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किसान 20 जून से पहले धान ना लगाए: मुख्य खेतीबाड़ी आफिसर
Updated Wed, 13 Jun 2018 09:52 PM IST
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‘किसान 20 जून से पहले धान ना लगाएं’
उल्लंघन करने पर होगा 10 हजार का जुर्माना और सजा
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। मिशन तंदुरुस्त पंजाब की रोशनी में मुख्य खेतीबाड़ी आफिसर डा. बलदेव सिंह ने जिला लुधियाना के अधिकारियों से विशेष बैठक की। इसमें पंजाब की जमीन के निचले पानी के गिर रहे स्तर को मुख्य रखते हुए पंजाब सरकार की ओर से प्रिजर्वेशन आफ सब सॉयल एक्ट 2009 के अधीन किसी भी किसान को धान की पनीरी की लगवाई 20 जून 2018 से पहले करने की आज्ञा नहीं दी जाएगी। उल्लंघन करने वाले किसान को दस हजार प्रति हेक्टेयर जुर्माना और सजा भी हो सकती है।
मुख्य खेतीबाड़ी आफिसर ने विभाग के अधिकारियों को हिदायत की कि धान की बिजाई संबंधी किसानों को 20 जून के बाद धान लगाने के लिए प्रेरित किया जाए। किसानों को जागरूक करने के लिए गुरुद्वारों, मंदिरों में अलाउसमेंट करवाई जाए। फसली विभिन्नता प्रोग्राम के तहत विभाग की ओर से खेती विभिन्नता लाने के लिए मक्की का बीज और अन्य इनपुट 50 फीसदी सब्सिडी पर मुहिया करवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद का संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए। यदि गेहूं की फसल को पूरी डीएपी खाद दी है तो धान की फसल में डीएपी खाद डालने की जरूरत नहीं और धान के झाड़ पर कोई फक नहीं पड़ता। इससे किसान पर आर्थिक बोझ घटेगा व वातावरण स्वच्छ रहेगा।
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उल्लंघन करने पर होगा 10 हजार का जुर्माना और सजा
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। मिशन तंदुरुस्त पंजाब की रोशनी में मुख्य खेतीबाड़ी आफिसर डा. बलदेव सिंह ने जिला लुधियाना के अधिकारियों से विशेष बैठक की। इसमें पंजाब की जमीन के निचले पानी के गिर रहे स्तर को मुख्य रखते हुए पंजाब सरकार की ओर से प्रिजर्वेशन आफ सब सॉयल एक्ट 2009 के अधीन किसी भी किसान को धान की पनीरी की लगवाई 20 जून 2018 से पहले करने की आज्ञा नहीं दी जाएगी। उल्लंघन करने वाले किसान को दस हजार प्रति हेक्टेयर जुर्माना और सजा भी हो सकती है।
मुख्य खेतीबाड़ी आफिसर ने विभाग के अधिकारियों को हिदायत की कि धान की बिजाई संबंधी किसानों को 20 जून के बाद धान लगाने के लिए प्रेरित किया जाए। किसानों को जागरूक करने के लिए गुरुद्वारों, मंदिरों में अलाउसमेंट करवाई जाए। फसली विभिन्नता प्रोग्राम के तहत विभाग की ओर से खेती विभिन्नता लाने के लिए मक्की का बीज और अन्य इनपुट 50 फीसदी सब्सिडी पर मुहिया करवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद का संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए। यदि गेहूं की फसल को पूरी डीएपी खाद दी है तो धान की फसल में डीएपी खाद डालने की जरूरत नहीं और धान के झाड़ पर कोई फक नहीं पड़ता। इससे किसान पर आर्थिक बोझ घटेगा व वातावरण स्वच्छ रहेगा।
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