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पॉवर काम ने 72 साल पुरानी फैक्टरी को भेजा 1.56 लाख जमा करवाने का नोटिस
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पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने रायकोट की 72 साल पुरानी लक्ष्मी आइस फैक्ट्री को 1.56 लाख जमा करवाने के लिए नोटिस भेजा गया है। यह नोटिस एडवांस कंजप्शन सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम से बनाया गया है। जबकि 1948 में उपभोक्ता ने फैक्ट्री का मीटर लगवाने के लिए 1980 रुपये जमा करवाए थे। हैरानी की बात यह है कि ताजा नोटिस में कहा गया है कि 72 साल पहले उन्होंने जो सिक्योरिटी 1980 रुपये जमा करवाई थी, वो आज के हिसाब से 1,58524 बनती है। इसलिए बाकी बचे 1,56544 जल्द जमा करवाएं।
फैक्ट्री के मालिक राजिंदर कुमार ने कहा कि पिछले साल कोरोना काल में बंद पड़ी फैक्ट्री का ही तकरीबन दो लाख रुपये का बिल भर चुके है। अब जब काम पूरी तरह से बंद है, बिजली का बिल और लेबर की पगार देना भी मुश्किल हो रहा है, तब बिजली विभाग ने इतनी बड़ी राशि जमा करने को कह दिया है। उन्होंने कहा कि 1948 में जो 1980 रुपये बतौर सिक्योरिटी उनके दादा ने जमा करवाई थी अगर 72 साल का उसका ब्याज जोड़ा जाए तो यह रकम कम से कम 25 लाख के ऊपर बनती है। यह रकम कहीं ऐडजस्ट नहीं की गई है।
बिजली विभाग के एसई अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि यह नोटिस स्थानीय स्तर पर विभाग द्वारा भेजा गया है। वह उच्च अधिकारिओं से इस पर बात करेंगे। एसडीओ रायकोट कुलदीप कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि पूरे साल की खपत के आधार पर सिक्योरिटी उपभोक्ता से ली जाती है और इस पर ब्याज भी दिया जाता है। उनसे यह पूछा गया कि जो सिक्योरिटी पहले दो बार भरवाई गई थी, वह रकम कहां ऐडजस्ट हुई, तो उन्होंने चुप्पी साध ली।
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फैक्ट्री के मालिक राजिंदर कुमार ने कहा कि पिछले साल कोरोना काल में बंद पड़ी फैक्ट्री का ही तकरीबन दो लाख रुपये का बिल भर चुके है। अब जब काम पूरी तरह से बंद है, बिजली का बिल और लेबर की पगार देना भी मुश्किल हो रहा है, तब बिजली विभाग ने इतनी बड़ी राशि जमा करने को कह दिया है। उन्होंने कहा कि 1948 में जो 1980 रुपये बतौर सिक्योरिटी उनके दादा ने जमा करवाई थी अगर 72 साल का उसका ब्याज जोड़ा जाए तो यह रकम कम से कम 25 लाख के ऊपर बनती है। यह रकम कहीं ऐडजस्ट नहीं की गई है।
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बिजली विभाग के एसई अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि यह नोटिस स्थानीय स्तर पर विभाग द्वारा भेजा गया है। वह उच्च अधिकारिओं से इस पर बात करेंगे। एसडीओ रायकोट कुलदीप कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि पूरे साल की खपत के आधार पर सिक्योरिटी उपभोक्ता से ली जाती है और इस पर ब्याज भी दिया जाता है। उनसे यह पूछा गया कि जो सिक्योरिटी पहले दो बार भरवाई गई थी, वह रकम कहां ऐडजस्ट हुई, तो उन्होंने चुप्पी साध ली।
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