Punjab: विदेश में अपनी मेहनत से पंजाबियों ने जमाई धाक, कनाडा-यूके के विकास में निभा रहे अहम भूमिका
कनाडा में पंजाब मूल के लोगों की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार सिख नेतृत्व वाली न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के सहयोग से चल रही है। कुछ साल पहले पंजाब मूल के जगमीत सिंह को इसका अध्यक्ष चुना गया था।
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विदेश जाने की होड़ में भले ही बड़ी संख्या में पंजाब के युवा ठगी का शिकार होते हैं और बहुत बार उन्हें अपनी जमापूंजी से हाथ भी धोना पड़ता है, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है, जो अपनी प्रतिभा के दम पर वहां बड़ा मुकाम पाने में कामयाब हुए हैं। राजनीति से लेकर कारोबार के क्षेत्र में पंजाबियों का अच्छा खासा दखल है। कनाडा हो, यूके हो या यूएस हर जगह पंजाबियों की धाक है। इन देशों के विकास में पंजाब मूल के लोग अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। भारत से विदेश में पढ़ाई करने वालों में पंजाबी युवा सबसे अधिक हैं। इनके विदेश जाने का एक बड़ा कारण यह भी है कि अब वहां पंजाब मूल के लोग राजनीति और कारोबार को भी प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में युवा वहां जाकर अपने करीबी रिश्तेदारों जैसी सफलता हासिल करना चाहते हैं।
कनाडा के लिए हर साल एक लाख से अधिक युवा पढ़ाई जा रहे हैं। हर विद्यार्थी को वहां जाने से पहले कनाडा में 10 हजार डॉलर बैंक में रिजर्व रखवाने पड़ते हैं, जो बिना ब्याज के एक साल के भीतर विद्यार्थी को धीरे-धीरे कर खर्च करने के लिए दिए जाते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो कनाडा के बैंकों में पंजाब के लाखों डालर जमा हैं, जिससे वह वहां भी अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। इसी तरह हर साल कॉलेज में पढ़ने वाला विद्यार्थी औसतन 15 लाख रुपये फीस अदा करता है। इससे भी कनाडा की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
सिख नेतृत्व वाली एनडीपी के सहयोग से चल रही कनाडा की सरकार
कनाडा में पंजाब मूल के लोगों की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार सिख नेतृत्व वाली न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के सहयोग से चल रही है। कुछ साल पहले पंजाब मूल के जगमीत सिंह को इसका अध्यक्ष चुना गया था। इस पार्टी के पास अभी 25 सीटें हैं। जगमीत सिंह के नेतृत्व में पार्टी का प्रभाव बढ़ रहा है। इसके अलावा कनाडा में सांसद रूबी सहोता और अंजू ढिल्लों, कर्नल हरजीत सिंह तीसरी बार निर्वाचित होकर सदन में पहुंचे हैं। सुख धालीवाल पांचवीं बार निर्वाचित हुए हैं। सोनिया सिद्धू, कमल खैहरा, ब्रदीश चग्घर, अनीता आनंद, जगजीत सिंह, मनिंदर सिद्धू, रणदीप सहाय, परम धालीवाल, जार्ज चाहल, जसराज हलण, टिम उप्पल भी राजनीति में बड़ा नाम पंजाबी हैं। संसद व विधानसभा में कई सिख सदस्य हैं। हरजीत सिंह सज्जन तो वहां के रक्षा मंत्री रह चुके हैं।
मेहनत और मदद में आगे
पंजाब से विदेश जाने वाले लोगों को उनकी मेहनत और मददगार व्यवहार के कारण काफी पसंद किया जाता है। भारत से गए पंजाबियों ने वहां शुरुआत में खेतों में काम करने के साथ रेल लाइन बिछाने वाले मजदूरों के रूप में काम किया। बहुत जल्दी ही उन्हें चीनी व जापानी मजदूरों की तुलना में कहीं ज्यादा पसंद किया जाने लगा। कनाडा में ट्रांसपोर्ट का ज्यादातर कारोबार सिखों के हाथों में है। गुरुद्वारों से जरूरत पड़ने पर लोगों के खाने की सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। हर साल बड़ी तादाद में रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं। इन बातों का वहां की सरकार पर काफी असर है।
