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Ludhiana News: केंद्रीय बजट से उम्मीद.... मुश्किल से सांस ले रहे होजरी निटवियर उद्योग को बूस्टर डोज की दरकार
Thu, 11 Jul 2024 07:42 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Updated Thu, 11 Jul 2024 07:42 PM IST
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-पंद्रह हजार इकाइयाें में सालाना 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार
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राजीव शर्मा
लुधियाना। पंजाब का होजरी निटवियर उद्याेग पिछले कुछ सालों से वहीं का वहीं खड़ा है। इंडस्ट्री में ग्रोथ दर्ज नहीं की जा रही है। सस्ता विदेशी आयात, कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर, संसाधनों की कमी और सुविधाओं के अभाव इंडस्ट्री की ग्रोथ में बड़ी बाधाएं हैं। दूसरी तरफ देश के अन्य शहरों में बने रेडीमेड गारमेंट्स के क्लस्टर तेजी से पंख फैला रहे हैं। केंद्र की मोदी 3.0 सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए अपना पहला बजट 23 जुलाई को पेश करेगी। इस बजट से सूबे के होजरी, निटवियर एवं टेक्सटाइल उद्योग को काफी उम्मीदें हैं कि उनको भी लेवल प्लेइंग फील्ड मिलेगा। सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाएगी एवं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे। उद्यमियों ने भी सरकार को इंडस्ट्री की समस्याओं से अवगत कराया है, ताकि उनका समाधान हो सके और इंडस्ट्री रफ्तार पकड़ सके। इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
सूबे की होजरी निटवियर इंडस्ट्री करीब सवा सौ साल पुरानी है। यहां पर इस उद्योग से जुड़ी करीब पंद्रह हजार इकाइयां हैं। इनमें सालाना 17 हजार करोड़ से अधिक का कारोबार हो रहा है। ज्यादातर इकाइयां माइक्रो एवं स्माॅल सेक्टर में स्थित हैं और अधिकतर घरेलू बाजार में ही काम कर रही हैं, जबकि यहां से निर्यात महज दो हजार करोड़ का भी नहीं है। साफ है कि संसाधनों की कमी के कारण इंडस्ट्री वक्त के साथ कदमताल नहीं मिला पा रही है।
देश में तामिलनाडु के त्रिपुर में काटन गारमेंट्स का क्लस्टर, महाराष्ट्र के भिवंडी में हैंडलूम का क्लस्टर, बंगलूरू, सूरत, अहमदाबाद, गुरुग्राम, पानीपत, कोलकाता के रेडीमेड गारमेंट्स, होजरी, टेक्सटाइल के क्लस्टर बेहतर काम कर रहे हैं। इनके मुकाबले पंजाब का क्लस्टर लगातार पिछड़ रहा है। इसे बूस्टर डोज की दरकार है। केंद्र ने मेगा टेक्सटाइल पार्क मंजूर किया था, लेकिन सूबा सरकार एक हजार एकड़ से अधिक जमीन नहीं दे पाई और पार्क नहीं बन सका। इंडस्ट्री की अपग्रेडेशन की उम्मीदें धूमिल हो गईं।
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कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल जरूरी
फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल ऑर्गेनाइजेशन में टेक्सटाइल डिवीजन के हेड अजीत लाकड़ा का कहना है कि होजरी टेक्सटाइल उद्योग में अभी 35 फीसदी महिलाएं काम कर रही हैं, यदि उनके लिए कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाए जाएं तो इंडस्ट्री का सत्तर फीसदी ये महिलाएं संभाल सकती हैं। इससे मैनपावर की दिक्कत भी कम हो जाएगी। इसके अलावा बजट में पंजाब के लिए एग्जिबिशन कम बिजनेस सेंटर बनाने के लिए फंड दिया जाए।
प्राेडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम की सीमा को कम करें
