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सबसे छोटी उम्र के प्रोग्रामर तन्मय पहुंचे पहुंचे सीयू
Updated Thu, 06 Dec 2018 01:32 AM IST
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सीयू में टेक सेशन में हुए शामिल, विद्यार्थियों से हुए रूबरू
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। कंप्यूटर की अति आधुनिक तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग के क्षेत्र में विशेष महारत हासिल करके विश्व के सब से छोटी उम्र के प्रोग्रामर तन्मय बख्शी बुुधवार को चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआं पहुंचे। विद्यार्थियों से रूबरू होते हुए उन्होंने इस लाइन की बारीकियों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में एआई ऐमऐल तकनीकें अटूट हिस्सा बन चुकी हैं। मोबाइल फोन, लैपटॉप इत्यादि पर काम करते हुए हम इन तकनीकों का लाभ उठाते हैं। तन्मय बख्शी कनाडा में रहने वाले एक भारतीय परिवार के साथ संबंधित हैं, जिसने अपने जीवन केवल 5वें साल से ही प्रोग्रामिंग एवं कोडिंग के क्षेत्र में काम करना शुरू कर दिया था। इसका गुर उसने अपने पिता पुनीत बख्शी से ही हासिल किया जोकि खुद एक पेशेवर कंप्यूटर प्रोग्रामर हैं। 9 साल की उम्र में उस की तरफ से टीटेबल नाम से एप का निर्माण किया गया। जबकि 12 साल की उम्र में वह विश्व की जानी-मानी आईटी कंपनी आईबीएम से जुड़ गया। इस दौरान उस की तरफ से एआई-ऐमऐल के क्षेत्र में बहुत सी प्रगतिशील तकनीकों पर काम किया जा रहा है जिसके साथ शिक्षा, सेहत एवं समाज भलाई के क्षेत्र में लोगों के लिए लाभकारी योगदान डाला जा सके। तन्मय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग तकनीकों के सेहत सहूलतों के क्षेत्र में होने वाले फायदों के बारे में बताया गया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में हर पिछड़े व ग्रामीण क्षेत्र में बढ़िया अस्पताल तथा योग्य डाक्टर उपलब्ध होना बेहद मुश्किल है। हालांकि ऐसी जगह पर एक मशीन को उपलब्ध करवाया जा सकता है। इस टेक-टॉक के दौरान यूनिवर्सिटी घड़ूूंआं के कुलपति सतनाम सिंह संधू, उप-कुलपति परो (डॉ.) आर एस बावा, डायरेक्टर इंजीनियरिंग डॉ. एसएस सहगल व पंजाब सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (आईएएस) डा. निरमलजीत सिंह कलसी भी हाजिर थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। कंप्यूटर की अति आधुनिक तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग के क्षेत्र में विशेष महारत हासिल करके विश्व के सब से छोटी उम्र के प्रोग्रामर तन्मय बख्शी बुुधवार को चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआं पहुंचे। विद्यार्थियों से रूबरू होते हुए उन्होंने इस लाइन की बारीकियों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में एआई ऐमऐल तकनीकें अटूट हिस्सा बन चुकी हैं। मोबाइल फोन, लैपटॉप इत्यादि पर काम करते हुए हम इन तकनीकों का लाभ उठाते हैं। तन्मय बख्शी कनाडा में रहने वाले एक भारतीय परिवार के साथ संबंधित हैं, जिसने अपने जीवन केवल 5वें साल से ही प्रोग्रामिंग एवं कोडिंग के क्षेत्र में काम करना शुरू कर दिया था। इसका गुर उसने अपने पिता पुनीत बख्शी से ही हासिल किया जोकि खुद एक पेशेवर कंप्यूटर प्रोग्रामर हैं। 9 साल की उम्र में उस की तरफ से टीटेबल नाम से एप का निर्माण किया गया। जबकि 12 साल की उम्र में वह विश्व की जानी-मानी आईटी कंपनी आईबीएम से जुड़ गया। इस दौरान उस की तरफ से एआई-ऐमऐल के क्षेत्र में बहुत सी प्रगतिशील तकनीकों पर काम किया जा रहा है जिसके साथ शिक्षा, सेहत एवं समाज भलाई के क्षेत्र में लोगों के लिए लाभकारी योगदान डाला जा सके। तन्मय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग तकनीकों के सेहत सहूलतों के क्षेत्र में होने वाले फायदों के बारे में बताया गया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में हर पिछड़े व ग्रामीण क्षेत्र में बढ़िया अस्पताल तथा योग्य डाक्टर उपलब्ध होना बेहद मुश्किल है। हालांकि ऐसी जगह पर एक मशीन को उपलब्ध करवाया जा सकता है। इस टेक-टॉक के दौरान यूनिवर्सिटी घड़ूूंआं के कुलपति सतनाम सिंह संधू, उप-कुलपति परो (डॉ.) आर एस बावा, डायरेक्टर इंजीनियरिंग डॉ. एसएस सहगल व पंजाब सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (आईएएस) डा. निरमलजीत सिंह कलसी भी हाजिर थे।