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24 साल बाद पंजाब लौटा गुरतेज : लेबनान में पासपोर्ट हुआ गुम, बोला- यह दूसरा जन्म, छोड़ दी थी वापसी की उम्मीद
Fri, 20 Sep 2024 08:52 PM IST
अंकेश ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला)
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला)
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Fri, 20 Sep 2024 08:52 PM IST
सार
पंजाब के लुधियाना का एक व्यक्ति 24 साल बाद वतन लौटा है। गुरतेज सिंह 2001 में लेबनान गया था और वहां उसका पासपोर्ट गुम हो गया, जिस वजह से उसका वतन लौटाना मुश्किल हो गया था।
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24 साल बाद वतन लौटा पंजाब का गुरतेज सिंह।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
भगवान श्रीराम ने भी 14 साल का बनवास काटा था। लेकिन पंजाब के एक व्यक्ति ने इससे भी 10 साल ज्यादा घर परिवार से दूर रहकर 24 साल कैसे गुजारे होंगे, भला यह तो वही जानता है। पंजाब के लुधियाना के गांव मत्तेवाड़ा का गुरतेज सिंह 24 साल बाद अपने वतन व परिवार के पास लौटा है। उनके घर लौटने पर जश्न का माहौल है। गुरतेज को भारत लाने के लिए राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने अहम भूमिका निभाई है।
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परिवार के पास लौटने के बाद गुरतेज सिंह ने संत बलबीर सिंह सीचेवाल से मुलाकात करने सुल्तानपुर लोधी पहुंचे थे। इस मुलाकात के दौरान भावुक हुए गुरतेज सिंह ने कहा कि यह उनका दूसरा जन्म है। गुरतेज सिंह ने 24 साल बिना परिवार के कैसे निकाले, इस लंबे समय में उन्होंने क्या कुछ सहा वो सारी आपबीती सुनाई है।
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गुरतेज सिंह ने बताया कि ट्रैवल एजेंट ने उसे 2001 में लेबनान भेजने के लिए एक लाख रुपये लिए थे। उस जमाने में उसने यह एक लाख कैसे इकट्ठा किया, यह वह ही जानते हैं। जब गुरतेज सिंह लेबनान गए थे तो वह 33 साल के थे। वर्ष 2001 में अपने दो छोटे बच्चों को छोड़कर विदेश चले गए। लेबनान में रहने के दौरान 2006 में उसका पासपोर्ट खो गया, जिससे उनके लिए घर लौटना बहुत मुश्किल हो गया।
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उन्होंने कहा कि कई कोशिशों के बाद भी उनके लिए पासपोर्ट बनवाना मुश्किल हो रहा था, क्योंकि पासपोर्ट बहुत पहले बना हुआ था। उन्होंने कहा कि जब इतनी कोशिशों के बाद भी उन्हें पासपोर्ट नहीं मिला तो उन्होंने वापसी की उम्मीद ही छोड़ दी थी। राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से परिवार के सदस्यों ने संपर्क किया। उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए विदेश मंत्रालय से संपर्क किया और गुरतेज सिंह की वापसी को संभव बनाया। विदेशी धरती पर आजीविका कमाने और अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य बनाने के लिए लेबनान गए गुरतेज सिंह ने कहा कि संत सीचेवाल के प्रयासों से वह 24 साल बाद अपने गांव की मिट्टी को चूमना नसीब हुआ है।
घर का गुजारा न होने पर विदेश जाने का सोचा
संत सीचेवाल का शुक्रिया अदा करने के लिए अपने परिवार सहित सुल्तानपुर लोधी आए गुरतेज सिंह ने आपबीती बताते हुए कहा कि विदेश जाने से पहले वह कोटियां-स्वेटर बनाने वाली फैक्ट्री में काम करते थे। जब घर में गुजारा करना मुश्किल हो गया तो उन्होंने विदेश जाने का मन बनाया था।
संत सीचेवाल का शुक्रिया अदा करने के लिए अपने परिवार सहित सुल्तानपुर लोधी आए गुरतेज सिंह ने आपबीती बताते हुए कहा कि विदेश जाने से पहले वह कोटियां-स्वेटर बनाने वाली फैक्ट्री में काम करते थे। जब घर में गुजारा करना मुश्किल हो गया तो उन्होंने विदेश जाने का मन बनाया था।
