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जमीदार से फिरौती मांगने के मामले में एक ओर गिरफ्तार
Updated Wed, 14 Nov 2018 10:16 PM IST
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जमींदार से फिरौती मांगने के मामले में एक और गिरफ्तार
तीस लाख रुपये की फिरौती के बहुचर्चित मामले में विजिलेंस की कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
हलवारा (लुधियाना)। थाना सिटी रायकोट में दर्ज तीस लाख रुपये की फिरौती के बहुचर्चित मामले में विजिलेंस विभाग के ईओ विंग ने जलालाबाद के गांव चक्क दानी गांव वासी गुरजिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले विजिलेंस की ओर से पंजाब पुलिस ने इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह कंग को भी पिछले दिनों गिरफ्तार किया था। जबकि नामजद लुधियाना वासी नर्स इंद्रजीत कौर उर्फ अमन ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। वह जूडिशियल रिमांड पर लुधियाना की सेंट्रल जेल में बंद है। जिला अदालत द्वारा इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह कंग एंव नर्स इंद्रजीत कौर की जमानत याचिका रद्द कर दी है। इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह कंग एंव नर्स इंद्रजीत कौर की पूछताछ के दौरान गुरविंदर सिंह, परमजीत सिंह एंव गुरमंदर सिंह का नाम सामने आया था। अदालत द्वारा तीनों को पीओ घोषित कर दिया था। परमजीत और गुरमिंदर की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापामारी कर रही है।
विजिलेंस इओ विंग के डीएसपी मंदीप सिंह संधू ने ताया कि गुरमिंदर सिंह को कल अदालत में पेश किया जाएगा। गुरजिंदर मामले की मुख्य आरोपी नर्स ंद्रिजीत कौर का रिश्तेदार है। जिसने अपने दोस्त परमजीत सिंह एंव गुरजिंदर सिंह के साथ एक साजिश के तहत जिला फिरोजपुर जलालाबाद के गांव घग्गा खुर्द गांव वासी बलकार सिंह के खिलाफ झूठी शिकायत की थी। उल्लेखनीय है कि तीन फरवरी को थाना सिटी रायकोट में बलकार सिंह से तीस लाख रुपये फिरौती लेने का मामला इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह कंग एंव नर्स इंद्रजीत कौर के खिलाफ दर्ज किया गया था।
यह है मामला
जलालाबाद के गांव घग्गा खुर्द के जमींदार बलकार सिंह के नर्स इंद्रजीत कौर के साथ संबंध थे। नर्स इंद्रजीत कौर ने बलकार सिंह के साथ बिताए पलों की वीडियो रिकार्डिंग कर ली थी। इसी कारण नर्स बलकार सिंह को ब्लैकमेल करने लगी। नर्स इंद्रजीत कौर की जान पहचान इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह कंग से भी थी। कंग उस समय थाना सदर रायकोट के प्रभारी थे। आरोपियों ने एक साजिश के तहत थाना सदर में बलकार सिंह के खिलाफ नर्स इंद्रजीत कौर के विदेश भेजने के नाम पर 28 लाख रुपये ठगने की झूठी शिकायत कर दी। इंस्पेक्टर कंग ने उस शिकायत के आधार पर बलकार सिंह को थाना सदर रायकोट में बुलाया। वहां उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई। नर्स इंद्रजीत ने बलकार पर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने की भी धमकी थी। डर के मारे जमींदार बलकार सिंह ने बैंक एंव आढ़तियों से लेकर तीस लाख रुपये थाना सदर रायकोट में आकर आरोपियों को दे दिए।
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इस तरह खुला था मामला
तीस लाख रुपये देकर आने के बाद बलकार सिंह मायूस रहने लगा। परेशान होकर उसने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन उनकी पत्नी ने समय रहते देख लिया और उसे बचा लिया। बलकार की पत्नी ने घटना की जानकारी अपने भाई एवं जाने माने वकील सुखदेव सिंह मान को दी। सुखदेव सिंह मान ने कांग्रेस नेता राजा वड़िंग के जरिये सीएम हाउस तक पहुंच की। एसएसपी लुधियाना देहाती में सीएम हाउस से आए फोन के बाद थाना सिटी में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
नजरबंद करने के बाद कंग को पुलिस ने पहले छोड़ दिया था
दस फरवरी को नर्स इंद्रजीत कौर ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। इस दौरान तीन फरवरी को दर्ज मामले में इंस्पेक्टर कंग को थाना सुधार में तीन दिन नजरबंद रखने के बाद छोड़ दिया गया था। उसे तब क्यों थोड़ा गया इसका किसी भी अधिकारी ने कभी जवाब नहीं दिया। इसके बाद मामले की जांच खन्ना पुलिस और फिर विजिलेंस को सौंपी गई। आठ महीने बाद अक्तूबर में इंस्पेक्टर कंग को लुधियाना से ही गिरफ्तार कर लिया गया।
