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Ludhiana News: अमेरिका की टैरिफ वार से हिला पंजाब का कपड़ा उद्योग

Fri, 29 Aug 2025 09:10 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 29 Aug 2025 09:10 PM IST
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Punjab's textile industry shaken by US tariff war
-नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने उठाई जीएसटी दर घटाने की मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। अमेरिका की ओर से शुरू की गई टैरिफ वार ने पंजाब के कपड़ा उद्योग को एक बड़ी चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। भारत पर लगी टैरिफ की दरें सबसे ऊंची हैं। इस झटके से निपटने के लिए नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (निटमा) ने केंद्र सरकार और जीएसटी परिषद से मांग की है कि मैन-मेड फाइबर (एमएमएफ) वैल्यू चेन में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल पर एक समान 5 प्रतिशत जीएसटी लागू किया जाए।
निटमा के अध्यक्ष सिद्धार्थ खन्ना ने 3-4 सितंबर 2025 को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक से पहले कहा कि वर्तमान व्यवस्था उद्योग के लिए घातक साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि पॉलिएस्टर स्टेपल फाइबर और पॉलिएस्टर स्पन यार्न पर जीएसटी कम किया जाए। इस समय फाइबर पर 18 प्रतिशत और यार्न पर 12 प्रतिशत जीएसटी लग रहा है, जबकि कपड़े पर टैक्स सिर्फ 5 प्रतिशत है। खन्ना ने कहा कि अगर यार्न को 5 प्रतिशत और फाइबर को 18 प्रतिशत टैक्स के दायरे में रखा जाएगा, तो यह असमानता (इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर) उद्योग को ठप कर देगी।
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उद्योग पर बढ़ रहा बोझ
निटमा के अनुसार टैक्स असमानता के कारण उद्योग पर कई तरह का बोझ पड़ रहा है, क्योंकि जीएसटी रिफंड में कार्यशील पूंजी फंस रही है। रिफंड लेने के दौरान प्रशासनिक झंझट और इंस्पेक्टर राज से जूझना पड़ रहा है। नई निवेश लागत बढ़ रही है, क्योंकि मशीनरी पर 18 प्रतिशत इनपुट टैक्स क्रेडिट बेकार हो जाता है। इसके अलावा राज्य सरकारों की एसजीएसटी प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। साथ ही विदेशी सस्ते आयातित माल से अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना भी उद्योग कर रहा है।
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उद्योग पर संकट, सुधार से बनेगा मौका
अमेरिका की ओर से बढ़े 50 प्रतिशत तक के टैरिफ ने पहले से दबाव झेल रहे पंजाब के वस्त्र उद्योग की चिंता दोगुनी कर दी है। खासकर लुधियाना, अमृतसर और आसपास के इलाकों में करीब 10 लाख श्रमिकों की आजीविका सीधे तौर पर दांव पर है। खन्ना ने कहा कि यह भारत के कपड़ा उद्योग के लिए निर्णायक समय है। यदि सरकार ने जीएसटी संरचना को तर्कसंगत बना दिया तो न सिर्फ अमेरिकी टैरिफ के असर को संतुलित किया जा सकेगा बल्कि निवेश और रोजगार दोनों में बढ़ोतरी होगी। यह संकट हमारे लिए अवसर भी बन सकता है।उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार तुरंत कदम उठाकर टैक्स ढांचे को सरल बनाएगी।
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