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तीन योद्धाओं ने कोरोना से लड़ने को बढ़ाया हौसला, बोले- हिम्मत से जीती जा सकती है बड़ी से बड़ी जंग
Thu, 16 Jul 2020 12:54 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, पटियाला
अमर उजाला, पटियाला
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2020 12:54 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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पटियाला में कोरोना के खिलाफ जंग में लोगों का हौसला बढ़ाने की एक अनूठी पहल की गई। जिसके तहत तीन योद्धाओं ने फेसबुक पर लाइव होकर अपने जिंदगी के तजुर्बे लोगों के साथ साझे किए। इस मौके पर सन्नौर की सब्जी मंडी में लाकडाउन में ड्यूटी दौरान निहंग सिंहों के हमले में हाथ कटने से घायल हुए एसआई हरजीत सिंह ने एक कोरोना योद्धा के तौर पर लोगों को कहा कि हौसले से बड़ी से बड़ी जंग जीती जा सकती है।
उन्होंने कहा कि अगर हाथ कटने बाद वह हौसला हार जाते, तो उनका हाथ दोबारा जुड़ा न होता और आपरेशन बाद दोबारा इसमें मूवमेंट न हो पाती। उन्होंने कहा कि वह अपना कटा हाथ खुद लेकर घायल हालत में अस्पताल पहुंचे थे। इसलिए बाकी लोगों को भी कोरोना से घबराना नहीं, बल्कि सरकार की हिदायतों पर चलते हुए इससे बचने के लिए सावधानियां बरतनी चाहिए। इस मौके तीनों योद्धाओं ने हैप्पी डेथ एंड रिबर्थ डे पर केक काट कर हौसले की मिसाल भी पैदा की।
हौसला नहीं हारा और बना चैंपियन
कारगिल जंग के योद्धा मेजर (सेवामुक्त) डीपी सिंह ने कहा कि डोगरा रेजिमेंट 7 बटालियन में रहकर कारगिल युद्ध में आपरेशन विजय के दौरान अखनूर सेक्टर में 1999 में 15 जुलाई को जब उनकी उम्र 24 साल की थी। उस समय वह बम धमाका होने कारण अपनी एक टांग गंवा बैठे थे। लेकिन मेजर सिंह ने हौसला नहीं हारा और कृत्रिम टांग के सहारे 2009 में दौड़ना शुरू किया। 2019 में एशिया में स्काई डाइविंग करने वाले पहले व्यक्ति बने और बेस्ट खिताब जीता।
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1990 में लगी गोली के छर्रे आज भी शरीर में मौजूद: एसएसपी
फेसबुक लाइव के दौरान एसएसपी पटियाला मनदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि जिंदगी में बड़े से बड़े संकट पर भी हौसले के साथ जीत हासिल की जा सकती है। आगे कहा कि 1990 में ड्यूटी के दौरान गोली लगने कारण वह गंभीर रूप में घायल हो गए थे। आज भी उनके शरीर में गोलियों के छर्रे मौजूद हैं। लेकिन हौसले कारण उन्होंने ड्यूट दौरान कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। वह अपनी टीम साथ कोरोना महामारी में भी ड्यूटी पर तैनात हैं और 24 घंटे लोगों की सेवा कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि अगर हाथ कटने बाद वह हौसला हार जाते, तो उनका हाथ दोबारा जुड़ा न होता और आपरेशन बाद दोबारा इसमें मूवमेंट न हो पाती। उन्होंने कहा कि वह अपना कटा हाथ खुद लेकर घायल हालत में अस्पताल पहुंचे थे। इसलिए बाकी लोगों को भी कोरोना से घबराना नहीं, बल्कि सरकार की हिदायतों पर चलते हुए इससे बचने के लिए सावधानियां बरतनी चाहिए। इस मौके तीनों योद्धाओं ने हैप्पी डेथ एंड रिबर्थ डे पर केक काट कर हौसले की मिसाल भी पैदा की।
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हौसला नहीं हारा और बना चैंपियन
कारगिल जंग के योद्धा मेजर (सेवामुक्त) डीपी सिंह ने कहा कि डोगरा रेजिमेंट 7 बटालियन में रहकर कारगिल युद्ध में आपरेशन विजय के दौरान अखनूर सेक्टर में 1999 में 15 जुलाई को जब उनकी उम्र 24 साल की थी। उस समय वह बम धमाका होने कारण अपनी एक टांग गंवा बैठे थे। लेकिन मेजर सिंह ने हौसला नहीं हारा और कृत्रिम टांग के सहारे 2009 में दौड़ना शुरू किया। 2019 में एशिया में स्काई डाइविंग करने वाले पहले व्यक्ति बने और बेस्ट खिताब जीता।
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1990 में लगी गोली के छर्रे आज भी शरीर में मौजूद: एसएसपी
फेसबुक लाइव के दौरान एसएसपी पटियाला मनदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि जिंदगी में बड़े से बड़े संकट पर भी हौसले के साथ जीत हासिल की जा सकती है। आगे कहा कि 1990 में ड्यूटी के दौरान गोली लगने कारण वह गंभीर रूप में घायल हो गए थे। आज भी उनके शरीर में गोलियों के छर्रे मौजूद हैं। लेकिन हौसले कारण उन्होंने ड्यूट दौरान कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। वह अपनी टीम साथ कोरोना महामारी में भी ड्यूटी पर तैनात हैं और 24 घंटे लोगों की सेवा कर रहे हैं।