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Ludhiana News: ईरान के बहाने आमने-सामने आए अमेरिका, चीन और रूस

Mon, 12 Jan 2026 05:50 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2026 05:50 PM IST
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The US, China, and Russia have come face-to-face over Iran.
-मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव से वैश्विक शक्ति संतुलन को चुनौती
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-रक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी: हालात मानवता के लिए खतरनाक
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कंवरपाल

हलवारा। मध्य-पूर्व में गहराता ईरान संकट एक बार फिर वैश्विक शक्ति संतुलन को चुनौती दे रहा है। अमेरिका, चीन और रूस तीनों महाशक्तियों के रणनीतिक हित जिस बिंदु पर टकरा रहे हैं वहां ईरान इस भू-राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन गया है। रक्षा मामलों के जानकार और भारतीय सेना के रिटायर्ड कर्नल मुख्तियार सिंह कुलार और कैप्टन राजिंदर सिंह लिट्ट का कहना है कि मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं। यदि समय रहते कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संकट मानवता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका, चीन और रूस इस समय टकराव के मुहाने पर खड़े दिखाई देते हैं। हालिया घटनाक्रम में ईरान की ओर से स्टारलिंक आधारित संचार व्यवस्था को निष्क्रिय करने की खबरों ने दुनिया का ध्यान खींचा। इससे मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट और जीपीएस सेवाएं बाधित हुईं। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इतनी उन्नत तकनीकी क्षमता ईरान को परोक्ष सहयोग के बिना मिलना कठिन है। उनका दावा है कि जिस तरह पूर्व में क्षेत्रीय संघर्षों में परदे के पीछे तकनीकी मदद दी जाती रही है उसी तरह रूस और चीन भी ईरान को तकनीकी और रणनीतिक समर्थन दे रहे हैं। चीन और रूस के मालवाहक जहाजों की लगातार ईरान आवाजाही को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
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ईरान में गहराता आंतरिक संकट
ईरान 2026 की शुरुआत से ही गंभीर आंतरिक संकट से जूझ रहा है। 2025 के अंत से देशभर में आर्थिक बदहाली, महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन और बेरोजगारी के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हुए। यह असंतोष जल्द ही राजनीतिक आंदोलन में बदल गया। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। हालात काबू में रखने के लिए सरकार ने कर्फ्यू, संचार बंदी और व्यापक गिरफ्तारियां कीं। अनौपचारिक रिपोर्टों में सैकड़ों मौतों और हजारों गिरफ्तारियों की बात कही जा रही है। हालांकि, सटीक आंकड़े सामने नहीं आ पाए हैं। ईरानी नेतृत्व ने इसके लिए अमेरिका और इजरायल समेत बाहरी शक्तियों को जिम्मेदार ठहराया है।
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चीन-ईरान संबंध रणनीतिक, पर संतुलित
चीन, ईरान का अहम रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है। ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए चीन ने प्रतिबंधों के बावजूद सीमित स्तर पर ईरानी तेल की खरीद जारी रखी जिससे तेहरान को आर्थिक राहत मिली। कूटनीतिक मंचों पर चीन एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध और परमाणु विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है। हालांकि वह प्रत्यक्ष सैन्य टकराव से बचते हुए सऊदी अरब और इजरायल जैसे देशों से भी संतुलन बनाए हुए है।


रूस-ईरान गठजोड़ और मजबूत
रूस और ईरान के रिश्ते बीते वर्षों में और प्रगाढ़ हुए हैं। 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते के बाद सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक सहयोग बढ़ा। संयुक्त सैन्य अभ्यास और खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान इस साझेदारी को नई मजबूती दे रहा है।

अमेरिका-ईरान तनाव बरकरार
अमेरिका और ईरान के संबंध अब भी तनावपूर्ण हैं। वाशिंगटन ने ईरान के ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्रों पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। परमाणु समझौते पर वार्ता ठप है। अमेरिका सत्यापन योग्य सीमाओं की मांग कर रहा है, जबकि ईरान पहले प्रतिबंधों में राहत चाहता है।


भारत पर संभावित असर
ईरान-अमेरिका तनाव का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। 2019 से पहले ईरान भारत का बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था। हाल के वर्षों में फिर से आयात की संभावनाएं टटोली गईं, लेकिन मौजूदा हालात इसमें बाधा बन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट को नियंत्रित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र, नाटो और ब्रिक्स देशों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। कूटनीति विफल रही तो यह टकराव वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
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