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विशेष दुकान से किताबें खरीदने के लिए नहीं करेंगे मजबूर
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Mon, 09 May 2016 09:42 PM IST
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किताबें
- फोटो : demo pic
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बाल भारतीय पब्लिक स्कूल फेस-3 दुगरी की प्रिंसिपल ने भरोसा दिलाया है कि स्कूल की ओर से किसी को भी विशेष दुकान या स्कूल से किताबें व अन्य सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। पंजाब बाल अधिकार सुरक्षा कमीशन के चेयरमैन सुरेश कालिया की ओर से मिली हिदायतों का पालन करते हुए यह आश्वासन दिया गया है।
गौर हो कि इस स्कूल में पड़ने वाले बच्चों के माता-पिता ने कमीशन से शिकायत करके स्कूल प्रबंधकों पर आरोप लगाए थे कि स्कूल की ओर से पेरेंट्स को स्कूल से ही किताबें और अन्य सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। यह आम बाजार से ज्यादा महंगा होता है।
स्कूल प्रिंसिपल पूनम डोगरा की ओर से प्राप्त पत्र का हवाला देते हुए कमीशन के चेयरमैन कालिया ने बताया कि स्कूल की ओर से भरोसा दिया गया है कि संबंधित किताबों की सूची हर साल जनवरी के अंतिम सप्ताह में स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लगा दी जाया करेगी। अगर इसमें कोई बदलाव होगा या पब्लिशर की ओर से देरी होगी तो विद्यार्थियों को सूचित कर दिया जाएगा। किताबें विद्यार्थी किसी भी दुकान से खरीद सकते हैं।
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इसके अलावा पत्र में यह भी कहा गया था कि स्कूल में विद्यार्थी सिर्फ बढ़िया कापियां ही इस्तेमाल करेंगे, जिन पर स्कूल का लोगो लगा होना जरूरी है। पढ़ाई सामग्री में समानता बनाए रखने के लिए स्कूल की ओर से हर विद्यार्थी को स्कूल का स्टिकर मुहैया करवाया जाएगा। इसे नोट बुक पर किसी भी दुकान से छपवाया या लगवाया जा सकेगा।
कालिया ने बताया कि स्कूल की ओर से की जा रही मनमर्जी के बारे में विद्यार्थियों के माता पिता का एक वफद उनसे पिछले सप्ताह मिला था और इस सारे मामले की शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कमीशन की ओर से स्कूल प्रिंसिपल को तीन मई को कमीशन के मुख्य ऑफिस में तलब किया गया था।
इस मीटिंग के दौरान प्रिंसिपल ने इन फैसलों के बारे में भरोसा दिया था। इस बारे में उन्होंने कमीशन को लिखित पत्र भेजा है। कालिया ने अन्य निजी स्कूलों को भी हिदायत जारी की है कि वह विद्यार्थियों पर किताबें या अन्य सामग्री किसे विशेष दुकान या स्कूल से खरीदने के लिए दबाव न बनाएं।
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गौर हो कि इस स्कूल में पड़ने वाले बच्चों के माता-पिता ने कमीशन से शिकायत करके स्कूल प्रबंधकों पर आरोप लगाए थे कि स्कूल की ओर से पेरेंट्स को स्कूल से ही किताबें और अन्य सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। यह आम बाजार से ज्यादा महंगा होता है।
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स्कूल प्रिंसिपल पूनम डोगरा की ओर से प्राप्त पत्र का हवाला देते हुए कमीशन के चेयरमैन कालिया ने बताया कि स्कूल की ओर से भरोसा दिया गया है कि संबंधित किताबों की सूची हर साल जनवरी के अंतिम सप्ताह में स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लगा दी जाया करेगी। अगर इसमें कोई बदलाव होगा या पब्लिशर की ओर से देरी होगी तो विद्यार्थियों को सूचित कर दिया जाएगा। किताबें विद्यार्थी किसी भी दुकान से खरीद सकते हैं।
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इसके अलावा पत्र में यह भी कहा गया था कि स्कूल में विद्यार्थी सिर्फ बढ़िया कापियां ही इस्तेमाल करेंगे, जिन पर स्कूल का लोगो लगा होना जरूरी है। पढ़ाई सामग्री में समानता बनाए रखने के लिए स्कूल की ओर से हर विद्यार्थी को स्कूल का स्टिकर मुहैया करवाया जाएगा। इसे नोट बुक पर किसी भी दुकान से छपवाया या लगवाया जा सकेगा।
कालिया ने बताया कि स्कूल की ओर से की जा रही मनमर्जी के बारे में विद्यार्थियों के माता पिता का एक वफद उनसे पिछले सप्ताह मिला था और इस सारे मामले की शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कमीशन की ओर से स्कूल प्रिंसिपल को तीन मई को कमीशन के मुख्य ऑफिस में तलब किया गया था।
इस मीटिंग के दौरान प्रिंसिपल ने इन फैसलों के बारे में भरोसा दिया था। इस बारे में उन्होंने कमीशन को लिखित पत्र भेजा है। कालिया ने अन्य निजी स्कूलों को भी हिदायत जारी की है कि वह विद्यार्थियों पर किताबें या अन्य सामग्री किसे विशेष दुकान या स्कूल से खरीदने के लिए दबाव न बनाएं।