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पंजाब: कैप्टन से मदद मांगने वाले डीएसपी हरजिंदर सिंह की मौत, कोरोना के बाद खराब हो गए थे फेफड़े
Wed, 09 Jun 2021 02:29 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 09 Jun 2021 02:29 PM IST
सार
कोरोना संक्रमित होने के बाद डीएसपी को एसपीएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। डॉक्टर्स का कहना था कि उनके फेफड़े ट्रांसप्लांट करवाने की जरूरत है। इसके लिए लगभग 80 लाख रुपये की जरूरत थी।
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डीएसपी हरजिंदर सिंह।
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इलाज के लिए पैसा मुहैया करवाने की गुहार लगाने वाले डीएसपी हरजिंदर सिंह ने आखिरकार बुधवार को लुधियाना में दम तोड़ दिया। कोरोना संक्रमित होने के बाद वह छह अप्रैल से लुधियाना के एसपीएस अस्पताल में भर्ती थे। उनका उपचार कर रहे डॉक्टर्स का कहना था कि उनके फेफड़े ट्रांसप्लांट करवाने की जरूरत है। इसके लिए लगभग 80 लाख रुपये की जरूरत थी। पैसा नहीं होने पर डीएसपी हरजिंदर सिंह ने अस्पाल से अपना एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भेजा था।
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इसमें उन्होंने सीएम से गुहार लगाई थी कि जो पैसा उनके मरने के बाद सरकार उनके परिवार को देगी, अगर वही पैसा पहले उन्हें दे दिया जाए तो उनके बच्चे अनाथ होने से बच सकते हैं। इस गुहार के बाद मृतक के परिजन सीएम हाउस भी गए थे, कुछ दस्तावेजी कार्रवाई शुरू हो गई थी लेकिन उससे पहले ही बुधवार को डीएसपी हरजिंदर सिंह की मौत हो गई।
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डीएसपी की तरफ से मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में लिखा गया था कि मैं कोविड 19 पॉजिटिव आने के बाद छह अप्रैल 2021 से लुधियाना के एसपीएस अस्पताल में भर्ती हूं। 22 अप्रैल को मेरी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। लेकिन अभी तक मेरे फेफड़े सही तरीके से काम करने नहीं लगे है। मुझे अस्पताल और पुलिस प्रशासन की तरफ से पूरा सहयोग दिया जा रहा है। अब मेरा इलाज कर रहे डॉक्टर्स का कहना है कि मेरे फेफड़े ट्रांसप्लांट करवाने की जरूरत है, इसलिए अपना इंतजाम कर लें।
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पुलिस कमिश्नर लुधियाना ने मेरा केस बनाकर विभागीय पैनल के पास भेजा था, इस पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि फिलहाल एक माह इंतजार करें। 17 मई को मेरा इलाज कर रहे डॉक्टर्स ने दोबारा कहा कि मेरी हालत में कोई सुधार नहीं है, इसलिए ट्रांसप्लांट जरूरी है। मेरा सीएम पंजाब महाराजा साहब से निवेदन है कि मेरे मरने के बाद जो पैसा मेरे परिवार को सरकार ने देना है। वह पैसा अभी मेरे इलाज के लिए जारी कर दिया जाए। ताकि मेरे बच्चे अनाथ होने से बच जाएं। मैंने 28 साल बेदाग नौकरी की है और मेरे पास इलाज के लिए लाखों रुपये नहीं हैं। इसलिए विनती है कि मेरा इलाज करवाया जाए ताकि मेरे बच्चे अनाथ न हो सकें।