निटवियर अपैरल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन आफ लुधियाना के प्रधान सुदर्शन जैन कहते हैं कि ओवरसीज मार्केट में भी अपार संभावनाए हैं। विश्व में मैन मेड फाइबर का 190 बिलियन डाॅलर का मार्केट है, लेकिन देश से केवल एक बिलियन डाॅलर का ही निर्यात हो रहा है। पंजाब मैन मेड फाइबर का बड़ा सेंटर है। साफ है कि यहां से निर्यात को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए बजट में प्राेडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम की सीमा को कम करना होगा और इसका विस्तार करना होगा, ताकि सभी सेक्टर के उद्योग इसका लाभ ले सकें। दूसरे निर्यात बढ़ाने के लिए इंसेंटिव देने होंगे।
सस्ते आयात पर नियंत्रण जरूरी
निटवियर क्लब के महासचिव नरेंद्र मिगलानी के अनुसार होजरी निटवियर क्लस्टर को बड़ी मार सस्ते आयात से पड़ रही है। घरेलू बाजार में सस्ता माल डंप किया जा रहा है। बजट में इस पर अंकुश लगाने के प्रयास किए जाएं, तभी यहां की इंडस्ट्री आगे बढ़ पाएगी। इसके अलावा इंडस्ट्री को विश्व स्तरीय रिसर्च एंड डेवलपमेंट की सुविधाएं भी दी जाएं, तभी इंडस्ट्री बेहतर गुणवत्ता के साथ घरेलू एवं विश्व बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेगी।
ये हैं उद्योगपतियों की प्रमुख मांगें
-होजरी निटवियर टेक्सटाइल उद्योग को पटरी पर लाने के लिए मिले मेगा टेक्सटाइल पार्क।
-उत्पादों की मार्केटिंग के लिए नई दिल्ली के प्रगति मैदान की तर्ज पर बने एग्जीबिशन-कम-बिजनेस सेंटर।
-महिला कामगारों के लिए बनें कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल।
-बांग्लादेश से आ रहे जीरो ड्यूटी आयात पर प्रतिबंध लगाया जाए।
-चीन से आ रहे सस्ते आयात पर मिनिमम इंपोर्ट प्राइस तय कर उसे नियंत्रित किया जाए।
-सरकारी स्कीमों की माॅनीटरिंग के लिए केंद्र सरकार मॉनीटरिंग बाॅडी का गठन करे।
-विश्व स्तरीय रिसर्च एंड डेवलपमेंट सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।
-प्रदूषण की समस्याओं से निपटने के लिए सरकार बनाए काॅमन एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट।
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राजीव शर्मा
लुधियाना। पंजाब का होजरी निटवियर उद्याेग पिछले कुछ सालों से वहीं का वहीं खड़ा है। इंडस्ट्री में ग्रोथ दर्ज नहीं की जा रही है। सस्ता विदेशी आयात, कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर, संसाधनों की कमी और सुविधाओं के अभाव इंडस्ट्री की ग्रोथ में बड़ी बाधाएं हैं। दूसरी तरफ देश के अन्य शहरों में बने रेडीमेड गारमेंट्स के क्लस्टर तेजी से पंख फैला रहे हैं। केंद्र की मोदी 3.0 सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए अपना पहला बजट 23 जुलाई को पेश करेगी। इस बजट से सूबे के होजरी, निटवियर एवं टेक्सटाइल उद्योग को काफी उम्मीदें हैं कि उनको भी लेवल प्लेइंग फील्ड मिलेगा। सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाएगी एवं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे। उद्यमियों ने भी सरकार को इंडस्ट्री की समस्याओं से अवगत कराया है, ताकि उनका समाधान हो सके और इंडस्ट्री रफ्तार पकड़ सके। इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
सूबे की होजरी निटवियर इंडस्ट्री करीब सवा सौ साल पुरानी है। यहां पर इस उद्योग से जुड़ी करीब पंद्रह हजार इकाइयां हैं। इनमें सालाना 17 हजार करोड़ से अधिक का कारोबार हो रहा है। ज्यादातर इकाइयां माइक्रो एवं स्माॅल सेक्टर में स्थित हैं और अधिकतर घरेलू बाजार में ही काम कर रही हैं, जबकि यहां से निर्यात महज दो हजार करोड़ का भी नहीं है। साफ है कि संसाधनों की कमी के कारण इंडस्ट्री वक्त के साथ कदमताल नहीं मिला पा रही है।
