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लुधियाना के एक हजार यात्री बालटाल में फंसे
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sat, 19 Jul 2014 10:24 PM IST
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बालटाल में घोड़ा पालकी और भंडारे वालों में हुआ विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। बालटाल में अभी स्थिति पूरी तरह से तनावपूर्ण बनी हुई है।
विवाद के बाद बालटाल में लगे सभी लंगर बंद पड़े हैं और वहां फंसे कई श्रद्धालु भूखे हैं। उन्हें न तो वहां से वापस आने दिया जा रहा है और न ही किसी को यात्रा करने के लिए जाने दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए भंडारे वाले छिप कर लंगर बना रहे है और पर्दे के पीछे उन्हें खिला रहे हैं।
इस विवाद के दौरान हजारों यात्री बालटाल में फंसे हुए हैं। अकेले अगर लुधियाना की बात की जाए तो यहां के एक हजार से ज्यादा श्रद्धालु बालटाल में फंस गए हैं। यहां उनके खासे परेशान हैं। न तो उनके साथ कोई संपर्क हो रहा है और न ही वहां से कोई यात्री अपने घर फोन कर पा रहा है। बालटाल में विवाद की खबर सुन कर कुछ लोगों ने तो श्री अमरनाथ यात्रा पर जाने का अपना प्रोग्राम ही कैंसल कर दिया है। जो श्रद्धालु अपने घरों से पवित्र शिवलिंग के दर्शन के लिए निकल चुके हैं। उन्हें रास्ते में रोक लिया गया है। कुछ श्रद्धालु तो माहौल खराब होने की सूचना मिलने पर बीच रास्ते से वापस आ रहे हैं।
राजस्थान हनुमान गढ़ की बर्फानी सेवा समिति के प्रधान बलदेव कुमार ने कहा कि घोड़ा पालकी वालों और भंडारे वालों के बीच झगड़ा हुआ था। उसके बाद वहां के घोड़ा पालकी चालकों ने काफी उत्पात मचाया। भंडारों में घुस कर तोड़फोड़ की और श्रद्धालुओं के साथ भी मारपीट की। उत्पात मचाने वाले लोगों ने भंडारे में घुस कर भगवान शिव की मूर्तियों को क्षति पहुंचाई। इसी दौरान भंडारों में मौजूद सभी श्रद्धालुओं ने भाग कर अपनी जान बचाई। उपद्रवियों ने भंडारे में घुस सिलेंडर को आग के हवाले कर दिया।
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बलदेव कुमार ने कहा कि उपद्रवियों के उत्पात मचाने के बाद पुलिस ने वहां पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि पुुलिस श्रद्धालुओं को ही पीछे करने में लगी रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के सामने ही उपद्रवी भंडारों से सामान लूट कर जाते रहे। जिसके हाथ जो लगा वह लूट कर ले गया। पुलिस मूक दर्शक बन कर देखती रही। बलदेव ने कहा कि वीरवार रात को विवाद हुआ। उसके बाद शुक्रवार तक उपद्रवी सामान लूटते रहे। शुक्रवार देर शाम बीएसएफ और सीआरपीएफ के मोर्चा संभालने के बाद मामला कुछ शांत हुआ है, लेकिन स्थिति पूरी तरह से तनाव पूर्ण है।
बालटाल में लगे सभी भंडारे आएंगे वापस
शनिवार को श्री अमरनाथ यात्रा आर्गेनाइजेशन (साइबो) और श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन (सैबलों) की एक मीटिंग बालटाल में ही हुई। मीटिंग के दौरान बालटाल में लंगर में हुई आगजनी और लूटपाट कांड के बारे में चर्चा की गई। मीटिंग के दौरान दोनों संस्थाओं ने निर्णय किया कि बालटाल से भंडारे बंद कर वापस जाया जाएगा। साइबों के सदस्य और बर्फानी सेवा समिति के प्रधान बलदेव कुमार ने कहा कि शनिवार को हुई मीटिंग में प्रस्ताव रखा गया कि यात्रा को बीच में ही छोड़ कर भंडारे समाप्त कर वापस घरों को जाया जाएगा।
उन्होंने मीटिंग का संदेश बालटाल से गुफा तक के रास्ते में लगे भंडारे वालों को भी पहुंचा दिया है। उन्होंने भी दोनों आर्गेनाइजेशन के इस फैसले का समर्थन किया है। बलदेव ने कहा कि भंडारे तो वीरवार रात से ही बंद है, लेकिन मीटिंग के बाद भंडारे वालों ने सामान बांधना शुरू कर दिया है। आने वाले दो चार दिनों में भंडारे वाले भी बालटाल छोड़ कर वापस आना शुरू हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि यहां तो फौज ने मोर्चा संभाल लिया है, लेकिन रास्ते में उपद्रवी यात्रियों को तंग कर रहे हैं। उनकी गाड़ियों पर पथराव कर रहे है।
