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Jalandhar: 114 वर्षीय फौजा सिंह की सड़क दुर्घटना में मौत, दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक थे
Mon, 14 Jul 2025 10:35 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Jul 2025 10:35 PM IST
सार
फौजा सिंह ने अपने जीवन में एक दुखद व्यक्तिगत क्षति के बाद मैराथन दौड़ की ओर रुख किया था। 89 साल की उम्र में एक दुर्घटना में उनकी पत्नी और बेटे की मृत्यु हो गई थी। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया और वे अवसाद से जूझने लगे जिसके बाद उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ में शामिल होने का फैसला किया।
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फाैजा सिंह
- फोटो : फाइल
विस्तार
दुनिया के सबसे उम्रदराज महान मैराथन धावक फौजा सिंह की सोमवार को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। वह 114 वर्ष के थे। वह शाम को जालंधर स्थित अपने घर के बाहर टहल रहे थे तो एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी। इससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। परिवार के लोग उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वाले फौजा सिंह ने वर्ष 2000 में अपनी मैराथन यात्रा शुरू की थी और अंततः आठ दौड़ों में भाग लिया था।
2011 में उन्होंने टोरंटो मैराथन में भाग लेकर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं और सबसे उम्रदराज मैराथन धावक के रूप में पहचान बनाई। हालांकि जन्म प्रमाण पत्र न होने के कारण उनका नाम आधिकारिक तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज नहीं हो सका।
2012 में उन्होंने लंदन मैराथन के दौरान 20 किलोमीटर की दौड़ पूरी करके दुनिया को एक बार फिर चकित कर दिया। उनकी आखिरी पेशेवर दौड़ 2013 में हुई थी जब उन्होंने 101 साल की उम्र में हांगकांग मैराथन में भाग लिया था।
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फौजा सिंह ने अपने जीवन में एक दुखद व्यक्तिगत क्षति के बाद मैराथन दौड़ की ओर रुख किया था। 89 साल की उम्र में एक दुर्घटना में उनकी पत्नी और बेटे की मृत्यु हो गई थी। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया और वे अवसाद से जूझने लगे जिसके बाद उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ में शामिल होने का फैसला किया और अपनी दृढ़ता और दृढ़ संकल्प से दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रेरित किया। ब्यूरो
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2011 में उन्होंने टोरंटो मैराथन में भाग लेकर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं और सबसे उम्रदराज मैराथन धावक के रूप में पहचान बनाई। हालांकि जन्म प्रमाण पत्र न होने के कारण उनका नाम आधिकारिक तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज नहीं हो सका।
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2012 में उन्होंने लंदन मैराथन के दौरान 20 किलोमीटर की दौड़ पूरी करके दुनिया को एक बार फिर चकित कर दिया। उनकी आखिरी पेशेवर दौड़ 2013 में हुई थी जब उन्होंने 101 साल की उम्र में हांगकांग मैराथन में भाग लिया था।
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फौजा सिंह ने अपने जीवन में एक दुखद व्यक्तिगत क्षति के बाद मैराथन दौड़ की ओर रुख किया था। 89 साल की उम्र में एक दुर्घटना में उनकी पत्नी और बेटे की मृत्यु हो गई थी। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया और वे अवसाद से जूझने लगे जिसके बाद उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ में शामिल होने का फैसला किया और अपनी दृढ़ता और दृढ़ संकल्प से दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रेरित किया। ब्यूरो