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देश में तामिलनाडु के त्रिपुर में काटन गारमेंट्स का क्लस्टर, महाराष्ट्र के भिवंडी में हैंडलूम का क्लस्टर, बंगलूरू, सूरत, अहमदाबाद, गुरुग्राम, पानीपत, कोलकाता के रेडीमेड गारमेंट्स, होजरी, टेक्सटाइल के क्लस्टर बेहतर काम कर रहे हैं। इनके मुकाबले पंजाब का क्लस्टर लगातार पिछड़ रहा है। इसे बूस्टर डोज की दरकार है। केंद्र ने मेगा टेक्सटाइल पार्क मंजूर किया था, लेकिन सूबा सरकार एक हजार एकड़ से अधिक जमीन नहीं दे पाई और पार्क नहीं बन सका। इंडस्ट्री की अपग्रेडेशन की उम्मीदें धूमिल हो गईं।
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कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल जरूरी
फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल ऑर्गेनाइजेशन में टेक्सटाइल डिवीजन के हेड अजीत लाकड़ा का कहना है कि होजरी टेक्सटाइल उद्योग में अभी 35 फीसदी महिलाएं काम कर रही हैं, यदि उनके लिए कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाए जाएं तो इंडस्ट्री का सत्तर फीसदी ये महिलाएं संभाल सकती हैं। इससे मैनपावर की दिक्कत भी कम हो जाएगी। इसके अलावा बजट में पंजाब के लिए एग्जिबिशन कम बिजनेस सेंटर बनाने के लिए फंड दिया जाए।
प्राेडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम की सीमा को कम करें
निटवियर अपैरल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन आफ लुधियाना के प्रधान सुदर्शन जैन कहते हैं कि ओवरसीज मार्केट में भी अपार संभावनाए हैं। विश्व में मैन मेड फाइबर का 190 बिलियन डाॅलर का मार्केट है, लेकिन देश से केवल एक बिलियन डाॅलर का ही निर्यात हो रहा है। पंजाब मैन मेड फाइबर का बड़ा सेंटर है। साफ है कि यहां से निर्यात को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए बजट में प्राेडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम की सीमा को कम करना होगा और इसका विस्तार करना होगा, ताकि सभी सेक्टर के उद्योग इसका लाभ ले सकें। दूसरे निर्यात बढ़ाने के लिए इंसेंटिव देने होंगे।
सस्ते आयात पर नियंत्रण जरूरी
निटवियर क्लब के महासचिव नरेंद्र मिगलानी के अनुसार होजरी निटवियर क्लस्टर को बड़ी मार सस्ते आयात से पड़ रही है। घरेलू बाजार में सस्ता माल डंप किया जा रहा है। बजट में इस पर अंकुश लगाने के प्रयास किए जाएं, तभी यहां की इंडस्ट्री आगे बढ़ पाएगी। इसके अलावा इंडस्ट्री को विश्व स्तरीय रिसर्च एंड डेवलपमेंट की सुविधाएं भी दी जाएं, तभी इंडस्ट्री बेहतर गुणवत्ता के साथ घरेलू एवं विश्व बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेगी।
ये हैं उद्योगपतियों की प्रमुख मांगें
-होजरी निटवियर टेक्सटाइल उद्योग को पटरी पर लाने के लिए मिले मेगा टेक्सटाइल पार्क।
-उत्पादों की मार्केटिंग के लिए नई दिल्ली के प्रगति मैदान की तर्ज पर बने एग्जीबिशन-कम-बिजनेस सेंटर।
-महिला कामगारों के लिए बनें कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल।
-बांग्लादेश से आ रहे जीरो ड्यूटी आयात पर प्रतिबंध लगाया जाए।
-चीन से आ रहे सस्ते आयात पर मिनिमम इंपोर्ट प्राइस तय कर उसे नियंत्रित किया जाए।
-सरकारी स्कीमों की माॅनीटरिंग के लिए केंद्र सरकार मॉनीटरिंग बाॅडी का गठन करे।
-विश्व स्तरीय रिसर्च एंड डेवलपमेंट सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।
-प्रदूषण की समस्याओं से निपटने के लिए सरकार बनाए काॅमन एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट।