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कश्मीर मसले में हस्तक्षेप मंजूर नहीं : शाही इमाम
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Tue, 22 Oct 2013 10:32 PM IST
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लुधियाना में पंजाब के शाही इमाम मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बयान को घिनौनी साजिश करार दिया है।
नवाज ने कश्मीर मसले के हल के लिए अमेरिका को बिचौलिया बनाए जाने की बात कही है। मंगलवार को जामा मस्जिद में संवाददाताओं से मौलाना ने कहा कि नवाज अमेरिका के एजेंट हैं और उन्होंने यह बयान अमेरिका के इशारे पर दिया है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर मसले पर भारत और पाकिस्तान में अमेरिका को किसी भी कीमत पर बिचौलिया नहीं बनाया जा सकता। शाही इमाम ने कहा कि अमेरिका इसी ताक में है कि वह किसी तरह कश्मीर में उतर जाए और फिर एशिया में अपनी गुंडागर्दी का एक नया दौर शुरू करे।
इमाम ने कहा कि नवाज एक जिम्मेवार व्यक्ति होने के बावजूद इस बात को भूल गए कि आज तक जहां भी अमेरिकी फौजें गई हैं, वहां कोई फैसला या शांति कायम नहीं हुई, बल्कि अशांति और कत्लेआम हुआ है।
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इसकी मिसाल इराक, लीबिया और अफगानिस्तान हैं। उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान में नई सरकार को सही ढंग से चला नहीं पा रहे, इसलिए जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसी हरकतें कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमें इस बात को भी याद रखना है कि कारगिल की जंग भी नवाज के समय में ही लड़ी गई थी। इमाम ने कहा कि अमेरिका कंगाल हो चुका है।
इस मौके पर मुफ्ती जमालुद्दीन, मौलाना महबूब आलम, कारी मोहतरम, अंजुम असगर, मोहम्मद रब्बानी, परवेज आलम, शाकिर आलम, मोहम्मद खालिद, तनवीर आलम, अकरम अली, साबिर हुसैन, बाबुल खान, अशरफ अली और शाही इमाम के मुख्य सचिव मुस्तकीम अहरारी उपस्थित थे।
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नवाज ने कश्मीर मसले के हल के लिए अमेरिका को बिचौलिया बनाए जाने की बात कही है। मंगलवार को जामा मस्जिद में संवाददाताओं से मौलाना ने कहा कि नवाज अमेरिका के एजेंट हैं और उन्होंने यह बयान अमेरिका के इशारे पर दिया है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर मसले पर भारत और पाकिस्तान में अमेरिका को किसी भी कीमत पर बिचौलिया नहीं बनाया जा सकता। शाही इमाम ने कहा कि अमेरिका इसी ताक में है कि वह किसी तरह कश्मीर में उतर जाए और फिर एशिया में अपनी गुंडागर्दी का एक नया दौर शुरू करे।
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इमाम ने कहा कि नवाज एक जिम्मेवार व्यक्ति होने के बावजूद इस बात को भूल गए कि आज तक जहां भी अमेरिकी फौजें गई हैं, वहां कोई फैसला या शांति कायम नहीं हुई, बल्कि अशांति और कत्लेआम हुआ है।
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इसकी मिसाल इराक, लीबिया और अफगानिस्तान हैं। उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान में नई सरकार को सही ढंग से चला नहीं पा रहे, इसलिए जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसी हरकतें कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमें इस बात को भी याद रखना है कि कारगिल की जंग भी नवाज के समय में ही लड़ी गई थी। इमाम ने कहा कि अमेरिका कंगाल हो चुका है।
इस मौके पर मुफ्ती जमालुद्दीन, मौलाना महबूब आलम, कारी मोहतरम, अंजुम असगर, मोहम्मद रब्बानी, परवेज आलम, शाकिर आलम, मोहम्मद खालिद, तनवीर आलम, अकरम अली, साबिर हुसैन, बाबुल खान, अशरफ अली और शाही इमाम के मुख्य सचिव मुस्तकीम अहरारी उपस्थित थे।