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तीस लाख रुपये की फिरौती के बहुचर्चित मामले में विजिलेंस की कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
हलवारा (लुधियाना)। थाना सिटी रायकोट में दर्ज तीस लाख रुपये की फिरौती के बहुचर्चित मामले में विजिलेंस विभाग के ईओ विंग ने जलालाबाद के गांव चक्क दानी गांव वासी गुरजिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले विजिलेंस की ओर से पंजाब पुलिस ने इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह कंग को भी पिछले दिनों गिरफ्तार किया था। जबकि नामजद लुधियाना वासी नर्स इंद्रजीत कौर उर्फ अमन ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। वह जूडिशियल रिमांड पर लुधियाना की सेंट्रल जेल में बंद है। जिला अदालत द्वारा इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह कंग एंव नर्स इंद्रजीत कौर की जमानत याचिका रद्द कर दी है। इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह कंग एंव नर्स इंद्रजीत कौर की पूछताछ के दौरान गुरविंदर सिंह, परमजीत सिंह एंव गुरमंदर सिंह का नाम सामने आया था। अदालत द्वारा तीनों को पीओ घोषित कर दिया था। परमजीत और गुरमिंदर की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापामारी कर रही है।
विजिलेंस इओ विंग के डीएसपी मंदीप सिंह संधू ने ताया कि गुरमिंदर सिंह को कल अदालत में पेश किया जाएगा। गुरजिंदर मामले की मुख्य आरोपी नर्स ंद्रिजीत कौर का रिश्तेदार है। जिसने अपने दोस्त परमजीत सिंह एंव गुरजिंदर सिंह के साथ एक साजिश के तहत जिला फिरोजपुर जलालाबाद के गांव घग्गा खुर्द गांव वासी बलकार सिंह के खिलाफ झूठी शिकायत की थी। उल्लेखनीय है कि तीन फरवरी को थाना सिटी रायकोट में बलकार सिंह से तीस लाख रुपये फिरौती लेने का मामला इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह कंग एंव नर्स इंद्रजीत कौर के खिलाफ दर्ज किया गया था।
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यह है मामला
जलालाबाद के गांव घग्गा खुर्द के जमींदार बलकार सिंह के नर्स इंद्रजीत कौर के साथ संबंध थे। नर्स इंद्रजीत कौर ने बलकार सिंह के साथ बिताए पलों की वीडियो रिकार्डिंग कर ली थी। इसी कारण नर्स बलकार सिंह को ब्लैकमेल करने लगी। नर्स इंद्रजीत कौर की जान पहचान इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह कंग से भी थी। कंग उस समय थाना सदर रायकोट के प्रभारी थे। आरोपियों ने एक साजिश के तहत थाना सदर में बलकार सिंह के खिलाफ नर्स इंद्रजीत कौर के विदेश भेजने के नाम पर 28 लाख रुपये ठगने की झूठी शिकायत कर दी। इंस्पेक्टर कंग ने उस शिकायत के आधार पर बलकार सिंह को थाना सदर रायकोट में बुलाया। वहां उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई। नर्स इंद्रजीत ने बलकार पर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने की भी धमकी थी। डर के मारे जमींदार बलकार सिंह ने बैंक एंव आढ़तियों से लेकर तीस लाख रुपये थाना सदर रायकोट में आकर आरोपियों को दे दिए।
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इस तरह खुला था मामला
तीस लाख रुपये देकर आने के बाद बलकार सिंह मायूस रहने लगा। परेशान होकर उसने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन उनकी पत्नी ने समय रहते देख लिया और उसे बचा लिया। बलकार की पत्नी ने घटना की जानकारी अपने भाई एवं जाने माने वकील सुखदेव सिंह मान को दी। सुखदेव सिंह मान ने कांग्रेस नेता राजा वड़िंग के जरिये सीएम हाउस तक पहुंच की। एसएसपी लुधियाना देहाती में सीएम हाउस से आए फोन के बाद थाना सिटी में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
नजरबंद करने के बाद कंग को पुलिस ने पहले छोड़ दिया था
दस फरवरी को नर्स इंद्रजीत कौर ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। इस दौरान तीन फरवरी को दर्ज मामले में इंस्पेक्टर कंग को थाना सुधार में तीन दिन नजरबंद रखने के बाद छोड़ दिया गया था। उसे तब क्यों थोड़ा गया इसका किसी भी अधिकारी ने कभी जवाब नहीं दिया। इसके बाद मामले की जांच खन्ना पुलिस और फिर विजिलेंस को सौंपी गई। आठ महीने बाद अक्तूबर में इंस्पेक्टर कंग को लुधियाना से ही गिरफ्तार कर लिया गया।