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शहीद ऊधम सिंह स्टोरी
Updated Sat, 28 Jul 2018 10:16 PM IST
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ऊधम सिंह का गदर लहर से था गहरा नाता
गदरी लिचट्रेर के साथ पुलिस ने किया था गिरफ्तार
सुनाम क्षेत्र में गदर लहर का था खासा प्रभाव
गदरी शहीद बीबी गुलाब कौर व शहीद बाबा जीवन सिंह ने भी दी थीं शहादतें
सुशील कुमार
सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)। देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान शहीद ऊधम सिंह का गदर लहर से गहरा नाता रहा था। ऊधम सिंह ने अमेरिका, युरोप, अफगानिस्तान और भारत में गदर लहर में हिस्सा लिया। अपने अमेरिका प्रवास के दौरान ऊधम सिंह गदर पार्टी के प्रभाव में आए थे और गदर पार्टी की ओर से अमेरिका में ऊधम सिंह को गैर कानूनी प्रवासियों को गदरियों के गुप्त ठिकानों तक पहुंचाने व फंड इकट्ठा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस दौर में पटियाला रियासत का हिस्सा रहे सुनाम क्षेत्र में गदर लहर का खासा प्रभाव था। सुनाम से सटे गांव बख्शीवाला की गदरी शहीद बीबी गुलाब कौर और गांव दौला सिंह वाला के गदरी शहीद बाबा जीवन सिंह ने इस लहर से जुड़कर देश को आजाद करवाने के लिए कुर्बानी दी थी।
27 जुलाई 1927 को ऊधम सिंह अमेरिका से कराची आए और उनसे गदरी सामग्री पकडे़ जाने के एवज में जुर्माना किया गया। इसी वर्ष 30 अगस्त को एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने ऊधम सिंह को हिरासत में लिया और तलाशी के दौरान उनसे पिस्तोल ,गदर की गूंज, रूसी गदर ज्ञान समाचार, गदर की दूरी, गुलामी दा जहर (लाला हरदियाल का लिखित) आदि साहित्य बरामद किया गया। वर्ष 1934 में डायरेक्टर इंटेलिजेंस ब्यूरो ने गदर डायरेक्टरी जारी की, जिसके पन्ना नंबर 267 पर ऊधम सिंह का नाम दर्ज है। इन तमाम तथ्यों को लेखक राकेश कुमार ने अपनी पुस्तक क्रांतिकारी शहीद ऊधम सिंह में प्रकाशित किया है। लेखक राकेश कुमार के मुताबिक ऊधम सिंह ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ थे और ऊधम सिंह को देश के किसानों, मजदूरों, छात्रों व मेहनत करने वाले लोगों की चिंता थी। ऊधम सिंह, आजाद देश में बदलाव चाहते थे।
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फोटो:28एसजीआरपी0ए: शहीद ऊधम सिंह की फाइल फोटो।
फोटो:28एसजीआरपी0बी: सुनाम में स्थित शहीद ऊधम सिंह यादगार।
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गदरी लिचट्रेर के साथ पुलिस ने किया था गिरफ्तार
सुनाम क्षेत्र में गदर लहर का था खासा प्रभाव
गदरी शहीद बीबी गुलाब कौर व शहीद बाबा जीवन सिंह ने भी दी थीं शहादतें
सुशील कुमार
सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)। देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान शहीद ऊधम सिंह का गदर लहर से गहरा नाता रहा था। ऊधम सिंह ने अमेरिका, युरोप, अफगानिस्तान और भारत में गदर लहर में हिस्सा लिया। अपने अमेरिका प्रवास के दौरान ऊधम सिंह गदर पार्टी के प्रभाव में आए थे और गदर पार्टी की ओर से अमेरिका में ऊधम सिंह को गैर कानूनी प्रवासियों को गदरियों के गुप्त ठिकानों तक पहुंचाने व फंड इकट्ठा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस दौर में पटियाला रियासत का हिस्सा रहे सुनाम क्षेत्र में गदर लहर का खासा प्रभाव था। सुनाम से सटे गांव बख्शीवाला की गदरी शहीद बीबी गुलाब कौर और गांव दौला सिंह वाला के गदरी शहीद बाबा जीवन सिंह ने इस लहर से जुड़कर देश को आजाद करवाने के लिए कुर्बानी दी थी।
27 जुलाई 1927 को ऊधम सिंह अमेरिका से कराची आए और उनसे गदरी सामग्री पकडे़ जाने के एवज में जुर्माना किया गया। इसी वर्ष 30 अगस्त को एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने ऊधम सिंह को हिरासत में लिया और तलाशी के दौरान उनसे पिस्तोल ,गदर की गूंज, रूसी गदर ज्ञान समाचार, गदर की दूरी, गुलामी दा जहर (लाला हरदियाल का लिखित) आदि साहित्य बरामद किया गया। वर्ष 1934 में डायरेक्टर इंटेलिजेंस ब्यूरो ने गदर डायरेक्टरी जारी की, जिसके पन्ना नंबर 267 पर ऊधम सिंह का नाम दर्ज है। इन तमाम तथ्यों को लेखक राकेश कुमार ने अपनी पुस्तक क्रांतिकारी शहीद ऊधम सिंह में प्रकाशित किया है। लेखक राकेश कुमार के मुताबिक ऊधम सिंह ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ थे और ऊधम सिंह को देश के किसानों, मजदूरों, छात्रों व मेहनत करने वाले लोगों की चिंता थी। ऊधम सिंह, आजाद देश में बदलाव चाहते थे।
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फोटो:28एसजीआरपी0ए: शहीद ऊधम सिंह की फाइल फोटो।
फोटो:28एसजीआरपी0बी: सुनाम में स्थित शहीद ऊधम सिंह यादगार।