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सिटी सैंटर : पूर्व एसएसपी की अर्जी पर दोनों पक्षों की बहस पूर्ण,
Updated Fri, 03 Aug 2018 10:24 PM IST
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पूर्व एसएसपी की अर्जी पर दोनों पक्षों की बहस पूरी
सिटी सेंटर घोटाले के मामले में अर्जी पर 8 अगस्त को आ सकता है फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। पूर्व एसएसपी विजिलेंस ब्यूरो कंवलजीत सिंह संधू की तरफ से लुधियाना की जिला एवं सेशन जज गुरबीर सिंह की अदालत में लगाई गई अर्जी पर आज संधू के वकील व सरकार की ओर से पंजाब के प्रोसिक्यूशन विभाग के डायरेक्टर विजय सिंगला व जिला अटार्नी रविंदर कुमार अबरौल ने अपनी बहस कर दी है। पूर्व एसएसपी विजिलेंस कंवलजीत सिंह संधू के वकील ने जहां सरकार पर संधू पर कैंसलेशन रिपोर्ट में सहयोग करने के लिए दबाव बनाते हुए उन पर झूठे मामले दर्ज करने को लेकर धमकाया जा रहा है और पूर्व एसएसपी द्वारा मना किए जाने पर उनकी जान को भी खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पूर्व एसएसपी ने सिटी सेंटर मामले में बिना किसी दबाव के अपनी जांच पूरी की थी। और उनको सुने बिना सिटी सेंटर मामले पर कोई फैसला न दिया जाए। वहीं सरकारी पक्ष की तरफ पंजाब के प्रोसिक्यूशन विभाग के डायरेक्टर विजय सिंगला व जिला अटार्नी रविंदर कुमार अबरौल ने पूर्व एसएसपी द्वारा लगाए सभी आरोपों में झूठ का पुलिंदा बताते हुए कहा कि पूर्व एसएसपी द्वारा दायर की गई अर्जी का कोई औचित्य नहीं है और कहा कि सिटी सेंटर मामले में विजिलेंस पुलिस द्वारा दाखिल की गई कैंसलेशन रिपोर्ट में पूरी तरह सच्चाई अदालत के सामने रखी गई है और कुछ भी छुपाया नहीं गया है। उन्होंने पूर्व एसएसपी के लगाए आरोपों को बेबुनियाद व गलत बताते हुए कहा कि पूर्व एसएसपी मीडिया में पब्लिसिटी हासिल करने की कोशिश कर रहे है। उन्होंने कहा कि पूर्व एसएसपी अदालत में दाखिल अर्जी में झूठे आरोप लगाकर सरकारी पक्ष को धमकाने व दबाव बनाने का प्रयास कर रहे है। वहीं उन्होंने पूर्व एसएसपी के इस तर्क को भी गलत ठहराया कि उन्हें कैंसलेशन रिपोर्ट पर फैसला लेने से सुना जाए, गलत है क्योंकि पूर्व एसएसपी ने बतौर पुलिस अधिकारी होते हुए मामला दर्ज किया था। और अब वह नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके है। उनका कोई अधिकार नहीं बनता कि वो इस मामले में दखलंदाजी कर सकते है। क्योंकि न तो वो शिकायतकर्ता है और न ही पीड़ित है। उनका कोई भी कानूनी अधिकार अर्जी दाखिल करने का नहीं बनता है। सरकारी पक्ष की ओर से दाखिल की गए जवाब में पूर्व एसएसपी पर सियासी सांठगांठ होने का भी आरोप लगाया गया है और कहा गया कि पूर्व एसएसपी संधू सियासी प्रभाव के तले आकर झूठे आरोप लगा रहे है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में लोक इंसाफ पार्टी के विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने भी ऐसी ही एक अर्जी उपरोक्त अदालत में दाखिल की थी, जिसे अदालत ने पूरी बहस सुनने के बाद कानून मुताबिक 3 फरवरी, 2018 को रद्द कर दिया था। उन्होंने सिमरजीत सिंह बैंस व पूर्व एसएसपी की आपसी मिलीभगत का भी आरोप लगाया व कहा कि समाचार पत्रों में बैंस ने संधू का साथ देने की बात भी कही है। मालूम रहे कि पूर्व एसएसपी विजिलेंस ने इस माह अदालत में अर्जी दाखिल करके मौजूदा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर मिलीभगत के आरोप लगाते हुए कहा था कि सिटी सेंटर मामले में उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वो अदालत में उपरोक्त मामले को रद्द कराने के लिए दाखिल की गई कैंसलेशन रिपोर्ट में अपना सहयोग दें और उनके द्वारा इंकार करने पर उन्हें झूठे केस में फंसाने व जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 8 अगस्त को होगी। इस दिन जिला एवं सेशन जज संधू की अर्जी पर अपना फैसला सुना सकते है।
