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जिन पर हुआ कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन का ट्रायल, पढ़ें- उनका पूरा इंटरव्यू, सिर्फ अमर उजाला पर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sun, 26 Jul 2020 05:32 PM IST
कोरोना वैक्सीन
कोरोना वैक्सीन - फोटो : social media
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कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल में शामिल होने वाले युवाओं के हौसले को देखकर नहीं लगता कि अब यह महामारी अधिक समय मानवता की दुश्मन बनी रह सकती है। क्योंकि इसे मात देने का बीड़ा एक बार फिर समाजसेवी युवाओं ने उठा लिया है। स्वयं की परवाह किए बने पहले फेज के ट्रायल में 20 वालंटियर आगे आए और स्वयं को रिसर्च के लिए सुपुर्द कर दिया। मानव सेवा व देश सेवा के नाम पर आगे आए इन वालंटियरों का कहना है कि मानव सेवा व देश सेवा करने का मौका बार-बार नहीं मिलता। अमर उजाला ने 20 में से दो वालंटियरों से खास बातचीत की। 



वालंटियर एक
पीजीआईएमएस में पहले तीन पर होने वाली रिसर्च में शामिल युवक को मलाल था कि वह पुलिस व फौज में शामिल होकर देश सेवा नहीं कर पाया। लेकिन जब रिसर्च की बात सामने आई तो देश सेवा के साथ मानव सेवा करने का भी मौका मिल गया। रिसर्च का पता चलते ही युवक ने तय कर लिया कि परिणाम जो भी हो वह इस मौके को नहीं चूकेगा। 


लोग रिसर्च से डरते हैं लेकिन मेरे लिए मौका था। यही वजह थी कि मैंने पीजीआईएमएस को तीन बार फोन किया कि मुझे रिसर्च में शामिल होना है। फिर उसके पास फोन आया कि वह अपनी जांच करवाने आ जाए। उसकी चार रक्त, एक यूरिन व एक कोविड की जांच की गई। सारी रिपोर्ट ओके होने  के बाद सुबह एक्सपर्टस की टीम के आगे बाजू पर पांच एमजी का इंजेक्शन दे दिया गया। 

सालों से दबा सेवा का जज्बा जो दिल में था वह दो से तीन सेकेंड इंजेक्शन लगने के दौरान पूरा हो रहा था। अब स्वयं गर्व होता है कि मैं भी किसी खास चीज के काम आ रहा हूं। रिसर्च में शामिल करने से पहले डॉक्टरों ने कई कागजात साइन कराए। इसमें बताया गया था कि वह स्वयं की मर्जी से रिसर्च में शामिल हो रहा है। उसके उपर किसी का कोई दबाव नहीं है।

वालंटियर दो
लोगों के जीवन की रक्षा के लिए रक्तदान करते थे लेकिन रिसर्च का हिस्सा बनना तो सौभाग्य है। रोहतक के एक गांव में खेतीबाड़ी करने वाला युवक रिसर्च में शामिल हैं और उसे गर्व है कि वह 12वीं पास है लेकिन मानव सेवा करने का मौका उसको मिला। वह पहले से रक्तदान करता आ रहा है, जब साथियों से रिसर्च के बारे में पता चला तो इसका हिस्सा बनने का प्रण कर लिया। 

पहली डोज लगवाते समय कोई डर नहीं था। अपने डॉक्टरों पर पूरा भरोसा था कि वह कुछ नहीं होने देंगे। रिसर्च में शामिल होने से एक रात पहले वह एक सोनीपत के अज्ञात मरीज को रक्त भी दे कर आया था। युवक ने बताया कि वैक्सीन लगने के बाद उसे अच्छा महसूस हो रहा है। तीन घंटे वह डॉक्टरों की निगरानी में रहा। जब कोई विपरीत प्रभाव नहीं हुआ तो उसे घर जाने की अनुमति मिल गई। अब उसे देख कर उसकी संस्था से और भी लोग रिसर्च में शामिल होने की बात कर रहे हैं। हालांकि डॉक्टरों ने वैक्सीन देने से पहले बताया था कि इसका साइड इफेक्ट भी हो सकता है लेकिन मानव सेवा के आगे कोई खतरा मायने नहीं रखता। अब जब दूसरी डोज के लिए बुलाया जाएगा तो आऊंगा।
नोट: गोपनीयता भंग न हो इसके लिए वालंटियरों के नाम व पहचान उजागर नहीं किए जा रहे हैं। इन वालंटियरों से बातचीत की रिकार्डिंग अमर उजाला के पास है। इन्होंने स्वेच्छा से अपना साक्षात्कार दिया है।
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