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कोरोना इफेक्टः लेबर की कमी से निपटने के लिए ऑटोमेशन की तरफ बढ़ रही है मोहाली इंडस्ट्री

Wed, 10 Jun 2020 12:53 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, मोहाली
अमर उजाला, मोहाली Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 10 Jun 2020 12:53 PM IST
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Mohali industry moving towards automation to overcome labor shortage, corona effect
सांकेतिक तस्वीर
वर्ष 1972 में पंजाब ट्रैक्टर्स का कारखाना लगने के साथ ही मोहाली इंडस्ट्री की शुरूआत हुई थी। यहां के 3000 से ज्यादा कारखाने सरकार को 100 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू हर महीने देते हैं। कोरोना के कारण आई लेबर की कमी से जूझ रही वीआईपी सिटी की इंडस्ट्री ऑटोमेशन (मशीनीकरण) के जरिए इस परेशानी से निपटने का मन बना रही है। इसके बाद 50 फीसदी मशीनीकरण के साथ चल रही यहां की इंडस्ट्रीज, 75 से 80 फीसदी मशीनीकरण के साथ काम करेंगी।
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मोहाली इंडस्ट्री की शुरूआत 1972 में पंजाब ट्रैक्टर्स के कारखाने के साथ हुई जिसे अब महिंद्रा ट्रैक्टर्स के नाम से जाना जाता है। कोरोना लॉकडाउन के दौरान बंद रही इंडस्ट्रीज ने 3 मई से काम करना शुरू कर दिया था। मोहाली इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के पूर्व प्रेजीडेंट संजीव वशिष्ठ बताते हैं कोरोना के कारण बाहरी लेबर अपने राज्यों को लौट चुकी है। उनके तीन महीने से पहले लौटने की उम्मीद नहीं है।
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मोहाली के 3000 से ज्यादा छोटी-बड़ी इंडस्ट्रियल यूनिट के पास लेबर की उपलब्धता 50 प्रतिशत तक रह गई है। ऐसे में ऑटोमेशन की ओर जाना ही इंडस्ट्रीज के पास विकल्प बचता है। अब मोहाली की इंडस्ट्रीज ऑटोमेशन की तरफ कदम बढ़ा रहीं हैं। मोहाली की इंडस्ट्रीज अभी 50 फीसदी ऑटोमेशन यानी मशीनीकरण के साथ चल रहीं थीं। इसमें 50 फीसदी काम लेबर करती थी। ऑटोमेशन होने से 20 से 25 फीसदी लेबर की जरूरत की पड़ेगी, बाकी काम ऑटोमेटिक मशीनें करेंगी।
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कुछ यूनिट की कर रहीं पूरी क्षमता से काम
मोहाली में ट्रैक्टर उत्पादन सहित उनके पार्ट्स का उत्पादन, माइनिंग मशीनरी व उनके पार्ट्स का उत्पादन करने वाली इकाइयों सहित कुछ यूनिट ही अभी तक पूरी क्षमता के साथ काम कर पा रहीं हैं। रेलवे पार्ट्स, ऑटो मोबाइल सेक्टर, जेसीबी, ऑटो वाहन, ऑटो पार्ट्स उत्पादन सहित बड़ी संख्या में यूनिट व निर्माण इकाइयां क्षमता का मात्र 30 फीसदी ही काम कर पा रही हैं।

400 करोड़ के रेवन्यू का नुकसान
मोहाली की 3000 से ज्यादा इंडस्ट्रियल यूनिट सरकार को प्रति माह 100 करोड़ से ज्यादा रेवेन्यू देती हैं। संजीव वशिष्ठ के अनुसार कोरोना के कारण लॉकडाउन से सरकार को मोहाली इंडस्ट्री से करीब 400 करोड़ के रेवेन्यू का नुकसान हुआ है। अनलॉकिंग के दो महीने तक मोहाली की इंडस्ट्रीज 50 फीसदी की क्षमता से ज्यादा काम नहीं कर पाएंगी जिससे सरकार को रेवेन्यू का नुकसान उठाना पड़ेगा।


स्किल्ड लेबर की मांग बढ़ेगी
कोरोना संक्रमण के कारण लेबर की कमी व उत्पादन बढ़ाने के लिए मोहाली इंडस्ट्रीज ने ऑटोमेशन की तरफ कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। कोरोना संक्रमण के बीच डिस्टेंसिंग बनाकर सुरक्षित ढंग से काम कर पाने का ऑटोमेशन ही तरीका है। बाजार में घरेलू कामकाज वाली ऑटोमेटिक मशीनों की मांग बढ़ी है। ऑटोमेशन की तरफ जाना समय की मांग है। इससे स्किल्ड लेबर की मांग बढे़गी।
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