{"_id":"66616889998cee19fe085d2a","slug":"know-about-victory-of-amarinder-singh-raja-warring-from-ludhiana-in-loksabha-election-2024-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ludhiana: शहरी क्षेत्रों में भाजपा रही आगे... देहात के जबदस्त रिस्पांस से लुधियाना जीते राजा वड़िंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ludhiana: शहरी क्षेत्रों में भाजपा रही आगे... देहात के जबदस्त रिस्पांस से लुधियाना जीते राजा वड़िंग
Thu, 06 Jun 2024 03:39 PM IST
निवेदिता वर्मा
राजीव शर्मा, संवाद, लुधियाना (पंजाब)
राजीव शर्मा, संवाद, लुधियाना (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 06 Jun 2024 03:39 PM IST
सार
लुधियाना में भाजपा के रवनीत बिट्रू को हलका पूर्वी, दक्षिण, हलका सेंट्रल, पश्चिमी और उत्तरी में ज्यादा वोट मिले। वहीं देहात के तीनों हलके गिल, दाखा और जगराओं के अलावा आत्मनगर में बिट्टू को कांग्रेस के मुकाबले काफी कम वोट मिले।
विज्ञापन
लुधियाना से जीते अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग।
- फोटो : संवाद
विस्तार
कांग्रेस ने लगातार चौथी बार लुधियाना संसदीय सीट पर अपनी बादशाहत बरकरार रखी है, लेकिन इस बार जीत का मार्जन महज 20,942 वोट का ही रहा है और मतगणना शुरू होने से ही बिटटू लगातार कांग्रेसी उम्मीदवार राजा वड़िंग को चुनौती देते रहे। बिट्टू उनकी लीड को तोड़ नहीं पाए और राजा वड़िंग यह चुनाव जीत गए।
विज्ञापन
इन चुनावों में भाजपा के रवनीत बिट्रू शहर की हलका पूर्वी, दक्षिण, हलका सेंट्रल, पश्चिमी और उत्तरी में वोट लेने में नंबर एक पर रहे, बावजूद इसके बिट्टू को चुनाव में हार मिली, क्योंकि देहात के तीनों हलके गिल, दाखा और जगराओं के अलावा आत्मनगर में बिट्टू को कांग्रेस के मुकाबले काफी कम वोट मिले। सबसे कम वोट भाजपा को हलका दाखा एवं जगराओं में मिले।
विज्ञापन
हालांकि वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को 1,54,385 वोट मिले थे। जबकि इस बार लोकसभा चुनावों में भाजपा को तीन लाख से अधिक वोट मिला है, साफ है कि भाजपा का वोट तो काफी बढ़ा है, लेकिन वह जीत में कनवर्ट नहीं हो सका, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में किसानों के विरोध का असर माना जा रहा है।
विज्ञापन
वर्ष 2009 में कांग्रेस के मनीष तिवारी ने इस सीट पर 1,13,706 मतों से जीत दर्ज की थी। इसके बाद वर्ष 2014 में कांग्रेस के रवनीत बिट्टू ने 19709 वोट से विजय पाई थी। वर्ष 2019 के चुनावों में कांग्रेस के रवनीत बिट्टू ने इस सीट पर 76,372 मतों से जीत दर्ज की थी। इस बार बिट्टू ने पाला बदला और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े। ऐसे में कांग्रेस ने प्रदेश प्रधान राजा वड़िंग को चुनाव मैदान में उतार कर इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया। राजा वड़िंग की जीत के साथ कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा की प्रतिष्ठा भी बच गई है।
आंकड़ों को देखने से अनुमान लगाया जा सकता है कि शहर में भाजपा ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में पार्टी पकड़ नहीं बना पाई। बिट्टू को लुधियाना शहर की छह सीटों पर 2.51 लाख से अधिक वोट मिले हैं। जबकि देहात की तीन सीटों पर 49 हजार से अधिक वोट मिले हैं। जबकि राजा वड़िंग को शहरी सीटों पर 1.91 लाख से अधिक और देहात की सीटों पर लगभग 1.30 लाख वोट मिले हैं। साफ है कि भाजपा को देहात में बेहतर रिस्पांस नहीं मिला। अब पार्टी नगर निगम एवं वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटने की तैयारी में लग गई है।
इस सीट पर आम आदमी पार्टी के पप्पी पराशर एवं शिअद के रंजीत सिंह ढिल्लों अपने गढ़ तक बचाने में भी कामयाब नहीं हुए। हलका सेंट्रल के आप विधायक अशोक पराशर पप्पी अपने हलके में वोट हासिल करने में तीसरे नंबर पर रहे। इसी तरह हलका पूर्वी के पूर्व विधायक शिअद के रंजीत ढिल्लों अपने हलके में चौथे स्थान पर रहे।
उधर जीत के बाद प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने लुधियाना की जनता के अलावा पार्टी के तमाम नेताओं, कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया है। वड़िंग ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उनको बाहरी बताया गया, चाय पिलाने के नाम पर समर्थन देने तक की बातें कर लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन लुधियाना की जनता से सब कुछ नकार दिया। राजा वड़िंग ने कहा कि चुनावों के दौरान उन्होंने लुधियाना को लेकर विजन डाक्यूमेंट जारी किया था। अब पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करके उसे लागू करने की रणनीति बनाई जाएगी। लुधियाना में उद्योगों के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, पीजीआई एवं एम्स जैसी सेहत सुविधाएं, लुधियाना के बुड्ढा दरिया का कायाकल्प करना, शहर को पर्यावरण फ्रेंडली बनाना और लुधियाना को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवाई सेवा से जोड़ना, शहर में ट्रैफिक की समस्या को दरूस्त करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।