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भाईचारे की मिसाल: 78 साल बाद सूखाणा की जामा मस्जिद हुई आबाद, गांव की सिख दंपती ने संवारा
Fri, 12 Dec 2025 08:57 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
कंवरपाल, संवाद न्यूज एजेंसी, हलवारा
कंवरपाल, संवाद न्यूज एजेंसी, हलवारा
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Dec 2025 08:57 PM IST
सार
1947 में इबादत बंद होने के कारण मस्जिद की छोटी ईंटों की दीवारें और गुंबदों की मीनाकारी टूट चुकी थी। गांव के सिख दंपती निरमल सिंह और उनकी पत्नी कमलजीत कौर ने इसका रखरखाव किया।
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पंजाब के शाही इमाम हजरत मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी ने निरमल सिंह को सम्मानित किया।
- फोटो : संवाद
विस्तार
सूखाणा गांव की ऐतिहासिक जामा मस्जिद अब फिर से आबाद हो गई है। यह 1947 के विभाजन के बाद 78 वर्षों तक वीरान और खंडहर हालत में रही।
1947 में इबादत बंद होने के कारण मस्जिद की छोटी ईंटों की दीवारें और गुंबदों की मीनाकारी टूट चुकी थी। यदि गांव के सिख दंपती निरमल सिंह और उनकी पत्नी कमलजीत कौर ने समय-समय पर सफाई और रखरखाव नहीं किया होता तो इस ऐतिहासिक धरोहर का नामो-निशान मिट चुका होता।
रायकोट और नूरपुरा गांवों के मुस्लिम समुदाय के सहयोग और करीफ फुकरान अहमद अहमदगढ़ वालों के अथक प्रयास से मस्जिद पुनर्स्थापित की गई। इस ऐतिहासिक अवसर पर ग्राम पंचायत और मस्जिद प्रबंधक कमेटी ने विशेष धार्मिक समारोह का आयोजन किया। पंजाब के शाही इमाम हजरत मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी, विधायक हाकम सिंह ठेकेदार और पंजाब वक्फ बोर्ड के सीनियर सदस्य एडवोकेट अब्दुल कादिर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मस्जिद की जिम्मेदारी लंबे समय तक निभाने वाले निरमल सिंह और कमलजीत कौर को मुस्लिम समुदाय ने सम्मानित किया। शाही इमाम ने कहा कि धर्म मानवता को जोड़ने का काम करता है और जो लोग धर्मों में फूट डालते हैं वे दोनों के गद्दार हैं। उन्होंने इस सिख दंपती के योगदान को भाईचारे और सहिष्णुता का उदाहरण बताया।
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1947 में इबादत बंद होने के कारण मस्जिद की छोटी ईंटों की दीवारें और गुंबदों की मीनाकारी टूट चुकी थी। यदि गांव के सिख दंपती निरमल सिंह और उनकी पत्नी कमलजीत कौर ने समय-समय पर सफाई और रखरखाव नहीं किया होता तो इस ऐतिहासिक धरोहर का नामो-निशान मिट चुका होता।
रायकोट और नूरपुरा गांवों के मुस्लिम समुदाय के सहयोग और करीफ फुकरान अहमद अहमदगढ़ वालों के अथक प्रयास से मस्जिद पुनर्स्थापित की गई। इस ऐतिहासिक अवसर पर ग्राम पंचायत और मस्जिद प्रबंधक कमेटी ने विशेष धार्मिक समारोह का आयोजन किया। पंजाब के शाही इमाम हजरत मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी, विधायक हाकम सिंह ठेकेदार और पंजाब वक्फ बोर्ड के सीनियर सदस्य एडवोकेट अब्दुल कादिर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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मस्जिद की जिम्मेदारी लंबे समय तक निभाने वाले निरमल सिंह और कमलजीत कौर को मुस्लिम समुदाय ने सम्मानित किया। शाही इमाम ने कहा कि धर्म मानवता को जोड़ने का काम करता है और जो लोग धर्मों में फूट डालते हैं वे दोनों के गद्दार हैं। उन्होंने इस सिख दंपती के योगदान को भाईचारे और सहिष्णुता का उदाहरण बताया।
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