Budget 2024: विश्व में पंजाब के बासमती की खुशबू पहुंचा रहे उद्योग को लेवल प्लेईंग फील्ड की दरकार
देश के कुल बासमती निर्यात में पंजाब की हिस्सेदारी 35 फीसदी से अधिक है। पंजाब से 140 देशों में बासमती का निर्यात किया जा रहा है। इनमें साउदी अरब,ईरान, ईराक, संयुक्त अरब अमिरात,यमन इत्यादि प्रमुख हैं।
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पंजाब की सौंधी मिट्टी में पैदा हुए बासमती की खुशबू से विश्व के कई देश महक रहे हैं, साथ ही इस उद्योग ने भारतीय बासमती की धरोहर को सहेज कर ही नहीं रखा, बल्कि उसे घर घर पहुंचाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे।
देश के कुल बासमती निर्यात में पंजाब की हिस्सेदारी 35 फीसदी से अधिक है। पंजाब के निर्यातक लगातार बेहतर परफार्म करने का प्रयास कर रहे हैं, उनका तर्क है कि यदि सरकार सहयोग करें, उनको लेवल प्लेईंग फील्ड मुहैया कराए और उनको मजबूतर इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराया जाए, अतिरिक्त इंसेंटिव दिए जाएं तो बासमती निर्यात को और बुलंदियों पर पहुंचाया जा सकता है।
पंजाब 1978 से बासमती कर रहा निर्यात
वर्ष 1978 से पंजाब विश्व के देशों को बासमती का निर्यात कर रहा है और यहां की बासमती की विदेशों में अच्छी मांग है। विश्व बाजार में भारतीय बासमती का मुकाबला पाकिस्तान से है। पंजाब में आठ लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन पर बासमती की पैदावार की जा रही है और 38 लाख टन बासमती की पैदावार हो रही है। यहां पर तैयार ज्यादातर बासमती विश्व बाजार में निर्यात की जा रही है, केवल टुकड़ा चावल ही घरेलू बाजार में मार्केट किया जा रहा है। सूबे से विश्व के 140 देशों में बासमती का निर्यात किया जा रहा है। इनमें साउदी अरब,ईरान, ईराक, संयुक्त अरब अमिरात,यमन इत्यादि प्रमुख हैं।
उद्यमी कहते हैं कि पंजाब में जमीनी पानी का स्तर गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। बासमती की फसल में तीस फीसदी पानी कम उपयोग होता है। साफ है कि विविधिकरण के तहत किसानों को गेहूं धान फसल चक्र से निकाल कर बासमती को प्रोमोट करके जहां पानी को बचाया जा सकता है, वहीं किसानों की आय भी बढ़ाई जा सकती है।
ये हैं एक्सपोर्टर्स की मांगें
पंजाब राइस मिलर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के डायरेक्टर अशोक सेठी कहते हैं कि पंजाब के बासमती निर्यात को बूस्ट करने के लिए सरकार को मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस को 950 डालर प्रति टन से कम करके आठ सौ डालर प्रति टन करना होगा। इसके अलावा बासमती बेल्ट यानि अमृतसर, गुरदासपुर एवं तरनतारन को विशेष एक्सपोर्ट जोन घोषित किया जाए। इससे निर्यातकों की उत्पादन लागत में कमी आएगी और वे विश्व बाजार में बेहतर ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
इसके अलावा उद्यमियों को क्वालिटी सीड के लिए दिक्कतें आती हैं। इसे दूर करने के लिए पंजाब में बासमती सीड फार्म तैयार करने की जरूरत है। सीड की जांच के लिए विश्व स्तरीय लैब स्थापित की जाए। सेठी ने कहा कि यदि सरकार उद्योग को बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट मुहैया कराए तो यह उद्योग और तेजी से आगे बढ़ सकता है, क्योंकि विश्व बाजार में बासमती चावल की काफी मांग है।