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अब भोग और शादियों में जाकर मांग रहे है उम्मीदवार वोट

Mon, 07 Feb 2022 10:08 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Mon, 07 Feb 2022 10:08 PM IST
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Now going to indulgences and weddings, candidates are asking for votes
लुधियाना। बीस फरवरी को होने वाले मतदान के मद्देनजर हर उम्मीदवार ने अपने इलाके में सरगर्मियां तेज कर दी हैं। कोरोना काल के कारण सियासी नेताओं की बड़ी बैठकों और सभाओं के साथ-साथ रैलियों पर रोक है। रोड शो पर भी चुनाव आयोग ने पाबंदी लगा रखी है। मगर इस बार अलग ही अंदाज में चुनाव प्रचार चल रहा है। चुनाव जीतने के लिए प्रचर में जुटे सियासतदान लोगों के घरों में चक्कर काट रहे हैं, वहीं लोगों के दर्द बांटने की भी कोशिश में जुटे हैं। इस बार सियासी नेताओं की भोग की राजनीति जोरों पर चल रही है। नेता सिर्फ दर्द बांटने के लिए ही नहीं पहुंच रहे, लोगों के घर में खुशियों में भी शामिल हो रहे हैं।
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चुनाव में खड़े उम्मीदवार कम से कम समय में ज्यादा वोटरों तक पहुंचने की कोशिश में रहते हैं, लेकिन कोरोना के कारण इस बार चुनाव आयोग काफी सख्त है। चुनाव आयोग की तरफ से बड़ी रैलियों और रोड शो पर पाबंदी लगा रखी है। जिस कारण उम्मीदवारों को ज्यादा से ज्यादा सभाएं करनी पड़ रही हैं। वह सुबह ही डोर टू डोर प्रचार कर लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश में हैं, मगर फिर भी कहीं न कहीं इलाका रह जाता है। जिसके लिए उम्मीदवारों ने सबसे आसान तरीका ढूंढा है। वह इलाके में भोग और अंतिम संस्कार में ज्यादा से ज्यादा समय देने की कोशिश में रहते हैं। जिस इलाके में मौत होती है, वहां के नजदीकी लोगों के साथ उम्मीदवार वहां पहुंच जाते हैं और दुख साझा करते हैं। ऐसा करने से उनके दो काम हो रहे हैं, एक तो दुखी परिवार से दुख बांटना और दूसरे वहां अपना चुनाव प्रचार भी हो जाता है। अचानक अंतिम संस्कारों में सियासी लोगों के इतना ज्यादा आने से लोग भी कहीं न कहीं परेशान हैं। पहले तो नेता अपने नजदीकी और खास लोगों घरों में जाते थे, लेकिन चुनाव के कारण उन्हें हर घर में जाना पड़ रहा है।
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रोजाना होता है भोग और अंतिम संस्कार का डाटा इकट्ठा
चुनाव प्रचार के लिए उम्मीदवारों के समर्थक मीटिंग का आयोजन करते हैं, लेकिन कुछ समर्थक इलाके में उन लोगों का डाटा इकट्ठा करते हैं, जिनके भोग और अंतिम संस्कार होते हैं। जिसके बाद चुनाव प्रचार के लिए उम्मीदवार ज्यादा से ज्यादा भोग में शामिल हो रहे हैं। इसके साथ-साथ उम्मीदवार इलाके में रहने वाले लोगों की खुशियों में भी शामिल हो रहे हैं। वह बच्चों के जन्मदिन से लेकर शादी समारोह तक शामिल हो रहे हैं। चुनाव आयोग उम्मीदवार के हर खर्च पर नजर रखता है। मगर उम्मीदवार भी खर्च सोच समझ कर करते हैं। कई ऐसे खर्च होते हैं जो छिपा लिए जाते हैं। सबसे आसान और ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाने का चुनाव प्रचार सिर्फ भोग पर ही हो रहा है। (संवाद)
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