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इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री के लिए बनेंगे चार मिनी कलस्टर
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Fri, 24 Jan 2014 09:56 PM IST
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चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) और लुधियाना एफ्ल्यूऐंट ट्रीटमेंट सोसाइटी (लेट्स) संयुक्त रूप से रेड कैटेगरी इंडस्ट्री के लिए निजी क्षेत्र में चार नए मिनी कलस्टर बनाएंगे।
इसके लिए बाकायदा चैंबर ने माछीवाड़ा रोड, साहनेवाल रोड और गिल रोड इलाकों में बीस-बीस एकड़ जगह की पहचान भी कर ली है। यह खुलासा शुक्रवार को स्थानीय होटल में आयोजित कांफ्रेंस में चैंबर के प्रधान और लेट्स के चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर (सीईओ) अवतार सिंह ने किया।
सिंह का दावा है कि मिनी कलस्टरों में रेड कैटेगरी इंडस्ट्री को स्थापित करके नई जान फूंकी जा सकेगी। इसके लिए रोड मैप तैयार कर लिया गया है। प्रधान ने कहा कि सरकारी अनदेखी के बाद ही चैंबर ने अब अपने दम पर इंडस्ट्री को दिशा देने के प्रयास शुरू किए हैं।
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लुधियाना के मास्टर प्लान के तहत 2018 तक मिक्स लैंड यूज इलाके में स्थापित रेड कै टेगरी इंडस्ट्री के लिए शहर के बाहर जाना अनिवार्य है। लेट्स का दावा है कि मिक्स लैंड यूज इलाके में तकरीबन चार सौ रेड कैटेगरी यूनिट लगे हुए हैं। फिलहाल इन इकाइयों को सरकार से किसी भी तरह की सुविधा नहीं मिल रही है।
2018 के बाद इनके सामने बंदी का संकट है। चैंबर प्रधान अवतार सिंह का तर्क है कि ऐसी इंडस्ट्री को कलस्टर में स्थापित करने के लिए पिछले दो साल से सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाया जा रहा है, लेकिन कोई हल नहीं हो पा रहा है। जबकि 2018 की डेड लाइन नजदीक आ रही है। साथ ही हाल ही में लागू हुए भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत अब सरकार के लिए जमीन का अधिग्रहण करना आसान नहीं है। इसे देखते हुए ही चैंबर ने निजी तौर पर प्रयास करके इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा कलस्टर बनाने की बजाए छोटे छोटे चार मिनी कलस्टर बनाने का निर्णय किया है।
अवतार सिंह का कहना है कि उद्यमियाें से उनकी इकाई के लिए जगह की जरूरत पता करने के लिए चैंबर ने एक चार सदस्यीय टीम का गठन किया है। यह टीम अगले पंद्रह दिन में हर यूनिट के पास पहुंच कर उनकी जरूरत का पता लगाएगी। इसके बाद उद्यमियों को जगह अलॉट करा दी जाएगी।
कलस्टर में उद्यमियों को मिलेंगी रियायतें
सिंह ने कहा कि इन मिनी कलस्टर में आने वाले उद्यमियों को सभी सरकारी रियायतें और लाभ दिलाने के भी प्रयास किए जाएंगे। हर कलस्टर में अलग से कॉमन एफ्ल्यूऐंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगाया जाएगा और इसे जीरो लिक्विड डिस्चार्ज के तहत ऑपरेट किया जाएगा। इससे जहां प्रदूषण को मुक्ति मिलेगी, वहीं उद्योग में ग्रोथ आएगा।
कलस्टर डेवलपमेंट स्कीम में मंजूरी को प्रक्रिया तेज
रेड कैटेगरी इंडस्ट्री के लिए बनने वाले चार मिनी कलस्टरों को केंद्रीय माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज मंत्रालय (एमएसएमई) की कलस्टर डेवलपमेंट स्कीम से मंजूरी दिलाने के लिए भी प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए बाकायदा मंत्रालय से संपर्क साधा जा रहा है।
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इसके लिए बाकायदा चैंबर ने माछीवाड़ा रोड, साहनेवाल रोड और गिल रोड इलाकों में बीस-बीस एकड़ जगह की पहचान भी कर ली है। यह खुलासा शुक्रवार को स्थानीय होटल में आयोजित कांफ्रेंस में चैंबर के प्रधान और लेट्स के चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर (सीईओ) अवतार सिंह ने किया।
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सिंह का दावा है कि मिनी कलस्टरों में रेड कैटेगरी इंडस्ट्री को स्थापित करके नई जान फूंकी जा सकेगी। इसके लिए रोड मैप तैयार कर लिया गया है। प्रधान ने कहा कि सरकारी अनदेखी के बाद ही चैंबर ने अब अपने दम पर इंडस्ट्री को दिशा देने के प्रयास शुरू किए हैं।
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लुधियाना के मास्टर प्लान के तहत 2018 तक मिक्स लैंड यूज इलाके में स्थापित रेड कै टेगरी इंडस्ट्री के लिए शहर के बाहर जाना अनिवार्य है। लेट्स का दावा है कि मिक्स लैंड यूज इलाके में तकरीबन चार सौ रेड कैटेगरी यूनिट लगे हुए हैं। फिलहाल इन इकाइयों को सरकार से किसी भी तरह की सुविधा नहीं मिल रही है।
2018 के बाद इनके सामने बंदी का संकट है। चैंबर प्रधान अवतार सिंह का तर्क है कि ऐसी इंडस्ट्री को कलस्टर में स्थापित करने के लिए पिछले दो साल से सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाया जा रहा है, लेकिन कोई हल नहीं हो पा रहा है। जबकि 2018 की डेड लाइन नजदीक आ रही है। साथ ही हाल ही में लागू हुए भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत अब सरकार के लिए जमीन का अधिग्रहण करना आसान नहीं है। इसे देखते हुए ही चैंबर ने निजी तौर पर प्रयास करके इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा कलस्टर बनाने की बजाए छोटे छोटे चार मिनी कलस्टर बनाने का निर्णय किया है।
अवतार सिंह का कहना है कि उद्यमियाें से उनकी इकाई के लिए जगह की जरूरत पता करने के लिए चैंबर ने एक चार सदस्यीय टीम का गठन किया है। यह टीम अगले पंद्रह दिन में हर यूनिट के पास पहुंच कर उनकी जरूरत का पता लगाएगी। इसके बाद उद्यमियों को जगह अलॉट करा दी जाएगी।
कलस्टर में उद्यमियों को मिलेंगी रियायतें
सिंह ने कहा कि इन मिनी कलस्टर में आने वाले उद्यमियों को सभी सरकारी रियायतें और लाभ दिलाने के भी प्रयास किए जाएंगे। हर कलस्टर में अलग से कॉमन एफ्ल्यूऐंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगाया जाएगा और इसे जीरो लिक्विड डिस्चार्ज के तहत ऑपरेट किया जाएगा। इससे जहां प्रदूषण को मुक्ति मिलेगी, वहीं उद्योग में ग्रोथ आएगा।
कलस्टर डेवलपमेंट स्कीम में मंजूरी को प्रक्रिया तेज
रेड कैटेगरी इंडस्ट्री के लिए बनने वाले चार मिनी कलस्टरों को केंद्रीय माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज मंत्रालय (एमएसएमई) की कलस्टर डेवलपमेंट स्कीम से मंजूरी दिलाने के लिए भी प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए बाकायदा मंत्रालय से संपर्क साधा जा रहा है।