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Jalandhar News: उज्ज दरिया में दोबारा उफान, किसानों की फसल और श्मशानघाट डूबा
Sun, 11 Aug 2024 10:42 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
Updated Sun, 11 Aug 2024 10:42 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पठानकोट। उज्ज दरिया एक बार फिर से उफान पर है। शनिवार देर रात हुई बारिश के बाद राजबाग बैराज से रविवार सुबह करीब 1 लाख क्यूसिक पानी दरिया में छोड़ा गया। उज्ज दरिया की पानी सहने की क्षमता 1 लाख क्यूसिक है। दरिया का दोबारा जलस्तर बढ़ गया है।
दूसरी तरफ पुलिस दरिया किनारे रहते परिवारों को पीछे हटने के लिए भी कह रही है। जलस्तर बढ़ने से उज्ज एवं रावी दरिया के संगम स्थल मकोड़ा पत्तन पर पानी का बहाव और तेज हो गया है। दरिया में चलने वाली नाव को बंद कर दिया। दरिया के पार पठानकोट के तीन गांवों सहित सात गांव तूरचेबे, ममीया, लसियान का पंजाब से संपर्क कट गया। अब यह गांव टापू में तब्दील हो गए। पिछली बार के विधानसभा चुनाव में लसियान ग्रामीणों ने पक्के पुल की मांग पूरी नहीं होने पर चुनावों का बहिष्कार भी किया था। उसके बाद केंद्र सरकार ने पक्के पुल की मंजूरी दी परंतु, पक्के पुल का निर्माण शुरू नहीं हुआ।
इसके बाद पानी का रुख बाहर की ओर हो जाता है। रविवार को एक लाख क्यूसिक पानी छोड़े जाने से दरिया का लेवल खतरे के निशान तक पहुंच गया है। हालांकि प्रशासन की ओर से संभावित बाढ़ को देखते हुए तैयारी की गई है। दरिया का पानी आसपास गांव का रुख करने लगा है और किसानों की फसलें भी इससे बर्बाद हो रही हैं जबकि एक श्मशानघाट भी दरिया के पानी में डूबा हुआ है। लोगों की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन यह दरिया का पानी बढ़ाने लगा है।
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फोटो: 06 दरिया में आया पानी।
फोटो: 06 पी-01 पानी में डूबा श्मशानघाट।
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पठानकोट। उज्ज दरिया एक बार फिर से उफान पर है। शनिवार देर रात हुई बारिश के बाद राजबाग बैराज से रविवार सुबह करीब 1 लाख क्यूसिक पानी दरिया में छोड़ा गया। उज्ज दरिया की पानी सहने की क्षमता 1 लाख क्यूसिक है। दरिया का दोबारा जलस्तर बढ़ गया है।
दूसरी तरफ पुलिस दरिया किनारे रहते परिवारों को पीछे हटने के लिए भी कह रही है। जलस्तर बढ़ने से उज्ज एवं रावी दरिया के संगम स्थल मकोड़ा पत्तन पर पानी का बहाव और तेज हो गया है। दरिया में चलने वाली नाव को बंद कर दिया। दरिया के पार पठानकोट के तीन गांवों सहित सात गांव तूरचेबे, ममीया, लसियान का पंजाब से संपर्क कट गया। अब यह गांव टापू में तब्दील हो गए। पिछली बार के विधानसभा चुनाव में लसियान ग्रामीणों ने पक्के पुल की मांग पूरी नहीं होने पर चुनावों का बहिष्कार भी किया था। उसके बाद केंद्र सरकार ने पक्के पुल की मंजूरी दी परंतु, पक्के पुल का निर्माण शुरू नहीं हुआ।
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इसके बाद पानी का रुख बाहर की ओर हो जाता है। रविवार को एक लाख क्यूसिक पानी छोड़े जाने से दरिया का लेवल खतरे के निशान तक पहुंच गया है। हालांकि प्रशासन की ओर से संभावित बाढ़ को देखते हुए तैयारी की गई है। दरिया का पानी आसपास गांव का रुख करने लगा है और किसानों की फसलें भी इससे बर्बाद हो रही हैं जबकि एक श्मशानघाट भी दरिया के पानी में डूबा हुआ है। लोगों की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन यह दरिया का पानी बढ़ाने लगा है।
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फोटो: 06 दरिया में आया पानी।
फोटो: 06 पी-01 पानी में डूबा श्मशानघाट।