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स्मार्ट चिप कंपनी के मुलाजिम पर धोखाधड़ी का पर्चा दर्ज
Updated Wed, 24 Oct 2018 10:45 PM IST
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आरटीए की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज किया मामला
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीए) में तैनात स्मार्ट चिप कंपनी के मुलाजिमाें की ओर से असिस्टेंट ट्रांसपोर्ट अफसर अमरीक सिंह की लॉग इन आईडी खोल 46 ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिए। मामले में पुलिस ने नितिन कुमार समेत कुछ अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इसमें किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
गौरतलब है कि आरटीए लवजीत कौर कलसी ने पुलिस कमिश्नर को दी शिकायत में बताया था कि 11 अक्तूबर को देर शाम सारथी 4.0 सॉफ्टवेयर पर एटीओ अमरीक सिंह की आईडी को खोला गया। व्यक्ति ने उनकी आईडी से 38 कामर्शियल लाइसेंस और 8 लर्निंग लाइसेंस को पास किए गए। 12 अक्तूबर को जानकारी मिलते ही स्मार्ट चिप कंपनी इंचार्ज इकबाल सिंह को लाइसेंस का प्रिंट नहीं करने के आदेश दिए गए। 15 अक्तूबर को स्मार्ट चिप कंपनी के अधिकारी को पास किए 46 लाइसेंस के दस्तावेज पेश करने के लिए कहा गया। 16 अक्तूबर को कंपनी की तरफ से सिर्फ 20 लाइसेंस के दस्तावेज पेश किए। जांच करने पर पता चला कि 17 लाइसेंस के साथ रेडक्रॉस की तरफ से जारी फर्स्ट एड सर्टिफिकेट जाली है। तीन फाइलों के साथ अधूरे सर्टिफिकेट लगाए गए थे। इसकी पुष्टि रेडक्रॉस ने भी कर दी है। कंपनी को बार-बार कहने पर बाकी बचे 26 लाइसेंस की फाइलों को पेश नहीं किया गया। इस शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीए) में तैनात स्मार्ट चिप कंपनी के मुलाजिमाें की ओर से असिस्टेंट ट्रांसपोर्ट अफसर अमरीक सिंह की लॉग इन आईडी खोल 46 ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिए। मामले में पुलिस ने नितिन कुमार समेत कुछ अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इसमें किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
गौरतलब है कि आरटीए लवजीत कौर कलसी ने पुलिस कमिश्नर को दी शिकायत में बताया था कि 11 अक्तूबर को देर शाम सारथी 4.0 सॉफ्टवेयर पर एटीओ अमरीक सिंह की आईडी को खोला गया। व्यक्ति ने उनकी आईडी से 38 कामर्शियल लाइसेंस और 8 लर्निंग लाइसेंस को पास किए गए। 12 अक्तूबर को जानकारी मिलते ही स्मार्ट चिप कंपनी इंचार्ज इकबाल सिंह को लाइसेंस का प्रिंट नहीं करने के आदेश दिए गए। 15 अक्तूबर को स्मार्ट चिप कंपनी के अधिकारी को पास किए 46 लाइसेंस के दस्तावेज पेश करने के लिए कहा गया। 16 अक्तूबर को कंपनी की तरफ से सिर्फ 20 लाइसेंस के दस्तावेज पेश किए। जांच करने पर पता चला कि 17 लाइसेंस के साथ रेडक्रॉस की तरफ से जारी फर्स्ट एड सर्टिफिकेट जाली है। तीन फाइलों के साथ अधूरे सर्टिफिकेट लगाए गए थे। इसकी पुष्टि रेडक्रॉस ने भी कर दी है। कंपनी को बार-बार कहने पर बाकी बचे 26 लाइसेंस की फाइलों को पेश नहीं किया गया। इस शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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