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सिटी सेंटर घोटाले के मामले में अर्जी पर 8 अगस्त को आ सकता है फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। पूर्व एसएसपी विजिलेंस ब्यूरो कंवलजीत सिंह संधू की तरफ से लुधियाना की जिला एवं सेशन जज गुरबीर सिंह की अदालत में लगाई गई अर्जी पर आज संधू के वकील व सरकार की ओर से पंजाब के प्रोसिक्यूशन विभाग के डायरेक्टर विजय सिंगला व जिला अटार्नी रविंदर कुमार अबरौल ने अपनी बहस कर दी है। पूर्व एसएसपी विजिलेंस कंवलजीत सिंह संधू के वकील ने जहां सरकार पर संधू पर कैंसलेशन रिपोर्ट में सहयोग करने के लिए दबाव बनाते हुए उन पर झूठे मामले दर्ज करने को लेकर धमकाया जा रहा है और पूर्व एसएसपी द्वारा मना किए जाने पर उनकी जान को भी खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पूर्व एसएसपी ने सिटी सेंटर मामले में बिना किसी दबाव के अपनी जांच पूरी की थी। और उनको सुने बिना सिटी सेंटर मामले पर कोई फैसला न दिया जाए। वहीं सरकारी पक्ष की तरफ पंजाब के प्रोसिक्यूशन विभाग के डायरेक्टर विजय सिंगला व जिला अटार्नी रविंदर कुमार अबरौल ने पूर्व एसएसपी द्वारा लगाए सभी आरोपों में झूठ का पुलिंदा बताते हुए कहा कि पूर्व एसएसपी द्वारा दायर की गई अर्जी का कोई औचित्य नहीं है और कहा कि सिटी सेंटर मामले में विजिलेंस पुलिस द्वारा दाखिल की गई कैंसलेशन रिपोर्ट में पूरी तरह सच्चाई अदालत के सामने रखी गई है और कुछ भी छुपाया नहीं गया है। उन्होंने पूर्व एसएसपी के लगाए आरोपों को बेबुनियाद व गलत बताते हुए कहा कि पूर्व एसएसपी मीडिया में पब्लिसिटी हासिल करने की कोशिश कर रहे है। उन्होंने कहा कि पूर्व एसएसपी अदालत में दाखिल अर्जी में झूठे आरोप लगाकर सरकारी पक्ष को धमकाने व दबाव बनाने का प्रयास कर रहे है। वहीं उन्होंने पूर्व एसएसपी के इस तर्क को भी गलत ठहराया कि उन्हें कैंसलेशन रिपोर्ट पर फैसला लेने से सुना जाए, गलत है क्योंकि पूर्व एसएसपी ने बतौर पुलिस अधिकारी होते हुए मामला दर्ज किया था। और अब वह नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके है। उनका कोई अधिकार नहीं बनता कि वो इस मामले में दखलंदाजी कर सकते है। क्योंकि न तो वो शिकायतकर्ता है और न ही पीड़ित है। उनका कोई भी कानूनी अधिकार अर्जी दाखिल करने का नहीं बनता है। सरकारी पक्ष की ओर से दाखिल की गए जवाब में पूर्व एसएसपी पर सियासी सांठगांठ होने का भी आरोप लगाया गया है और कहा गया कि पूर्व एसएसपी संधू सियासी प्रभाव के तले आकर झूठे आरोप लगा रहे है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में लोक इंसाफ पार्टी के विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने भी ऐसी ही एक अर्जी उपरोक्त अदालत में दाखिल की थी, जिसे अदालत ने पूरी बहस सुनने के बाद कानून मुताबिक 3 फरवरी, 2018 को रद्द कर दिया था। उन्होंने सिमरजीत सिंह बैंस व पूर्व एसएसपी की आपसी मिलीभगत का भी आरोप लगाया व कहा कि समाचार पत्रों में बैंस ने संधू का साथ देने की बात भी कही है। मालूम रहे कि पूर्व एसएसपी विजिलेंस ने इस माह अदालत में अर्जी दाखिल करके मौजूदा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर मिलीभगत के आरोप लगाते हुए कहा था कि सिटी सेंटर मामले में उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वो अदालत में उपरोक्त मामले को रद्द कराने के लिए दाखिल की गई कैंसलेशन रिपोर्ट में अपना सहयोग दें और उनके द्वारा इंकार करने पर उन्हें झूठे केस में फंसाने व जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 8 अगस्त को होगी। इस दिन जिला एवं सेशन जज संधू की अर्जी पर अपना फैसला सुना सकते है।