Punjab: लेफ्टिनेंट कर्नल करणबीर सिंह पंचतत्व में विलीन, जालंधर में बेटी ने दी मुखाग्नि, आठ साल से कोमा में थे
जानकारी के मुताबिक नवंबर 2015 में करणबीर सिंह 160 प्रादेशिक सेना बटालियन (जेएके राइफल्स) के सेकंड-इन-कमांड के रूप में कार्यरत थे। लेफ्टिनेंट कर्नल करणबीर सिंह की बहादुरी पर उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।
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आठ साल से कोमा में रहने के बाद रविवार को जालंधर के आर्मी अस्पताल में अंतिम सांस लेने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल करणबीर सिंह का मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जालंधर कैंट के रामबाग श्मशान घाट में लेफ्टिनेंट कर्नल करणबीर सिंह को बेटी ने मुखाग्नि दी और परिवार ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। यहां छोटी बेटी अश्मीत कौर भी मौजूद थीं। पूरे परिवार का रो-रो कर बुरा हाल था। सेना के अधिकारियों की भी आंखें नम थीं। पत्नी नवप्रीत कौर ने कहा कि उन्हें अपने पति पर गर्व है। उन्होंने देश के लिए अपनी जान कुर्बान की।
बहादुरी पर मिला था सेना मेडल
लेफ्टिनेंट कर्नल करणबीर सिंह को मूलरूप से 1998 में ब्रिगेड ऑफ गार्ड्स में एक शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने 2012 में सेवा से मुक्त होने से पहले 14 वर्षों तक रेजिमेंट में सेवा की। शॉर्ट सर्विस के रूप में सेवा पूरी करने के बाद वह प्रादेशिक सेना में शामिल हो गए थे। जानकारी के मुताबिक नवंबर 2015 में करणबीर सिंह 160 प्रादेशिक सेना बटालियन (जेएके राइफल्स) के सेकंड-इन-कमांड के रूप में कार्यरत थे। लेफ्टिनेंट कर्नल करणबीर सिंह की बहादुरी पर उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।
2015 में लगी थी आतंकी की गोली
25 नवंबर 2015 को नियंत्रण रेखा (एलओसी) के करीब जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हाजी नाका गांव में एक झोपड़ी में छिपे एक आतंकवादी ने उन पर गोलीबारी की थी। इस हमले में लेफ्टिनेंट कर्नल करणबीर सिंह के चेहरे विशेषकर निचले जबड़े पर गंभीर चोट आई थी। उन्हें पहले श्रीनगर के सैन्य अस्पताल और बाद में नई दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में भर्ती किया गया था। जहां डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए कठिन सर्जरी भी की थी। इसके बाद वह जालंधर के सैन्य अस्पताल में भर्ती थे। लेफ्टिनेंट कर्नल करणबीर सिंह का परिवार मूलरूप से बटाला के पास गांव ढाडियाला नत का रहने वाला है। उनके परिवार में उनकी पत्नी नवप्रीत कौर और बेटियां गुनीत और अशमीत हैं।