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ब्रेल लिपी कोड से सभी भाषाओं में होती है पढ़ाई
Updated Thu, 04 Jan 2018 10:17 PM IST
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ब्रेल लिपी कोड से सभी भाषाओं में होती है पढ़ाई
रिमट ने ब्रेल लिपि जनक को किया याद
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी गोबिंदगढ़।
नेत्रहीन लोगों को पढने और लिखने के योग्य बनाने वाली ब्रेल लिप्पी के जनक लुइस ब्रेल के जन्मदिवस पर रिमट यूनिवर्सिटी में एक विशेष लेक्चर करवाया गया। जिसमें यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ हुक्म चंद बंसल ने कहा कि ब्रेल लिप्पी ने समाज के इस विशेष वर्ग को शिक्षा के मामले में पूर्ण स्वस्थ्य लोगों के बराबर खड़ा कर दिया है। अब यह समाज और सरकारों की जिम्मेदारी है कि वह उन्हें गौरवपूर्ण ढंग से जीने के अवसर उपलब्ध करवाए।
वाईस चांसलर डा. एएस चावला ने कहा कि ब्रेल के बचपन में एक हादसे के दौरान उन की दोनों आंखों की रौशनी चली गई थी मगर उन्हें जिंदगी जीने के कला आती थी जिस कारण वह आज भी इतिहास में जिंदा हैं। उन्होंने घर बैठने की बजाए पढ़ाई शुरू की और नेत्रहीन युवकों के लिए फ्रांस रॉयल इंस्टीट्यूट से वजीफा प्राप्त किया। ब्रेल लुईस ने अपने छात्र जीवन में उन जैसे असंख्य लोगों के लिए एक लिपि विकसित की और 1824 में अपना काम लोगों के सामने प्रस्तुत किया।
चावला ने बताया कि उसी इंस्टीट्यूट में लुईस ब्रेल ने प्रोफेसर के रूप में सेवाएं प्रदान कीं और एक संगीतकार के रूप में भी काम किया मगर अपना अधिकतर समय अपनी बनाई लिपि को बेहतर बनाने में लगाया। जिस लिपि को उन्होंने विकसित किया था वह आज नेत्रहीन लोगों के लिए एक अनमोल तोहफा है और कोई भी उसमें तब्दीली नहीं कर सका। प्रो वाईस चांसलर डा. बी एस भाटिया ने कहा कि वर्ष 2012 में ब्रेल लिपि में भारत में हिन्दी का पहला पाक्षिक ब्रेल समाचार पत्र ‘दृष्टि’ 325 विभागों के माध्यम से 20 हजार लोगों तक पहुंचाया गया। ब्रेल एक ऐसा कोड है जिस के मामय से न केवल सभी भाषाएं बल्कि हिसाब, संगीत और कंप्यूटर प्रोग्राम तक की पढ़ाई भी हो सकती है।
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फोटो कैप्शन:04जीबीजीपी05: रिटम यूनिवर्सिटी में ब्रेल लिपि के जन्मदातालुईस ब्रेल के पर विचार चर्चा करते वाईस चांसलर डा. ए एस चावला।
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रिमट ने ब्रेल लिपि जनक को किया याद
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी गोबिंदगढ़।
नेत्रहीन लोगों को पढने और लिखने के योग्य बनाने वाली ब्रेल लिप्पी के जनक लुइस ब्रेल के जन्मदिवस पर रिमट यूनिवर्सिटी में एक विशेष लेक्चर करवाया गया। जिसमें यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ हुक्म चंद बंसल ने कहा कि ब्रेल लिप्पी ने समाज के इस विशेष वर्ग को शिक्षा के मामले में पूर्ण स्वस्थ्य लोगों के बराबर खड़ा कर दिया है। अब यह समाज और सरकारों की जिम्मेदारी है कि वह उन्हें गौरवपूर्ण ढंग से जीने के अवसर उपलब्ध करवाए।
वाईस चांसलर डा. एएस चावला ने कहा कि ब्रेल के बचपन में एक हादसे के दौरान उन की दोनों आंखों की रौशनी चली गई थी मगर उन्हें जिंदगी जीने के कला आती थी जिस कारण वह आज भी इतिहास में जिंदा हैं। उन्होंने घर बैठने की बजाए पढ़ाई शुरू की और नेत्रहीन युवकों के लिए फ्रांस रॉयल इंस्टीट्यूट से वजीफा प्राप्त किया। ब्रेल लुईस ने अपने छात्र जीवन में उन जैसे असंख्य लोगों के लिए एक लिपि विकसित की और 1824 में अपना काम लोगों के सामने प्रस्तुत किया।
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चावला ने बताया कि उसी इंस्टीट्यूट में लुईस ब्रेल ने प्रोफेसर के रूप में सेवाएं प्रदान कीं और एक संगीतकार के रूप में भी काम किया मगर अपना अधिकतर समय अपनी बनाई लिपि को बेहतर बनाने में लगाया। जिस लिपि को उन्होंने विकसित किया था वह आज नेत्रहीन लोगों के लिए एक अनमोल तोहफा है और कोई भी उसमें तब्दीली नहीं कर सका। प्रो वाईस चांसलर डा. बी एस भाटिया ने कहा कि वर्ष 2012 में ब्रेल लिपि में भारत में हिन्दी का पहला पाक्षिक ब्रेल समाचार पत्र ‘दृष्टि’ 325 विभागों के माध्यम से 20 हजार लोगों तक पहुंचाया गया। ब्रेल एक ऐसा कोड है जिस के मामय से न केवल सभी भाषाएं बल्कि हिसाब, संगीत और कंप्यूटर प्रोग्राम तक की पढ़ाई भी हो सकती है।
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फोटो कैप्शन:04जीबीजीपी05: रिटम यूनिवर्सिटी में ब्रेल लिपि के जन्मदातालुईस ब्रेल के पर विचार चर्चा करते वाईस चांसलर डा. ए एस चावला।