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खन्ना सरकारी अस्पताल में नवजात की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, खन्ना (लुधियाना)
Updated Fri, 05 Aug 2016 06:39 PM IST
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बच्चे की मौत
- फोटो : demo pics
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सिविल अस्पताल में शुक्रवार को एक नवजात की मौत हो गई। इससे भड़के परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही करने का आरोप लगाया। वहीं डॉक्टरों ने इससे इंकार किया है।
जानकारी के अनुसार सिविल अस्पताल में मनजीत कौर निवासी सलौदी, गुरप्रीत कौर निवासी जरगड़ी, परमजीत कौर निवासी कूमकलां, मीनू निवासी बदीनपुर और पवनदीप कौर निवासी चड़ी की डिलीवरी होनी थी। उन्हें आपरेशन थियेटर में बुलाया गया था।
डॉ. मनजीत सिंह बाजवा ने पहली डिलीवरी पवनदीप कौर की करवाई। बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद डॉ. बाजवा और एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट ओटी छोड़कर चले गए। बाहर महिलाएं तड़पती रहीं। बाद में उन्होंने अपने घर फोन कर घर वालों को बुलाया जो इन सबको अलग-अलग अस्पतालों में ले गए।
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इस दौरान एसएमओ राजिंदर गुलाटी अस्पताल में नहीं थे। स्टाफ का कहना था कि वे लुधियाना मीटिंग में हैं। महिलाओं के परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चे की मौत डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से हुई है। पवनदीप की परिजन कमलजीत कौर ने कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही से बच्चे की जान गई है। पहले उन्हें कुछ नहीं बताया गया। बच्चा सीरियस बताकर लुधियाना भेज दिया गया और खुद अस्पताल से निकल गए। एसएमओ अस्पताल में नहीं थे।
उनसे बात की गई तो जवाब मिला कि मीटिंग में हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कोई प्रबंध नहीं है। सेहत मंत्री को सख्ती करनी चाहिए, नहीं तो अस्पताल खाली रह जाएंगे।
बहस के बाद चले गए थे दोनों डॉक्टर
आशा वर्कर सकिंदर कौर ने कहा कि आपरेशन थियेटर में दोनों डॉक्टरों में बहस हो गई थी। जिस कारण वे दोनों ही चले गए और महिलाएं तड़पती रहीं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की इस लापरवाही से और भी किसी की जान जा सकती थी। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था।
काफी मिन्नतें की गईं कि महिला के जुड़वा बच्चे हैं। फिर भी किसी ने नहीं सुनी। उन्होंने मांग की कि एसएमओ समेत संबंधित डॉक्टरों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई नहीं की, तो वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
कोई कोताही नहीं हुई
इलाज में कोई कोताही नहीं हुई। जन्म के बाद बच्चा एक बार रोया था, लेकिन उसके बाद वह नहीं रोया। उसे बचाने की काफी कोशिशें की गईं, लेकिन वे सफल नहीं रहे। डिलीवरी के बाद एनेस्थीसिया डॉक्टर का मन खराब हो गया। उनका और आपरेशन करने का मन नहीं किया। वे ड्यूटी पूरी करके आए हैं। कोई इमरजेंसी केस नहीं था। इसलिए मरीजों को पेडिंग रख लिया गया था।
- डॉ. मनजीत सिंह बाजवा, गायनोकोलोजिस्ट
खन्ना सरकारी अस्पताल में ऐसी किसी घटना के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैं एसएमओ खन्ना से बात करूंगी।
- रेनू छतवाल, सिविल सर्जन, लुधियाना
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जानकारी के अनुसार सिविल अस्पताल में मनजीत कौर निवासी सलौदी, गुरप्रीत कौर निवासी जरगड़ी, परमजीत कौर निवासी कूमकलां, मीनू निवासी बदीनपुर और पवनदीप कौर निवासी चड़ी की डिलीवरी होनी थी। उन्हें आपरेशन थियेटर में बुलाया गया था।
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डॉ. मनजीत सिंह बाजवा ने पहली डिलीवरी पवनदीप कौर की करवाई। बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद डॉ. बाजवा और एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट ओटी छोड़कर चले गए। बाहर महिलाएं तड़पती रहीं। बाद में उन्होंने अपने घर फोन कर घर वालों को बुलाया जो इन सबको अलग-अलग अस्पतालों में ले गए।
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इस दौरान एसएमओ राजिंदर गुलाटी अस्पताल में नहीं थे। स्टाफ का कहना था कि वे लुधियाना मीटिंग में हैं। महिलाओं के परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चे की मौत डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से हुई है। पवनदीप की परिजन कमलजीत कौर ने कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही से बच्चे की जान गई है। पहले उन्हें कुछ नहीं बताया गया। बच्चा सीरियस बताकर लुधियाना भेज दिया गया और खुद अस्पताल से निकल गए। एसएमओ अस्पताल में नहीं थे।
उनसे बात की गई तो जवाब मिला कि मीटिंग में हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कोई प्रबंध नहीं है। सेहत मंत्री को सख्ती करनी चाहिए, नहीं तो अस्पताल खाली रह जाएंगे।
बहस के बाद चले गए थे दोनों डॉक्टर
आशा वर्कर सकिंदर कौर ने कहा कि आपरेशन थियेटर में दोनों डॉक्टरों में बहस हो गई थी। जिस कारण वे दोनों ही चले गए और महिलाएं तड़पती रहीं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की इस लापरवाही से और भी किसी की जान जा सकती थी। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था।
काफी मिन्नतें की गईं कि महिला के जुड़वा बच्चे हैं। फिर भी किसी ने नहीं सुनी। उन्होंने मांग की कि एसएमओ समेत संबंधित डॉक्टरों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई नहीं की, तो वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
कोई कोताही नहीं हुई
इलाज में कोई कोताही नहीं हुई। जन्म के बाद बच्चा एक बार रोया था, लेकिन उसके बाद वह नहीं रोया। उसे बचाने की काफी कोशिशें की गईं, लेकिन वे सफल नहीं रहे। डिलीवरी के बाद एनेस्थीसिया डॉक्टर का मन खराब हो गया। उनका और आपरेशन करने का मन नहीं किया। वे ड्यूटी पूरी करके आए हैं। कोई इमरजेंसी केस नहीं था। इसलिए मरीजों को पेडिंग रख लिया गया था।
- डॉ. मनजीत सिंह बाजवा, गायनोकोलोजिस्ट
खन्ना सरकारी अस्पताल में ऐसी किसी घटना के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैं एसएमओ खन्ना से बात करूंगी।
- रेनू छतवाल, सिविल सर्जन, लुधियाना