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मुक्तसर में यूरिया, डीएपी की कमी
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मुक्तसर में एक खाद विक्रेता के गोदाम में बचा हुआ स्टाक। संवाद
- फोटो : MUKTSAR
मुक्तसर। कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन के चलते केंद्र सरकार की ओर से मालगाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगाए जाने से रबी फसल की बिजाई में अड़चन आ रही है, वहीं इसका असर किसानों के साथ-साथ व्यापारियों, उद्योगपतियों व रेलवे ट्रांसपोर्ट से जुड़े कारोबारियों पर पड़ने लगा है। खाद की सप्लाई मालगाड़ियों पर निर्भर होने के चलते यूरिया व डीएपी का संकट बनने के आसार नजर आने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में रबी सीजन के लिए अभी तक सिर्फ यूरिया व डीएपी खाद का एक-एक रैक ही आया है। जिले में मांग के मुकाबले फिलहाल 18 फीसदी यूरिया व 30 फीसदी डीएपी का स्टाक मौजूद है। रबी की बिजाई सीजन के दौरान जिले में तकरीबन 71,250 मीट्रिक टन यूरिया की खपत होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके मुकाबले केवल 15,124 मीट्रिक टन यूरिया ही मौजूद है। जिले को 48,450 मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया की सप्लाई की जरूरत है।
मालगाड़ियों पर लगी रोक से यह असंभव लग रहा है। जिले में रबी की बिजाई के लिए डीएपी की लगभग 28,500 मीट्रिक पूर्ति चाहिए, मगर जिले में केवल 8,931 मीट्रिक टन डीएपी खाद ही मौजूद है। इससे किसानों को बिजाई के बाद खाद की भी मुश्किल आ सकती है।
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जानकारी के अनुसार जिले में रबी सीजन के लिए अभी तक सिर्फ यूरिया व डीएपी खाद का एक-एक रैक ही आया है। जिले में मांग के मुकाबले फिलहाल 18 फीसदी यूरिया व 30 फीसदी डीएपी का स्टाक मौजूद है। रबी की बिजाई सीजन के दौरान जिले में तकरीबन 71,250 मीट्रिक टन यूरिया की खपत होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके मुकाबले केवल 15,124 मीट्रिक टन यूरिया ही मौजूद है। जिले को 48,450 मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया की सप्लाई की जरूरत है।
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मालगाड़ियों पर लगी रोक से यह असंभव लग रहा है। जिले में रबी की बिजाई के लिए डीएपी की लगभग 28,500 मीट्रिक पूर्ति चाहिए, मगर जिले में केवल 8,931 मीट्रिक टन डीएपी खाद ही मौजूद है। इससे किसानों को बिजाई के बाद खाद की भी मुश्किल आ सकती है।
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