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कनाडा में इमिग्रेशन पर शिकंजा: 2026 में और सख्ती, स्टडी-वर्क परमिट में बड़ी कटौती
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-स्टडी और वर्क परमिट की संख्या में भारी गिरावट, आसान नहीं होगा कनाडा में बसना
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कंवरपाल (संवाद)
हलवारा। कनाडा में वर्ष 2025 भारतीयों सहित अंतरराष्ट्रीय छात्रों और आप्रवासियों के लिए उथल-पुथल भरा रहा। बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन को लेकर उपजे राजनीतिक दबाव का असर अब नीतियों में साफ दिखाई दे रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूदो की लोकप्रियता में गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय छात्रों और आप्रवासियों की बढ़ती संख्या को भी अहम कारण माना गया। त्रूदो ने 9 मार्च को मार्क कार्नी के लिबरल पार्टी नेता चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ा और 2025 के संघीय चुनाव में भी हिस्सा नहीं लिया।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में नई सरकार ने इमिग्रेशन नियमों में सख्ती बरकरार रखने का साफ संकेत दिया है। इसके चलते 2025 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जनवरी 2024 में जहां स्टडी परमिट धारकों की संख्या 10 लाख से अधिक थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर करीब 7.25 लाख रह गई। कुल मिलाकर, 2026 में कनाडा में पढ़ाई और काम के रास्ते पहले से ज्यादा कठिन होंगे और भारतीय छात्रों-वर्कर्स को नए हालात के लिए खुद को तैयार करना होगा।
2026 में स्टडी परमिट की सीमा तय
सरकार ने 2026 के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों को जारी किए जाने वाले स्टडी परमिट की अधिकतम सीमा 3,09,670 तय की है। इस सीमा को सभी प्रांतों और क्षेत्रों में बांटा जाएगा। इमिग्रेशन लेवल प्लान 2026-28 के अनुसार 2027 में कुल 4,08,000 स्टडी परमिट जारी होने की उम्मीद है, जो 2025 के लक्ष्य से सात फीसदी और 2024 के लक्ष्य से 16 फीसदी कम है। इनमें 1.55 लाख नए छात्रों और शेष मौजूदा छात्रों के परमिट विस्तार शामिल होंगे।
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मास्टर्स और पीएचडी को राहत
1 जनवरी 2026 से सरकारी यूनिवर्सिटी में मास्टर्स और पीएचडी में दाखिला लेने वाले छात्रों को स्टडी परमिट कोटे से छूट दी जाएगी। इन्हें प्रोविंशियल अटेस्टेशन लेटर (पीएएल) की भी जरूरत नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य उच्च स्तरीय रिसर्च टैलेंट को आकर्षित करना है।
वर्क परमिट के नियम कड़े
पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) अब केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगा, जिन्होंने साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स, हेल्थकेयर या ट्रेड्स से जुड़े कोर्स किए हों। वर्क परमिट लेबर मार्केट की जरूरतों के आधार पर जारी होगा। मास्टर्स छात्रों के लिए अंग्रेजी में सीएलबी लेवल-7 और बैचलर्स के लिए लेवल-5 अनिवार्य किया गया है।
पीआर में फ्रेंच भाषा को प्राथमिकता
सरकार ने फ्रेंच भाषा में दक्ष छात्रों और आप्रवासियों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। फ्रेंच भाषा श्रेणी में सीआरएस स्कोर काफी कम रखा गया, जबकि कैनेडियन एक्सपीरियंस क्लास में 2025 के दौरान स्कोर 500 से ऊपर रहा। दिसंबर में सीईसी ड्रॉ का स्कोर 515 और फ्रेंच भाषा श्रेणी का सिर्फ 399 रहा।
टेंपरेरी वर्कर्स और स्पाउस परमिट में कटौती
2026 में 33 हजार टेंपरेरी वर्कर्स को फास्ट-ट्रैक पीआर दिया जाएगा, लेकिन टेंपरेरी फॉरेन वर्कर परमिट में 37 फीसदी कटौती होगी। स्पाउस ओपन वर्क परमिट अब केवल मैनेजमेंट, प्रोफेशनल, हेल्थकेयर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर से जुड़े वर्कर्स के जीवनसाथियों को मिलेगा।
प्रमुख बदलाव
-2026 में स्टडी परमिट: अधिकतम 3,09,670
-नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों के परमिट में करीब 50% गिरावट
-हेल्थकेयर और ट्रेड्स को प्राथमिकता