लेबनान पहुंचना भी नहीं रहा आसान
गुरतेज सिंह ने कहा कि लेबनान पहुंचना भी उनके लिए बड़ी चुनौती थी। एजेंट उसे पहले जॉर्डन ले गया और फिर पड़ोसी देश सीरिया में दाखिल करवाया। वहां से डोंकी लगाकर लेबनान पहुंचे। युद्ध जैसे माहौल में वहां रहकर काम करना उनके लिए बहुत मुश्किल था। सारा दिन खेतों में काम करना पड़ता था। छिपकर रहने के कारण हमेशा डर बना रहता था कि कहीं पकड़ा न जाए। किसी तरह जिंदगी अपने ढर्रे पर चलती रही थी और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने खेतों में मेहनत-मजदूरी की।
गुरतेज सिंह ने कहा कि लेबनान पहुंचना भी उनके लिए बड़ी चुनौती थी। एजेंट उसे पहले जॉर्डन ले गया और फिर पड़ोसी देश सीरिया में दाखिल करवाया। वहां से डोंकी लगाकर लेबनान पहुंचे। युद्ध जैसे माहौल में वहां रहकर काम करना उनके लिए बहुत मुश्किल था। सारा दिन खेतों में काम करना पड़ता था। छिपकर रहने के कारण हमेशा डर बना रहता था कि कहीं पकड़ा न जाए। किसी तरह जिंदगी अपने ढर्रे पर चलती रही थी और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने खेतों में मेहनत-मजदूरी की।
बेटे की हो चुकी है शादी, पोता दादा से लिपट गया
गुरतेज ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उनके बेटे, जो 24 साल पहले छोटे-छोटे थे, कब जवान हो गए। एक बेटे की तो शादी भी हो गई और उसके घर एक बेटे ने जन्म लिया। गुरतेज सिंह की आंखों में उस वक्त खुशी के आंसू आ गए जब उन्होंने बताया कि जब वह 24 साल बाद घर आए तो उनका पोता उसके पैरों से लिपट गया। गुरतेज ने कहा कि उनको सबसे बड़ा दुःख इस बात का है कि लेबनान में रहते हुए उसकी प्रतीक्षा में पहले उसने अपनी मां के और फिर भाई को खो दिया, वह उन्हें अंतिम बार देख भी नहीं पाया।
गुरतेज ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उनके बेटे, जो 24 साल पहले छोटे-छोटे थे, कब जवान हो गए। एक बेटे की तो शादी भी हो गई और उसके घर एक बेटे ने जन्म लिया। गुरतेज सिंह की आंखों में उस वक्त खुशी के आंसू आ गए जब उन्होंने बताया कि जब वह 24 साल बाद घर आए तो उनका पोता उसके पैरों से लिपट गया। गुरतेज ने कहा कि उनको सबसे बड़ा दुःख इस बात का है कि लेबनान में रहते हुए उसकी प्रतीक्षा में पहले उसने अपनी मां के और फिर भाई को खो दिया, वह उन्हें अंतिम बार देख भी नहीं पाया।
नेताओं और अधिकारियों ने नहीं की सुनवाई
गुरतेज ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों ने इसके पहले कई नेताओं और अधिकारियों से संपर्क किया था, लेकिन उनकी कोई नहीं सुन रहा था। यह संत सीचेवाल का ही प्रयास था कि वह 24 साल बाद अपने परिवार से मिल पाया है। संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि यह बहुत खुशी की बात है कि यह पंजाबी युवक लंबे समय के बाद परिवार में लौटा है। उन्होंने विदेश मंत्रालय और खासकर भारतीय दूतावास के अधिकारियों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने इस मामले को सहृदयता से लिया और इस पंजाबी युवक की भारत वापसी में हरसंभव मदद की।
गुरतेज ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों ने इसके पहले कई नेताओं और अधिकारियों से संपर्क किया था, लेकिन उनकी कोई नहीं सुन रहा था। यह संत सीचेवाल का ही प्रयास था कि वह 24 साल बाद अपने परिवार से मिल पाया है। संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि यह बहुत खुशी की बात है कि यह पंजाबी युवक लंबे समय के बाद परिवार में लौटा है। उन्होंने विदेश मंत्रालय और खासकर भारतीय दूतावास के अधिकारियों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने इस मामले को सहृदयता से लिया और इस पंजाबी युवक की भारत वापसी में हरसंभव मदद की।