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सैकड़ों ट्रैक्टरों की चाबियां एसडीएम को सौंपने पहुंचे किसान
Updated Tue, 29 May 2018 09:39 PM IST
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पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम के विरोध में किसानों का प्रदर्शन
समराला में किसानों ने अपने ट्रैक्टरों की चाबियां एसडीएम कोे सौंपी
अमर उजाला ब्यूरो
समराला/खन्ना। पुलिस जिला खन्ना के विधानसभा हलका समराला के किसानों ने आए दिन बढ़ रही पेट्रोल, डीजल की कीमतों के विरोध में अनोखे ढंग से प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के सैकड़ों किसानों ने अपने ट्रैक्टरों की कतार बनाकर एसडीएम दफ्तर तक रोष मार्च निकाला और रोष स्वरूप अपने वाहनों की चाबियों का जखीरा एसडीएम समराला अमित बैंबी को सौंप दिया। एसडीएम ने किसानों से केवल ज्ञापन स्वीकार करने की पेशकश करते हुए उनकी चाबियां उन्हें लौटा दीं और उनकी मांगें प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस पर किसान अल्टीमेटम देकर वहां से लौट गए।
प्रदर्शन के दौरान भाकियू राजेवाल के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल, भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के अध्यक्ष हरिंदर सिंह लक्खोवाल मौजूद रहे। किसान नेताओं ने एकसुर में कहा कि उनकी आर्थिक दशा कोई ज्यादा अच्छी नहीं है। ऊपर से पेट्रोल, डीजल की लगातार बढ़ रही कीमतों की मार किसानों पर पड़ रही है। एक तरफ बॉर्डर पर जवान मर रहा है वही खेत में किसान मर रहा है। अगर सरकार हमारी मांग नहीं पूरी करती तो आगे संघर्ष की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
राजेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार हर फ्रंट पर फेल साबित हुई है। धान की बिजाई से पहले खेतों में ट्रैक्टर चलाने के लिए 350 से लेकर 700 रुपये का डीजल प्रति घंटा लगता है। इन हालातों में किसान खेती नहीं कर सकता है। केंद्र सरकार हर महीने 350 करोड़ रुपये एक्साइज ड्यूटी ले रही है। पंजाब सरकार भी इसी राह पर है। राजेवाल ने खेती को लेकर पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धान की बिजाई 20 जून से शुरू करने का फैसला किसान विरोधी है। 20 जून से बीजी फसल की कटाई अक्टूबर के मध्य में हो सकेगी। उस समय मौसम में नमी आ जाती है। इससे फसल खराब होगी और रेट सही नही मिलेगा। राजेवाल ने मांग की कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में लाया जाए। साथ ही किसानों को सब्सिडी वाला तेल मुहैया कराया जाए।
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इस प्रदर्शन में शामिल कृषि विशेषज्ञ दविंदर शर्मा का कहना था कि सरकार को नींद से जगाने और अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए किसानों का यह प्रदर्शन बिल्कुल ही अनोखा था। देश में कभी किसानों के लिए बनाई गई नीतियों को सरकार सही ढंग से लागू नहीं करती जिसका सीधा सीधा बोझ किसानों पर पड़ता है।
प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे किसानों ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर डीजल की कीमतों को न घटाया गया तो वह जून में इससे भी तीखा संघर्ष शुरू करेंगे।
फोटो कैप्शन:29जीबीजीपी04: समराला में अपने सैकड़ों ट्रैकटरों पर एसडीएम को चाबियां सौंपने जाते हुए सैकड़ों किसान।
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समराला में किसानों ने अपने ट्रैक्टरों की चाबियां एसडीएम कोे सौंपी
अमर उजाला ब्यूरो
समराला/खन्ना। पुलिस जिला खन्ना के विधानसभा हलका समराला के किसानों ने आए दिन बढ़ रही पेट्रोल, डीजल की कीमतों के विरोध में अनोखे ढंग से प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के सैकड़ों किसानों ने अपने ट्रैक्टरों की कतार बनाकर एसडीएम दफ्तर तक रोष मार्च निकाला और रोष स्वरूप अपने वाहनों की चाबियों का जखीरा एसडीएम समराला अमित बैंबी को सौंप दिया। एसडीएम ने किसानों से केवल ज्ञापन स्वीकार करने की पेशकश करते हुए उनकी चाबियां उन्हें लौटा दीं और उनकी मांगें प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस पर किसान अल्टीमेटम देकर वहां से लौट गए।
प्रदर्शन के दौरान भाकियू राजेवाल के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल, भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के अध्यक्ष हरिंदर सिंह लक्खोवाल मौजूद रहे। किसान नेताओं ने एकसुर में कहा कि उनकी आर्थिक दशा कोई ज्यादा अच्छी नहीं है। ऊपर से पेट्रोल, डीजल की लगातार बढ़ रही कीमतों की मार किसानों पर पड़ रही है। एक तरफ बॉर्डर पर जवान मर रहा है वही खेत में किसान मर रहा है। अगर सरकार हमारी मांग नहीं पूरी करती तो आगे संघर्ष की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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राजेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार हर फ्रंट पर फेल साबित हुई है। धान की बिजाई से पहले खेतों में ट्रैक्टर चलाने के लिए 350 से लेकर 700 रुपये का डीजल प्रति घंटा लगता है। इन हालातों में किसान खेती नहीं कर सकता है। केंद्र सरकार हर महीने 350 करोड़ रुपये एक्साइज ड्यूटी ले रही है। पंजाब सरकार भी इसी राह पर है। राजेवाल ने खेती को लेकर पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धान की बिजाई 20 जून से शुरू करने का फैसला किसान विरोधी है। 20 जून से बीजी फसल की कटाई अक्टूबर के मध्य में हो सकेगी। उस समय मौसम में नमी आ जाती है। इससे फसल खराब होगी और रेट सही नही मिलेगा। राजेवाल ने मांग की कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में लाया जाए। साथ ही किसानों को सब्सिडी वाला तेल मुहैया कराया जाए।
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इस प्रदर्शन में शामिल कृषि विशेषज्ञ दविंदर शर्मा का कहना था कि सरकार को नींद से जगाने और अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए किसानों का यह प्रदर्शन बिल्कुल ही अनोखा था। देश में कभी किसानों के लिए बनाई गई नीतियों को सरकार सही ढंग से लागू नहीं करती जिसका सीधा सीधा बोझ किसानों पर पड़ता है।
प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे किसानों ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर डीजल की कीमतों को न घटाया गया तो वह जून में इससे भी तीखा संघर्ष शुरू करेंगे।
फोटो कैप्शन:29जीबीजीपी04: समराला में अपने सैकड़ों ट्रैकटरों पर एसडीएम को चाबियां सौंपने जाते हुए सैकड़ों किसान।