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विवाद के बाद बालटाल में लगे सभी लंगर बंद पड़े हैं और वहां फंसे कई श्रद्धालु भूखे हैं। उन्हें न तो वहां से वापस आने दिया जा रहा है और न ही किसी को यात्रा करने के लिए जाने दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए भंडारे वाले छिप कर लंगर बना रहे है और पर्दे के पीछे उन्हें खिला रहे हैं।
इस विवाद के दौरान हजारों यात्री बालटाल में फंसे हुए हैं। अकेले अगर लुधियाना की बात की जाए तो यहां के एक हजार से ज्यादा श्रद्धालु बालटाल में फंस गए हैं। यहां उनके खासे परेशान हैं। न तो उनके साथ कोई संपर्क हो रहा है और न ही वहां से कोई यात्री अपने घर फोन कर पा रहा है। बालटाल में विवाद की खबर सुन कर कुछ लोगों ने तो श्री अमरनाथ यात्रा पर जाने का अपना प्रोग्राम ही कैंसल कर दिया है। जो श्रद्धालु अपने घरों से पवित्र शिवलिंग के दर्शन के लिए निकल चुके हैं। उन्हें रास्ते में रोक लिया गया है। कुछ श्रद्धालु तो माहौल खराब होने की सूचना मिलने पर बीच रास्ते से वापस आ रहे हैं।
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राजस्थान हनुमान गढ़ की बर्फानी सेवा समिति के प्रधान बलदेव कुमार ने कहा कि घोड़ा पालकी वालों और भंडारे वालों के बीच झगड़ा हुआ था। उसके बाद वहां के घोड़ा पालकी चालकों ने काफी उत्पात मचाया। भंडारों में घुस कर तोड़फोड़ की और श्रद्धालुओं के साथ भी मारपीट की। उत्पात मचाने वाले लोगों ने भंडारे में घुस कर भगवान शिव की मूर्तियों को क्षति पहुंचाई। इसी दौरान भंडारों में मौजूद सभी श्रद्धालुओं ने भाग कर अपनी जान बचाई। उपद्रवियों ने भंडारे में घुस सिलेंडर को आग के हवाले कर दिया।
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बलदेव कुमार ने कहा कि उपद्रवियों के उत्पात मचाने के बाद पुलिस ने वहां पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि पुुलिस श्रद्धालुओं को ही पीछे करने में लगी रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के सामने ही उपद्रवी भंडारों से सामान लूट कर जाते रहे। जिसके हाथ जो लगा वह लूट कर ले गया। पुलिस मूक दर्शक बन कर देखती रही। बलदेव ने कहा कि वीरवार रात को विवाद हुआ। उसके बाद शुक्रवार तक उपद्रवी सामान लूटते रहे। शुक्रवार देर शाम बीएसएफ और सीआरपीएफ के मोर्चा संभालने के बाद मामला कुछ शांत हुआ है, लेकिन स्थिति पूरी तरह से तनाव पूर्ण है।
बालटाल में लगे सभी भंडारे आएंगे वापस
शनिवार को श्री अमरनाथ यात्रा आर्गेनाइजेशन (साइबो) और श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन (सैबलों) की एक मीटिंग बालटाल में ही हुई। मीटिंग के दौरान बालटाल में लंगर में हुई आगजनी और लूटपाट कांड के बारे में चर्चा की गई। मीटिंग के दौरान दोनों संस्थाओं ने निर्णय किया कि बालटाल से भंडारे बंद कर वापस जाया जाएगा। साइबों के सदस्य और बर्फानी सेवा समिति के प्रधान बलदेव कुमार ने कहा कि शनिवार को हुई मीटिंग में प्रस्ताव रखा गया कि यात्रा को बीच में ही छोड़ कर भंडारे समाप्त कर वापस घरों को जाया जाएगा।
उन्होंने मीटिंग का संदेश बालटाल से गुफा तक के रास्ते में लगे भंडारे वालों को भी पहुंचा दिया है। उन्होंने भी दोनों आर्गेनाइजेशन के इस फैसले का समर्थन किया है। बलदेव ने कहा कि भंडारे तो वीरवार रात से ही बंद है, लेकिन मीटिंग के बाद भंडारे वालों ने सामान बांधना शुरू कर दिया है। आने वाले दो चार दिनों में भंडारे वाले भी बालटाल छोड़ कर वापस आना शुरू हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि यहां तो फौज ने मोर्चा संभाल लिया है, लेकिन रास्ते में उपद्रवी यात्रियों को तंग कर रहे हैं। उनकी गाड़ियों पर पथराव कर रहे है।