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राजनीति में तो बायचांस आए प्रणब दा
Ludhiana
Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
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लुधियाना। लव योअर स्कूल, लव योअर इंस्टीट्यूशन, बिलीव एंड ओबे योअर टीचर। कुछ इस अंदाज में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने स्कूली बच्चों को अनुशासन में रहने और अध्यापकों का सत्कार करने का पाठ पढ़ाया। मंगलवार को सतपाल मित्तल स्कूल के मित्तल आडिटोरियम के नींव पत्थर समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने बच्चों संग अपने जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं को भी सांझा किया।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को कहा कि चाहे आज वह राष्ट्रपति हैं, लेकिन उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत एक अध्यापक के रूप में की थी। वह कालेज में लेक्चरार भी रहे। परिवार का माहौल राजनीतिक होने के चलते वह बायचांस ही राजनीति में आ गए। लेकिन उनकी दिली इच्छा थी कि वह अध्यापक रहें, क्योंकि एक अध्यापक हमेशा अध्यापक रहता है और बच्चे हमेशा अध्यापक के तौर पर उनका सत्कार करते है।
राष्ट्रपति ने अपने मन के भावों को बच्चों के साथ बांटते हुए कहा कि आज भी जब-जब मंच पर संबोधन करते हैं तो खुद को एक अध्यापक के रूप में ढाल लेते हैं। अपने स्कूल की चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जिस स्कूल में उन्होंने दसवीं तक पढ़ाई की, राष्ट्रपति बनने के बाद जब वह वहां गए। वहां के बच्चे ने उनसे एडवाइज मांगी कि उनको क्या करना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि अपने संस्थान और स्कूल से प्यार करना सीखें और अध्यापकों को सम्मान दें। तभी वह अपने जीवन के लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। उन्होंने बच्चों को कहा कि वे देश की रीढ़ की हड्डी हैं, जिसकी मजबूती से ही देश को मजबूती मिल सकती है।
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राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को कहा कि चाहे आज वह राष्ट्रपति हैं, लेकिन उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत एक अध्यापक के रूप में की थी। वह कालेज में लेक्चरार भी रहे। परिवार का माहौल राजनीतिक होने के चलते वह बायचांस ही राजनीति में आ गए। लेकिन उनकी दिली इच्छा थी कि वह अध्यापक रहें, क्योंकि एक अध्यापक हमेशा अध्यापक रहता है और बच्चे हमेशा अध्यापक के तौर पर उनका सत्कार करते है।
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राष्ट्रपति ने अपने मन के भावों को बच्चों के साथ बांटते हुए कहा कि आज भी जब-जब मंच पर संबोधन करते हैं तो खुद को एक अध्यापक के रूप में ढाल लेते हैं। अपने स्कूल की चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जिस स्कूल में उन्होंने दसवीं तक पढ़ाई की, राष्ट्रपति बनने के बाद जब वह वहां गए। वहां के बच्चे ने उनसे एडवाइज मांगी कि उनको क्या करना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि अपने संस्थान और स्कूल से प्यार करना सीखें और अध्यापकों को सम्मान दें। तभी वह अपने जीवन के लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। उन्होंने बच्चों को कहा कि वे देश की रीढ़ की हड्डी हैं, जिसकी मजबूती से ही देश को मजबूती मिल सकती है।
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