हर क्षेत्र में कमाया नाम
कनाडा में पंजाब मूल के लोगों ने हर क्षेत्र में नाम कमाया है। कनाडा के नामी कारोबारी दास ग्रुप के मालिक जसवंत दास, प्रसिद्ध कारोबारी स्वीट समोसा फैक्टरी के मालिक हरपाल सिंह, नामी एडवोकेट रमेश संघा और वैंकूवर में उक बड़ी कंपनी के मालकि बहादुर सिंह कुछ ऐसे नाम हैं, जिनका खासा प्रभाव है। हरजोत ओबेराय, संदीप सिंह बराड़, शीना अलंगर वहां के जाने माने शिक्षाविद हैं। बलजीत सिंह चड्ढा, हरबंस सिंह दोमान, जसपाल अटवाल व भाटिया की बड़े उद्योगपति व कारोबारी के रूप में पहचान है। विकास खन्ना जाने-माने रेस्तरां के मालिक हैं, जबकि मंजीत सिंह टीवी कलाकार व रूपनी सिंह वहां मोम का म्यूजियम बना रही उद्योगपति हैं। एलेक्स साधा फिल्म निर्माता व हरमीत सिंह सामाजिक कार्यकर्ता हैं। यूट्यूब पर चर्चित हस्तियों की बात करें तो जस रेन, कंवर सिंह व पंजाब फिल्मों की अभिनेत्री नीरू बाजवा व तरुणपाल भी पंजाब से हैं। उपन्यास लेखक गुरुजिंदर, रानी धारीवाल व कामेडियन लिली सिंह का भी वहां खासा प्रभाव है। खेलों के क्षेत्रों में वहां के खिलाड़ियों का अहम स्थान है। इनमें नवराज सिंह बस्सी से लेकर खैरासिंह भुल्लर आदि शामिल हैं।
इंग्लैंड ने खोले विद्यार्थियों के लिए दरवाजे
इंग्लैंड के पीएम ऋषि सुनक का परिवार मूल रूप से पंजाबी है। उनके दादा-दादी पंजाब के रहने वाले थे। 1960 में वह अपने बच्चों के साथ पूर्वी अफ्रीका चले गए थे। बाद में यहीं से उनका परिवार इंग्लैंड शिफ्ट हो गया। यूके में सांसद वरिंदर शर्मा, प्रीत गिल व तनमनजीत सिंह ढेसी जालंधर से हैं। तनमनजीत सिंह ढेसी पहले पगड़ीधारी सांसद हैं। यूके ने हाल ही में पंजाबी मूल के स्टूडेंट्स के लिए दरवाजे खोल रखे हैं। विद्यार्थी के साथ उसके जीवन साथी को यूके जाने की अनुमति है और वहां पर काम करने की भी।
ऑस्ट्रेलिया में बढ़ रहा रुझान
ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर हिंदुस्तान की प्रमुख भाषाओं में एक पंजाबी भाषा ने अपने बढ़ते प्रभाव का ऐसा डंका बजाया है कि वहां की हुकूमत को अपने स्कूली पाठ्यक्रमों में पहले से निर्धारित विषयों में पंजाबी को भी शामिल करना पड़ा। दस साल पहले ऑस्ट्रेलिया में पंजाबी मूल की आबादी 210,000 से अधिक थी, जो अब दोगुना हो चुकी है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने हाल में लागू की अपनी नई शिक्षा नीति में अब पंजाबी भाषा को भी जोड़ लिया है। ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा पंजाबी आबादी विक्टोरिया में है, इसके बाद न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड का स्थान आता है। शेपार्टन, विक्टोरिया में पहले से एक-एक गुरुद्वारा हैं। ऑस्ट्रेलियाई जीडीपी में करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी खेतीबाड़ी की है। वहां गन्ने की खेती प्रमुखता से होती है जिसे तकरीबन पंजाबी ही करते हैं। स्थानीय नागरिक भी बड़े चाव से पंजाबी बोलते है। यही वजह है कि इन इलाकों में कॉलेजों में पंजाबी मूल के विद्यार्थियों की लंबी कतार है। ऑस्ट्रेलिया में वेतन अन्य देशों के मुकाबले काफी अधिक है। वहां पर न्यूनतम 40 डॉलर प्रति घंटा पगार है, जिस कारण भारतीय विद्यार्थियों को अच्छी कमाई स्टडी के साथ हो जाती है।