-फ्रेंच भाषा जानने वालों को पीआर में राहत
-हाई-वेज स्ट्रीम के तहत ज्यादा वेतन पर ही विदेशी भर्ती
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कंवरपाल (संवाद)
हलवारा। कनाडा में वर्ष 2025 भारतीयों सहित अंतरराष्ट्रीय छात्रों और आप्रवासियों के लिए उथल-पुथल भरा रहा। बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन को लेकर उपजे राजनीतिक दबाव का असर अब नीतियों में साफ दिखाई दे रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूदो की लोकप्रियता में गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय छात्रों और आप्रवासियों की बढ़ती संख्या को भी अहम कारण माना गया। त्रूदो ने 9 मार्च को मार्क कार्नी के लिबरल पार्टी नेता चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ा और 2025 के संघीय चुनाव में भी हिस्सा नहीं लिया।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में नई सरकार ने इमिग्रेशन नियमों में सख्ती बरकरार रखने का साफ संकेत दिया है। इसके चलते 2025 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जनवरी 2024 में जहां स्टडी परमिट धारकों की संख्या 10 लाख से अधिक थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर करीब 7.25 लाख रह गई। कुल मिलाकर, 2026 में कनाडा में पढ़ाई और काम के रास्ते पहले से ज्यादा कठिन होंगे और भारतीय छात्रों-वर्कर्स को नए हालात के लिए खुद को तैयार करना होगा।
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2026 में स्टडी परमिट की सीमा तय
सरकार ने 2026 के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों को जारी किए जाने वाले स्टडी परमिट की अधिकतम सीमा 3,09,670 तय की है। इस सीमा को सभी प्रांतों और क्षेत्रों में बांटा जाएगा। इमिग्रेशन लेवल प्लान 2026-28 के अनुसार 2027 में कुल 4,08,000 स्टडी परमिट जारी होने की उम्मीद है, जो 2025 के लक्ष्य से सात फीसदी और 2024 के लक्ष्य से 16 फीसदी कम है। इनमें 1.55 लाख नए छात्रों और शेष मौजूदा छात्रों के परमिट विस्तार शामिल होंगे।
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मास्टर्स और पीएचडी को राहत
1 जनवरी 2026 से सरकारी यूनिवर्सिटी में मास्टर्स और पीएचडी में दाखिला लेने वाले छात्रों को स्टडी परमिट कोटे से छूट दी जाएगी। इन्हें प्रोविंशियल अटेस्टेशन लेटर (पीएएल) की भी जरूरत नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य उच्च स्तरीय रिसर्च टैलेंट को आकर्षित करना है।
वर्क परमिट के नियम कड़े
पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) अब केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगा, जिन्होंने साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स, हेल्थकेयर या ट्रेड्स से जुड़े कोर्स किए हों। वर्क परमिट लेबर मार्केट की जरूरतों के आधार पर जारी होगा। मास्टर्स छात्रों के लिए अंग्रेजी में सीएलबी लेवल-7 और बैचलर्स के लिए लेवल-5 अनिवार्य किया गया है।
पीआर में फ्रेंच भाषा को प्राथमिकता
सरकार ने फ्रेंच भाषा में दक्ष छात्रों और आप्रवासियों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। फ्रेंच भाषा श्रेणी में सीआरएस स्कोर काफी कम रखा गया, जबकि कैनेडियन एक्सपीरियंस क्लास में 2025 के दौरान स्कोर 500 से ऊपर रहा। दिसंबर में सीईसी ड्रॉ का स्कोर 515 और फ्रेंच भाषा श्रेणी का सिर्फ 399 रहा।
टेंपरेरी वर्कर्स और स्पाउस परमिट में कटौती
2026 में 33 हजार टेंपरेरी वर्कर्स को फास्ट-ट्रैक पीआर दिया जाएगा, लेकिन टेंपरेरी फॉरेन वर्कर परमिट में 37 फीसदी कटौती होगी। स्पाउस ओपन वर्क परमिट अब केवल मैनेजमेंट, प्रोफेशनल, हेल्थकेयर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर से जुड़े वर्कर्स के जीवनसाथियों को मिलेगा।
प्रमुख बदलाव
-2026 में स्टडी परमिट: अधिकतम 3,09,670
-नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों के परमिट में करीब 50% गिरावट
-हेल्थकेयर और ट्रेड्स को प्राथमिकता
-फ्रेंच भाषा जानने वालों को पीआर में राहत
-हाई-वेज स्ट्रीम के तहत ज्यादा वेतन पर ही विदेशी भर्ती