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पंजाब विधानसभा चुनाव: लुधियाना के हलका नार्थ से छह बार विधायक बने राकेश पांडे, आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे लोग

Fri, 14 Jan 2022 03:43 PM IST
निवेदिता वर्मा वरिन्दर राणा, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
वरिन्दर राणा, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 14 Jan 2022 03:43 PM IST
सार

छह बार विधायक बनने के बाद भी राकेश पांडे एक बार मंत्री नहीं बने हैं। गौरतलब है कि विधायक पांडे साल 1992 में पहली बार कांग्रेस की टिकट से विधायक बने थे। उसके बाद उनकी जीत का सिलसिला एक बार ही टूटा है।

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Ground Report of Ludhiana North Assembly Seat
राकेश पांडे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना का विधानसभा हलका नार्थ हमेशा चर्चा का विषय रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि यहां से मौजूदा विधायक राकेश पांडे छह बार विधायक बन चुके है। 1992 से लेकर विधायक पांडे सिर्फ साल 2007 में एक बार चुनाव हारे हैं। 2007 में उन्हें भाजपा के प्रत्याशी हरीष बेदी ने चुनाव हराया था। रोचक बात है कि छह बार विधायक रहने के बावजूद राकेश पांडे इस हलके की समस्याओं को खत्म नहीं कर पाए हैं।

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आज भी यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं सीवरेज, पेयजल, सड़कें व स्ट्रीट लाइट की कमी से जूझ रहे हैं। अब तो हलके में  कचरे को ठिकाने लगाना भी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। लेकिन खुद विधायक पांडे शहर के सबसे पॉश एरिया साउथ सिटी में रहते है। साल 2022 के चुनाव दस्तक दे चुके हैं। इस बार फिर से विधायक पांडे चुनाव मैदान में हैं। इस हलके में करीब दो लाख मतदाता हैं, जबकि 16 वार्ड हैं। लोगों की समस्याओं को लेकर एक ही जवाब है अगली बार जो रह गई खत्म कर देंगे। 
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छह बार विधायक बनने के बाद भी राकेश पांडे एक बार मंत्री नहीं बने हैं। गौरतलब है कि विधायक पांडे साल 1992 में पहली बार कांग्रेस की टिकट से विधायक बने थे। उसके बाद उनकी जीत का सिलसिला एक बार ही टूटा है। हालांकि साल 1999 में दोबारा मतदान होने पर भी विधायक पांडे ही जीते थे। इनके पिता जोगिंदरपाल पांडे को शहीद का दर्जा दिया गया है, क्योंकि आतंकवाद के समय उनकी गोली मार हत्या कर दी गई थी। बीते साल विधायक पांडे के पुत्र को तहसीलदार की नौकरी मिलने पर खूब चर्चा छिड़ी थी। विरोधी दलों ने इनके घर के आगे धरने तक दिए थे। लोग अपनी समस्याओं को लेकर इनके खिलाफ कई बार मोर्चा खोल चुके हैं। 

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काम किए हैं, जो बचे हैं, आगे करेंगे

यह बात सही है कि हलका नार्थ से मैं छह बार विधायक रह चुका हूं। कुछ समय पहले मेरे हलके के क्षेत्रफल में बदलाव हुआ था। अब नया एरिया आने के बाद वहां पर फिर से जीरो से शुरू करना पड़ा। इसके बावजूद मेरी तरफ से अपने हलके के विकास कार्य में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है। हां, कुछ योजनाएं हैं जो चल रही हैं, कुछ पाइप लाइन में है। काम कभी रुकता नहीं है, चलता रहता है। अगली बार जो समस्याएं बची है उन्हें खत्म कर लोगों को राहत दी जाएगी।  -राकेश पांडे, विधायक हलका नार्थ 

30 साल में कुछ नहीं किया, बेटे को दिलाई नौकरी

मैं साल 1974 से हलका नार्थ में रह रहा हूं, 30 साल यहां से राकेश पांडे विधायक रहे है। आप के टिकट पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी मदन लाल बग्गा भी शिअद-भाजपा सरकार में राज मंत्री का दर्जा लेकर इस हलके के लिए कुछ नहीं कर पाए हैं। इस समय के दौरान कोई सरकारी स्कूल नहीं खुला, रोजगार के नाम पर यहां के युवाओं को कुछ नहीं मिला। लेकिन विधायक पांडे के बेटे तहसीलदार जरूर बन गए हैं। इस हलके को नजर अंदाज किया गया है। सुविधा के नाम पर कुछ नहीं दिया गया है। - कीमती रावल, समाजसेवी हल्का नार्थ 

कोरोना काल में कुछ नहीं किया

कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान विधायक पांडे ने यहां के लोगों के लिए कुछ नहीं किया। जितना भी अनाज गरीबों के लिए आया था, उसे अपने चहेतों में बांटा गया है। यहां तक विधायक तो लोगों का हाल तक पूछने के लिए बाहर नहीं आए। इस हलके के विकास के लिए कुछ नहीं दिया, हम आज भी अच्छी सड़कें, पार्क और सीवरेज के लिए जूझ रहे हैं। -दिनकर सूद, वार्ड 91 (नार्थ)

एक स्कूल तक नहीं खुलवाया

हलका नार्थ में आज तक एक सरकारी स्कूल तक नहीं खोला गया है। सिर्फ निजी स्कूलों को बढ़ावा देने के लिए लीज पर जमीनें दी गई हैं। यहां तक हमारे हलके में कोई तहसील का दफ्तर नहीं है। अगर जमीन की रजिस्ट्री करवानी पड़े तो आम लोगों को हलका पूर्वी के तहसील दफ्तर में जाना पड़ता है। -शरद जिंदल निवासी नार्थ

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