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चीफ इंजीनियर के घर के बाहर बिजली कर्मियों का हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sun, 29 May 2016 09:44 PM IST
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लुधियाना में बिजली मुलाजिम अपनी मांगो को लेकर रोष प्रर्दशन करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
पीएसईबी इंप्लाइज एटक पंजाब की अगुवाई में बिजली मुलाजिमों की ओर से चीफ इंजीनियर के घर के बाहर राजगुरु नगर में रोष प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन की भनक लगने पर पुलिस प्रशासन ने बिजली मुलाजिमों को चीफ इंजीनियर के घर पहुंचने से कुछ दूर पहले ही रोक लिया।
मुलाजिमों ने वहीं पर टैंट लगाकर अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया और पंजाब सरकार व चेयरमैन केडी चौधरी के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद वह फिरोजपुर रोड पर रोष प्रदर्शन करने पहुंचे। जहां प्रदर्शनकारियों ने एसीपी सुरिंदर मोहन के माध्यम से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को मांग पत्र भी भेजा गया।
प्रधान सतनाम सिंह छलेड़ी और महासचिव जगदीश शर्मा ने कहा कि विभाग में पिछले कई साल से एक भी नई भर्ती रेगुलर नहीं की गई है। इस कारण लगभग 40 हजार से अधिक पोस्ट खाली पड़ी हैं। इन पोस्टों को भरने की जगह ठेकेदारी सिस्टम को ही प्रमोट किया जा रहा है। बिजली मुलाजिमों से 14 से 16 घंटे मजदूर की तरह काम लिया जा रहा है। मुलाजिमों और अधिकारियों पर काम का बोझ डाला जा रहा है।
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पंजाब सचिव रणजीत सिंह नीलों ने कहा कि सरकार की तरफ से करोड़ों रुपये लगाकर स्थापित किए गए पावर प्लांट यूनिटों को बंद रखकर प्राइवेट थर्मल प्लांटों से मंहगी बिजली खरीदी जा रही हैं। इससे विभाग के खजाने पर भारी बोझ पड़ रहा है। थर्मल प्लांटों में काम कर रहे मुलाजिमों में भी मैनेजमेंट और सरकार के प्रति रोष पाया जा रहा है।
बिजली विभाग को भंग करने के समय सरकार और पावरकॉम मैनेजमेंट ने मुलाजिमों से संबंधित संगठनों के साथ करार किया था, लेकिन आज तक मानी हुई मांगों में से एक भी मांग को लागू नहीं किया गया। इस कारण मुलाजिमों में रोष बढ़ता ही जा रहा है। यूनियन ने एलान किया कि यदि पावरकाम के चेयरमैन ने तानाशाही नीतियों को न त्यागा तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। इससे निकलने वाले नतीजों के लिए सरकार और पावरकॉम मैनेजमेंट ही जिम्मेदार होगी।
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मुलाजिमों ने वहीं पर टैंट लगाकर अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया और पंजाब सरकार व चेयरमैन केडी चौधरी के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद वह फिरोजपुर रोड पर रोष प्रदर्शन करने पहुंचे। जहां प्रदर्शनकारियों ने एसीपी सुरिंदर मोहन के माध्यम से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को मांग पत्र भी भेजा गया।
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प्रधान सतनाम सिंह छलेड़ी और महासचिव जगदीश शर्मा ने कहा कि विभाग में पिछले कई साल से एक भी नई भर्ती रेगुलर नहीं की गई है। इस कारण लगभग 40 हजार से अधिक पोस्ट खाली पड़ी हैं। इन पोस्टों को भरने की जगह ठेकेदारी सिस्टम को ही प्रमोट किया जा रहा है। बिजली मुलाजिमों से 14 से 16 घंटे मजदूर की तरह काम लिया जा रहा है। मुलाजिमों और अधिकारियों पर काम का बोझ डाला जा रहा है।
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पंजाब सचिव रणजीत सिंह नीलों ने कहा कि सरकार की तरफ से करोड़ों रुपये लगाकर स्थापित किए गए पावर प्लांट यूनिटों को बंद रखकर प्राइवेट थर्मल प्लांटों से मंहगी बिजली खरीदी जा रही हैं। इससे विभाग के खजाने पर भारी बोझ पड़ रहा है। थर्मल प्लांटों में काम कर रहे मुलाजिमों में भी मैनेजमेंट और सरकार के प्रति रोष पाया जा रहा है।
बिजली विभाग को भंग करने के समय सरकार और पावरकॉम मैनेजमेंट ने मुलाजिमों से संबंधित संगठनों के साथ करार किया था, लेकिन आज तक मानी हुई मांगों में से एक भी मांग को लागू नहीं किया गया। इस कारण मुलाजिमों में रोष बढ़ता ही जा रहा है। यूनियन ने एलान किया कि यदि पावरकाम के चेयरमैन ने तानाशाही नीतियों को न त्यागा तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। इससे निकलने वाले नतीजों के लिए सरकार और पावरकॉम मैनेजमेंट ही जिम्मेदार होगी।