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पति के दिल्ली चलने से इंकार पर खुद को आग लगाई
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना
Updated Mon, 11 Jan 2016 10:00 PM IST
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बस्ती जोधेवाल स्थित कैलाश नगर इलाके की चांदनी ने सोमवार सुबह मिट्टी का तेल डालकर खुद को आग लगा ली। वह चालीस फीसदी झुलस गई है। चीखने की आवाज सुन उसके परिजनों ने किसी तरह आग पर काबू पाया और झुलसी हालत में उसे सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया। घटना की जानकारी थाना बस्ती जोधेवाल की पुलिस को दे दी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
बताया जाता है कि चांदनी अपने पति से दिल्ली में रहने के लिए जिद कर रही थी। इसी विवाद में उसने खुद को आग लगा ली। जानकारी के अनुसार चांदनी की शादी करीब डेढ़ साल पहले दीपक से हुई थी। शादी के बाद दीपक दिल्ली में रह रहा था, जबकि उसके बाकी परिजन बस्ती जोधेवाल स्थित कैलाश नगर इलाके में रह रहे थे।
काम न होने की वजह से दीपक अपने परिजनों के पास आकर रहने लग गया। कुछ दिनों से चांदनी जिद कर रही थी कि वह दिल्ली में चलें और वहीं पर रहे। वह लुधियाना में नहीं रहना चाहती। दीपक ने उससे कहा था कि अभी उसका काम नहीं है। वह दिल्ली नहीं जा सकता। सोमवार सुबह भी वह दिल्ली चलने की जिद कर रही थी। इसी विवाद में उसने खुद को आग लगाने की कोशिश की, मगर दीपक और उसके पिता रघुनाथ ने उसे बचा लिया। मामला शांत समझ कर दीपक और रघुनाथ अपने अपने काम में लग गए।
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बाद में चांदनी ने फिर से खुद पर मिट्टी का तेल डाला और आग लगा ली। चांदनी के चीखने की आवाज सुन दीपक और रघुनाथ अंदर पहुंचे और उन्होंने किसी तरह आग पर काबू पाया। उन्होंने झुलसी चांदनी को सिविल अस्पताल दाखिल कराया है। जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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बताया जाता है कि चांदनी अपने पति से दिल्ली में रहने के लिए जिद कर रही थी। इसी विवाद में उसने खुद को आग लगा ली। जानकारी के अनुसार चांदनी की शादी करीब डेढ़ साल पहले दीपक से हुई थी। शादी के बाद दीपक दिल्ली में रह रहा था, जबकि उसके बाकी परिजन बस्ती जोधेवाल स्थित कैलाश नगर इलाके में रह रहे थे।
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काम न होने की वजह से दीपक अपने परिजनों के पास आकर रहने लग गया। कुछ दिनों से चांदनी जिद कर रही थी कि वह दिल्ली में चलें और वहीं पर रहे। वह लुधियाना में नहीं रहना चाहती। दीपक ने उससे कहा था कि अभी उसका काम नहीं है। वह दिल्ली नहीं जा सकता। सोमवार सुबह भी वह दिल्ली चलने की जिद कर रही थी। इसी विवाद में उसने खुद को आग लगाने की कोशिश की, मगर दीपक और उसके पिता रघुनाथ ने उसे बचा लिया। मामला शांत समझ कर दीपक और रघुनाथ अपने अपने काम में लग गए।
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बाद में चांदनी ने फिर से खुद पर मिट्टी का तेल डाला और आग लगा ली। चांदनी के चीखने की आवाज सुन दीपक और रघुनाथ अंदर पहुंचे और उन्होंने किसी तरह आग पर काबू पाया। उन्होंने झुलसी चांदनी को सिविल अस्पताल दाखिल कराया है। जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।