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पीएयू में प्याज तथा लहसून की खोज संबंधी राष्ट्रीय वर्कशाप आरंभ
Updated Fri, 08 Jun 2018 09:56 PM IST
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पीएयू में प्याज-लहसुन खोज संबंधी राष्ट्रीय वर्कशाप शुरू
पूरे देश से प्रसिद्ध बागबानी तथा सब्जी वैज्ञानिक पहुंचे
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी लुधियाना में आज प्याज तथा लहसून की खोज संबंधी तीन दिवसीय 9वीं सर्व भारतीय राष्ट्रीय कन्वेंशन आरंभ हुई। इस वर्कशाप में भारत के बागबानी तथा सब्जियों की खेती से संबंधित प्रसिद्ध वैज्ञानिक शामिल हुए। इन वैज्ञानिकों में प्रसिद्ध सब्जी वैज्ञानिक तथा भारतीय खेती खोज काउंसिल के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल जी कालू, डीबीएसकेके विद्यापीठ डपोली के पूर्व वाइस चांसलर डा. केई लवांडे, भारतीय खेती खोज कौंसल से डा. टी जानकीराम, प्याज तथा लहसून खोज केंद्र पूने से डा. मेजर सिंह, पीएयू के निर्देशक खोज डा. नवतेज सिंह बैंस तथा सब्जी विज्ञान विभाग के मुख्य तथा वर्कशाप के प्रबंधकीय सचिव डा. अजमेर सिंह मौजूद रहे। पीएयू के रजिस्ट्रार डा. रजिंदर सिंह सिद्धू मुख्य मेहमान मौजूद रहे। निर्देशक खोज डा. नवतेज सिंह बैंस ने अपने शब्दों से वैज्ञानिकों का स्वागत किया। उन्होंने प्याज तथा लहसुन की कमी न आने देने का सेहरा वैज्ञानिकों के सिर सजाया। उन्होंने कहा कि आज चुनौती सब्जियों की खेती को खेती चक्कर का हिस्सा बनाना है। प्याज तथा लहसुन के बारे पीएयू की खोज पर तसल्ली प्रगट करते हुए डा. बैस ने वैज्ञानिकों को नई चुनौतियां के सामने डट जाने को कहा। डा. मेजर सिंह ने प्याज तथा लहसुन खोज केंद्र पूने की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी। भारतीय बागबानी विभाग का प्याज व लहसून के बारे में विशेष अंक इस मौके पर रिलीज किया गया। 2016 का प्याज तथा लहसुन के क्षेत्र में सर्वोत्तम वैज्ञानिक का अवार्ड बी महाजन को दिया गया। पुरस्कार में सम्मान चिह्न के बिना 51000 रुपये की राशि का चेक महाजन को भेंट किया गया। इसके अलावा प्याज व लहसुन की खोज के सर्वोत्तम केंद्र का पुरस्कार पीएयू के सब्जी विज्ञान विभाग को मिला। यह पुरस्कार डा. अजमेर सिंह ढट तथा उनकी टीम ने हासिल किया। डा. टी जानकीराम ने भारत को चीन के बाद प्याज तथा लहसुन का उत्पादन करने वाला सब से बड़ा देश कहा। पिछले 20 वर्षों में प्याज की खपत 4 गुणा बढ़ी है। आयरलैंड तथा तजाकिस्तान जैसे देशों के मुकाबले भारत में प्रति हेक्टेयर प्याज का उत्पादन काफी कम है। वैज्ञानिकों को इसे और बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयत्नशील होना चाहिए।
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पूरे देश से प्रसिद्ध बागबानी तथा सब्जी वैज्ञानिक पहुंचे
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी लुधियाना में आज प्याज तथा लहसून की खोज संबंधी तीन दिवसीय 9वीं सर्व भारतीय राष्ट्रीय कन्वेंशन आरंभ हुई। इस वर्कशाप में भारत के बागबानी तथा सब्जियों की खेती से संबंधित प्रसिद्ध वैज्ञानिक शामिल हुए। इन वैज्ञानिकों में प्रसिद्ध सब्जी वैज्ञानिक तथा भारतीय खेती खोज काउंसिल के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल जी कालू, डीबीएसकेके विद्यापीठ डपोली के पूर्व वाइस चांसलर डा. केई लवांडे, भारतीय खेती खोज कौंसल से डा. टी जानकीराम, प्याज तथा लहसून खोज केंद्र पूने से डा. मेजर सिंह, पीएयू के निर्देशक खोज डा. नवतेज सिंह बैंस तथा सब्जी विज्ञान विभाग के मुख्य तथा वर्कशाप के प्रबंधकीय सचिव डा. अजमेर सिंह मौजूद रहे। पीएयू के रजिस्ट्रार डा. रजिंदर सिंह सिद्धू मुख्य मेहमान मौजूद रहे। निर्देशक खोज डा. नवतेज सिंह बैंस ने अपने शब्दों से वैज्ञानिकों का स्वागत किया। उन्होंने प्याज तथा लहसुन की कमी न आने देने का सेहरा वैज्ञानिकों के सिर सजाया। उन्होंने कहा कि आज चुनौती सब्जियों की खेती को खेती चक्कर का हिस्सा बनाना है। प्याज तथा लहसुन के बारे पीएयू की खोज पर तसल्ली प्रगट करते हुए डा. बैस ने वैज्ञानिकों को नई चुनौतियां के सामने डट जाने को कहा। डा. मेजर सिंह ने प्याज तथा लहसुन खोज केंद्र पूने की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी। भारतीय बागबानी विभाग का प्याज व लहसून के बारे में विशेष अंक इस मौके पर रिलीज किया गया। 2016 का प्याज तथा लहसुन के क्षेत्र में सर्वोत्तम वैज्ञानिक का अवार्ड बी महाजन को दिया गया। पुरस्कार में सम्मान चिह्न के बिना 51000 रुपये की राशि का चेक महाजन को भेंट किया गया। इसके अलावा प्याज व लहसुन की खोज के सर्वोत्तम केंद्र का पुरस्कार पीएयू के सब्जी विज्ञान विभाग को मिला। यह पुरस्कार डा. अजमेर सिंह ढट तथा उनकी टीम ने हासिल किया। डा. टी जानकीराम ने भारत को चीन के बाद प्याज तथा लहसुन का उत्पादन करने वाला सब से बड़ा देश कहा। पिछले 20 वर्षों में प्याज की खपत 4 गुणा बढ़ी है। आयरलैंड तथा तजाकिस्तान जैसे देशों के मुकाबले भारत में प्रति हेक्टेयर प्याज का उत्पादन काफी कम है। वैज्ञानिकों को इसे और बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयत्नशील होना चाहिए।