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किसानों के समर्थन में प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण व सुखदेव ढींढसा ने पद्मभूषण सम्मान लौटाया

Thu, 03 Dec 2020 01:39 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 03 Dec 2020 01:39 PM IST
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Parkash singh badal and Sukhdev Singh Dhindsa return padma award in wake of farmers protest modi govt shiromani akali dal farm law
प्रकाश सिंह बादल (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ अब पंजाब में भारत सरकार से मिले सम्मानों को लौटाने का सिलसिला शुरू हो गया है। किसानों पर की गई कार्रवाई से नाराज पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने पद्म पुरस्कार भारत सरकार को लौटाने की पेशकश की है। पूर्व मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविद को तीन पन्नों की चिट्ठी लिखकर कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की है।

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पद्म विभूषण लौटाते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने चिट्ठी में लिखा है कि मैं इतना गरीब हूं कि किसानों के लिए कुर्बान करने के लिए मेरे पास कुछ और नहीं है। मैं जो भी हूं किसानों की वजह से हूं। ऐसे में अगर किसानों का अपमान हो रहा है तो किसी तरह का सम्मान रखने का कोई फायदा नहीं है। किसानों के साथ जिस तरह का धोखा किया गया है, उससे उन्हें काफी दुख पहुंचा है।
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किसानों के आंदोलन को जिस तरह से गलत नजरिए से पेश किया जा रहा है, वह उचित नहीं है। 1977 में केंद्रीय कृषि मंत्री रह चुके बादल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के सबसे करीबी नेताओं में से थे। प्रकाश सिंह बादल को 2015 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
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सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी लौटाया सम्मान
कृषि कानूनों के विरोध में धरने पर बैठे किसानों के समर्थन में शिरोमणि अकाली दल (डेमोक्रेटिक) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी गुरुवार को पद्म भूषण सम्मान वापस कर दिया। उनके बेटे व पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर ढींढसा ने इसकी पुष्टि की है। ढींढसा पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।

किसानों के हित में पूर्व मुख्यमंत्री का यह बड़ा फैसला है। राष्ट्रपति को भेजी चिट्ठी में उन्होंने अपना पूरा दर्द बयां किया है कि उनके साथ कितना बड़ा धोखा किया गया है। किसानों की वर्तमान में हो रही दुर्दशा को देखते हुए उन्होंने मजबूरी में फैसला किया है। केंद्र सरकार को उनका यह दर्द समझना चाहिए और कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला करना चाहिए। - डॉ. दलजीत सिंह चीमा, प्रवक्ता, शिअद।


 

आज जो हालत देश में किसानों की है, वह बेहद दयनीय है। दिल्ली बॉर्डर पर माताएं, बहनें और बच्चों का बुरा हाल हो रखा है। ऐसे में सरकार के किसी भी सम्मान को मैं नहीं ले सकता। - सुखदेव सिंह ढींढसा, सांसद, राज्यसभा।


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