेता मीटिंग में शामिल हुए।

राणा सोढी जल्दी चले गए, पर बाकी नेता बाजवा के साथ ही रहे।
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