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ऑस्ट्रेलिया की नई इमिग्रेशन नीति : पंजाबी छात्रों के लिए परिवार साथ ले जाना मुश्किल

Sat, 19 Sep 2026 12:20 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना Updated Sat, 19 Sep 2026 12:20 AM IST
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Australia's New Immigration Policy: Difficult for Punjabi Students to Bring Families Along
कंवरपाल - संवाद
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हलवारा। अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम के बाद अब ऑस्ट्रेलिया ने भी इमिग्रेशन पर लगाम कस दी है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के परिवारों को साथ लाने पर पाबंदी लगाई है। पढ़ाई के नाम पर बार-बार वीजा बदलने और वर्किंग हॉलीडे वीजा के जरिये लंबे समय तक रुकने पर भी रोक लगा दी गई है।
गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने कहा कि सरकार का लक्ष्य नेट ओवरसीज माइग्रेशन को कम करना है। इसे मौजूदा 2,92,100 से घटाकर 2027 में 2.45 लाख और 2028 में 2.25 लाख किया जाएगा। नई व्यवस्था में छात्र और स्नातक वीजा धारक अपने पति-पत्नी या अन्य पारिवारिक सदस्यों को ऑस्ट्रेलिया नहीं ला सकेंगे। इसका सीधा असर पंजाब के उन परिवारों पर पड़ेगा जो विदेश शिक्षा के लिए योजना बनाते हैं। मई 2026 तक भारत ऑस्ट्रेलिया में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत था। भारत से कुल अंतरराष्ट्रीय छात्र संख्या के 26 फीसदी विद्यार्थी आते थे। सरकार ने वीजा हॉपिंग पर भी पाबंदी लगाई है। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल ज्यादा समय रुकने के लिए डिप्लोमा या छोटे कोर्स न चुनें।
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कौशल-आधारित इमिग्रशन पर जोर
नई नीति कौशल-आधारित इमिग्रेशन पर कुछ क्षेत्रों को प्राथमिकता देगी। इनमें स्वास्थ्य, निर्माण, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और रक्षा क्षेत्र शामिल हैं। संसाधन, कृषि और मत्स्य क्षेत्र को भी महत्व दिया जाएगा। पंजाब के विद्यार्थियों को ऐसी पढ़ाई और कौशल चुनना होगा जिनकी ऑस्ट्रेलिया में वास्तविक श्रम-बाजार मांग है।
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शिक्षा उद्योग पर प्रभाव और छात्रों के लिए सलाह
पर्थ के माइग्रेशन एजेंट मनप्रीत सिंह मन्न और एस इंटरनेशनल के प्रबंधक भूपिंदर सिंह ने चिंता जताई है। उनके अनुसार, परिवार साथ न ला पाने से ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा की अंतरराष्ट्रीय आकर्षण क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया का विश्वविद्यालय क्षेत्र भी चिंतित है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय शिक्षा 55 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का उद्योग है। विद्यार्थियों को दाखिले से पहले नए वीजा नियमों की आधिकारिक शर्तें जांचनी चाहिए। एजेंटों के दावों पर भरोसा न करके प्रमाणित जानकारी पर निर्णय लेना जरूरी है। उन्हें अंशकालिक काम के भरोसे विदेश शिक्षा की योजना नहीं बनानी चाहिए।
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