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घायल का वीडियो न बनाए, मदद करें
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना
Updated Sun, 27 Dec 2015 10:13 PM IST
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पक्खोवाल रोड पर कुछ दिन पहले ट्रक की टक्कर के बाद शहीद भगत सिंह नगर की स्मृति गुप्ता और उसकी दोस्त रीतिका अरोड़ा की मौत हो गई थी। रविवार को दोनों की याद और लोगों को जागरूक करने के लिए स्मृति-रीतिका की सहेलियों ने कैंडल मार्च निकाला। माडल टाऊन स्थित गोल मार्केट से लेकर कृष्णा मंदिर तक निकाले गए इस कैंडल मार्च के जरिए कॉलेज की लड़कियों ने लोगों को जागरूक किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर कोई सड़क पर घायल पड़ा हो तो उसकी मदद जरूर करें। कैंडल मार्च गोल मार्केट से होते हुए माडल टाऊन बाजार, गुरुद्वारा सिंह सभा माडल टाऊन से होते हुए कृष्णा मंदिर में देर शाम को संपन्न हुआ। कैंडल मार्च के दौरान दोनों मृतक लड़कियों के परिजन भी वहां मौजूद थे।
कैंडल मार्च की अगुवाई करने वाली मुस्कान मदान ने कहा कि कैंडल मार्च में उनके कॉलेज के सभी दोस्त मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि जिस दिन स्मृति और रीतिका एक्टिवा पर जा रही थी तो रास्ते में उन्हें ट्रक ने टक्कर मार दी। वह बुरी तरह से घायल हो गई। मुस्कान ने कहा कि लोगों ने उनकी मदद करने के बजाय मोबाइल फोन से उनकी वीडियो और तस्वीरें खींचनी शुरू कर दी। किसी ने कंट्रोल रूम में फोन करने की जहमत नहीं उठाई। मुस्कान ने आरोप लगाया कि जब कंट्रोल रूम को फोन किया गया तो पुलिस के साथ साथ एंबुलेंस भी वहां पर डेढ़ घंटे बाद पहुंची। तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस और एंबुलेंस समय पर घटनास्थल पर पहुंच जाती तो स्मृति-रीतिका की जान बच सकती थी। उन्होंने कहा कि पुलिस की तरफ से रेड लाइट का समय भी ज्यादा रखा गया है। ग्रीन लाइट होते ही वाहन चालक जल्दबाजी में अपना वाहन दौड़ाते हैं जिससे हादसे होते हैं। अगर प्रशासन की तरफ से ग्रीन लाइट का समय भी ज्यादा मिले तो वाहन चालक धीरे चलेंगे। कॉलेज के बच्चों और दोनों मृतकों के परिजनों ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई हादसे में घायल या फिर किसी भी तरह से घायल हुआ व्यक्ति सड़क पर गिरा हो तो लोग उसकी फोटो खींचने के बजाय उनकी मदद करें ताकि लोगों की जान बच सके।
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कैंडल मार्च की अगुवाई करने वाली मुस्कान मदान ने कहा कि कैंडल मार्च में उनके कॉलेज के सभी दोस्त मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि जिस दिन स्मृति और रीतिका एक्टिवा पर जा रही थी तो रास्ते में उन्हें ट्रक ने टक्कर मार दी। वह बुरी तरह से घायल हो गई। मुस्कान ने कहा कि लोगों ने उनकी मदद करने के बजाय मोबाइल फोन से उनकी वीडियो और तस्वीरें खींचनी शुरू कर दी। किसी ने कंट्रोल रूम में फोन करने की जहमत नहीं उठाई। मुस्कान ने आरोप लगाया कि जब कंट्रोल रूम को फोन किया गया तो पुलिस के साथ साथ एंबुलेंस भी वहां पर डेढ़ घंटे बाद पहुंची। तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस और एंबुलेंस समय पर घटनास्थल पर पहुंच जाती तो स्मृति-रीतिका की जान बच सकती थी। उन्होंने कहा कि पुलिस की तरफ से रेड लाइट का समय भी ज्यादा रखा गया है। ग्रीन लाइट होते ही वाहन चालक जल्दबाजी में अपना वाहन दौड़ाते हैं जिससे हादसे होते हैं। अगर प्रशासन की तरफ से ग्रीन लाइट का समय भी ज्यादा मिले तो वाहन चालक धीरे चलेंगे। कॉलेज के बच्चों और दोनों मृतकों के परिजनों ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई हादसे में घायल या फिर किसी भी तरह से घायल हुआ व्यक्ति सड़क पर गिरा हो तो लोग उसकी फोटो खींचने के बजाय उनकी मदद करें ताकि लोगों की जान बच सके।
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