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Hindi News ›   Chandigarh ›   Kargil vijay Diwas 2020: Read the story of the bravery of Satpal Singh

CourageInKargil: शेर खान समेत चार दुश्मनों को किया था ढेर, नौ साल ट्रैफिक संभाला, पढ़ें- सतपाल सिंह की वीरता

Sun, 26 Jul 2020 01:45 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो नवनीत छिब्बर, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
नवनीत छिब्बर, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब) Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 26 Jul 2020 01:45 PM IST
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Kargil vijay Diwas 2020: Read the story of the bravery of Satpal Singh
Kargil vijay diwas - फोटो : अमर उजाला

भारत की धरती वीर गाथाओं से भरी है। हर एक जाबांज की कहानी हमें प्रेरणा देती है। विपरीत हालातों में अदम्य साहस दिखाने वाले इन बहादुरों में एक नाम पंजाब के सतपाल सिंह का है। सतपाल सिंह का खौफ पाक सेना में अभी भी है। कारगिल युद्ध में सतपाल सिंह ने चार दुश्मनों को ढेर किया था। इन्हीं में एक पाक सेना का कैप्टन शेर खान भी था। जिसे बाद में पाकिस्तान ने अपने सर्वोच्च वीरता पुरस्कार से नवाजा था।

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इधर, सतपाल सिंह को पंजाब पुलिस में बतौर कांस्टेबल नौकरी करनी पड़ी। सीने पर आधा नीला आधा केसरी मेडल यानी वीर चक्र लटकाए भारतीय सेना का यह जांबाज सिपाही पंजाब पुलिस के लिए नौ साल तक ट्रैफिक कंट्रोल करता रहा। पिछले साल विजय दिवस पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस जांबाज सिपाही को डबल प्रमोशन देते हुए पंजाब पुलिस में एएसआई पदोन्नत किया था।
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कारगिल युद्ध के हीरो रहे सतपाल सिंह की योग्यता को साल 2010 में नौकरी देते समय इग्नोर कर दिया गया था। युद्ध में उनकी वीरता के लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। फौज से रिटायर होने के बाद उन्होंने पंजाब पुलिस में नौकरी के लिए आवेदन किया। तत्कालीन सरकार ने उनकी योग्यता व वीरता पुरस्कार को महत्व न देते हुए उन्हें बतौर कांस्टेबल पंजाब पुलिस में भर्ती किया।

परिवार के गुजारा के लिए सतपाल सिंह ने भी यह नौकरी कर ली। संगरूर जिले के भवानीगढ़ की सड़कों पर चार मेडल सीने पर लटकाए सतपाल सिंह ट्रैफिक मैनेज करते रहे। वीर चक्र युद्ध के मैदान में अदम्य साहस का परिचय देने वाले सैनिक को दिया जाता है। साल 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान सतपाल सिंह सेना में सिपाही थे।

सतपाल उस टीम का हिस्सा थे, जिसने टाइगर हिल पर चढ़ाई की थी। इस टीम में दो अफसर और चार जेसीओ सहित 46 जवान थे। इस टीम ने टाइगर हिल पर कब्जा करने की पटकथा लिखी थी। पाकिस्तानी सेना के साथ टाइगर हिल में हुए युद्ध में उन्होंने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया था। इस युद्ध में पाकिस्तान कैप्टन शेर खान सहित चार पाकिस्तानी सैनिकों को अपनी गोली का निशाना बना दुश्मन को घुटनों पर ला दिया था।

सतपाल की गोली से मारे गए कैप्टन शेर खान को पाकिस्तान का सबसे बड़ा बहादुरी सम्मान निशान-ए-हैदर दिया गया था। सतपाल सिंह कहते हैं कि हम पांच जुलाई 1999 को वहां पहुंच गए थे। उस समय बहुत ज्यादा ठंड थी। हमारे सामने चुनौती थी कि या तो हम ज्यादा कपड़े पहनें या ज्यादा हथियार लें। हमने वही किया जिसकी जरूरत थी। सतपाल साल 2009 में आर्मी से रिटायर हुए। साल 2010 में उन्होंने पंजाब पुलिस को ज्वाइन किया।

वीर चक्र विजेता सतपाल सिंह का मामला जब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने आया तो उन्होंने कहा कि यह जांबाज सिपाही स्पेशल ट्रीटमेंट डिजर्व करते हैं। साल 2010 में सरकार ने उनकी नियुक्ति के समय उन्हें किसी तरह की वरीयता नहीं दी। उन्होंने तत्कालीन पंजाब सरकार की गलती को सुधारते हुए सतपाल सिंह को डबल प्रमोशन दे एएसआई पदोन्नत किया।

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