{"_id":"6716cdb0e38f0b6d2d03b574","slug":"mastermind-of-fake-currency-printing-arrested-ludhiana-news-c-74-1-spkl1022-107122-2024-10-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ludhiana News: सात माह से फरार जाली नोट छापने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ludhiana News: सात माह से फरार जाली नोट छापने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार
विज्ञापन
पुलिस ने आरोपी का लिया दो दिन का रिमांड
संवाद न्यूज एजेंसी
जगरांव। करीब सात माह से फरार चल रहे जाली नोट छापने वाले मास्टरमाइंड को अखिरकार सीआईए स्टाफ की पुलिस ने पकड़ ही लिया। गिरफ्तार किए आरोपी की पहचान हरभगवान सिंह उर्फ मिथुन निवासी गांव बघेलेवाला मोगा के रूप में हुई है।
पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए दो दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया है। पुलिस को शक है कि पूछताछ के दौरान आरोपी से बड़े खुलासे हो सकते हैं। सीआईए स्टाफ के एएसआई धरमिंदर सिंह ने बताया कि पुलिस ने करीब सात महीने पहले जाली नोट छापकर आगे नोटों की सप्लाई करने वाले एक आरोपी को उस समय पकड़ा था जब आरोपी अपने साथी के कहने पर जाली नोटों की सप्लाई करने गांव चौकीमान के बस स्टैंड पर आया था। इससे पहले कि आरोपी जाली नोट अपने ग्राहक को सप्लाई करता, पुलिस ने उसे दबोच लिया। पुलिस ने इस संबंधी मास्टरमाइंड समेत दोनों आरोपियों पर थाना सदर में मामला दर्ज कर लिया। आरोपियों की पहचान कुलदीप सिंह उर्फ बंगाली निवासी गांव लड़े व हरभगवान सिंह उर्फ मिथुन निवासी गांव बघेलेवाला मोगा के रूप में हुई है। पुलिस ने कुलदीप सिंह को गिरफ्तार कर उससे 5800 रुपये के जाली नोट बरामद किए थे। हालांकि मास्टरमाइंड आरोपी हरभगवान सिंह पुलिस गिरफ्त से बाहर था, जिसे पुलिस ने अब गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।
पहले दर्ज हो चुका है मामला, खा चुके हैं जेल की हवा
करीब साढ़े तीन साल पहले जेल से बाहर निकलकर आरोपियों ने फिर से मिलकर जाली नोट छापने का धंधा शुरू कर दिया। जांच अधिकारी धरमिंदर सिंह ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ दौरान बताया कि उस पर पहले भी जाली नोट छापने का मामला समालसर में दर्ज हुआ था। आरोपी ने बताया कि पहले उन्होंने 500-500 के नोट छापे थे, लेकिन उन नोटों को हर कोई चेक करता था। इस कारण वह पहले पकड़े गए थे। आरोपी ने बताया पुरानी गलती को सुधारते हुए इस बार 200 व 100-100 के नोट छापे। क्योंकि दुकानदार सिर्फ 500 के नोट की जांच करते हैं। 100-200 के नोट कोई दुकानदार चेक नहीं करता है। इसी का फायदा उठाकर 100-200 की जाली करंसी छापी।
विज्ञापन
यू ट्यूब से बनाने सीखे नोट
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह तो अपने साथी की सिर्फ नोट सप्लाई करने और बाजारों में नोट चलाने का काम करता है। जबकि नोट छापने का काम हरभगवान सिंह का है। उसने यू ट्यूब से जाली नोट बनाने का काम सीखा था। नोटों पर कलर मैचिंग का काम भी उसने धीरे-धीरे कर यू-ट्यूब से ही सीखा था।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
जगरांव। करीब सात माह से फरार चल रहे जाली नोट छापने वाले मास्टरमाइंड को अखिरकार सीआईए स्टाफ की पुलिस ने पकड़ ही लिया। गिरफ्तार किए आरोपी की पहचान हरभगवान सिंह उर्फ मिथुन निवासी गांव बघेलेवाला मोगा के रूप में हुई है।
पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए दो दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया है। पुलिस को शक है कि पूछताछ के दौरान आरोपी से बड़े खुलासे हो सकते हैं। सीआईए स्टाफ के एएसआई धरमिंदर सिंह ने बताया कि पुलिस ने करीब सात महीने पहले जाली नोट छापकर आगे नोटों की सप्लाई करने वाले एक आरोपी को उस समय पकड़ा था जब आरोपी अपने साथी के कहने पर जाली नोटों की सप्लाई करने गांव चौकीमान के बस स्टैंड पर आया था। इससे पहले कि आरोपी जाली नोट अपने ग्राहक को सप्लाई करता, पुलिस ने उसे दबोच लिया। पुलिस ने इस संबंधी मास्टरमाइंड समेत दोनों आरोपियों पर थाना सदर में मामला दर्ज कर लिया। आरोपियों की पहचान कुलदीप सिंह उर्फ बंगाली निवासी गांव लड़े व हरभगवान सिंह उर्फ मिथुन निवासी गांव बघेलेवाला मोगा के रूप में हुई है। पुलिस ने कुलदीप सिंह को गिरफ्तार कर उससे 5800 रुपये के जाली नोट बरामद किए थे। हालांकि मास्टरमाइंड आरोपी हरभगवान सिंह पुलिस गिरफ्त से बाहर था, जिसे पुलिस ने अब गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।
विज्ञापन
पहले दर्ज हो चुका है मामला, खा चुके हैं जेल की हवा
करीब साढ़े तीन साल पहले जेल से बाहर निकलकर आरोपियों ने फिर से मिलकर जाली नोट छापने का धंधा शुरू कर दिया। जांच अधिकारी धरमिंदर सिंह ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ दौरान बताया कि उस पर पहले भी जाली नोट छापने का मामला समालसर में दर्ज हुआ था। आरोपी ने बताया कि पहले उन्होंने 500-500 के नोट छापे थे, लेकिन उन नोटों को हर कोई चेक करता था। इस कारण वह पहले पकड़े गए थे। आरोपी ने बताया पुरानी गलती को सुधारते हुए इस बार 200 व 100-100 के नोट छापे। क्योंकि दुकानदार सिर्फ 500 के नोट की जांच करते हैं। 100-200 के नोट कोई दुकानदार चेक नहीं करता है। इसी का फायदा उठाकर 100-200 की जाली करंसी छापी।
विज्ञापन
यू ट्यूब से बनाने सीखे नोट
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह तो अपने साथी की सिर्फ नोट सप्लाई करने और बाजारों में नोट चलाने का काम करता है। जबकि नोट छापने का काम हरभगवान सिंह का है। उसने यू ट्यूब से जाली नोट बनाने का काम सीखा था। नोटों पर कलर मैचिंग का काम भी उसने धीरे-धीरे कर यू-ट्यूब से ही सीखा था।