{"_id":"626c1d29f6eb8a395a2af2c2","slug":"telling-the-deceased-retired-pcs-officer-alive-the-trust-s-plot-worth-crores-was-grabbed-jalandhar-news-pkl4491508159","type":"story","status":"publish","title_hn":"मृतक रिटायर पीसीएस अधिकारी को जिंदा बता ट्रस्ट का करोड़ों का प्लाट हड़पा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मृतक रिटायर पीसीएस अधिकारी को जिंदा बता ट्रस्ट का करोड़ों का प्लाट हड़पा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जालंधर। जोशी अस्पताल पर मामला दर्ज करवाने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट सिरमजीत सिंह ने इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन दलजीत सिंह आहलुवालिया व सहायक अजय मल्होत्रा के खिलाफ जालसाजी से प्लाट हड़पने का आरोप लगाकर डीसी को केस दर्ज करने की शिकायत दी है। डीसी घनश्याम थोरी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिये हैं।
शिकायत में कहा है कि पूर्व चेयरमैन दलजीत सिंह आहलुवालिया व उसके स्टाफ ने मिलीभगत कर प्लाट नंबर 20 बीएसएफ कॉलोनी को बेच दिया है। प्लाट 2010 में कैंसल हो चुका है, जिसे किसी समय ट्रस्ट ने आरसी पाल को अलाट किया था। जो पीसीएस अधिकारी थे। ट्रस्ट ने किश्तें न जमा होने के कारण 30 सितंबर 2003 को प्लाट कैंसल कर दिया था, जिसे पंजाब सरकार ने पत्र नंबर जेआईटी 6113 दिनांक 11 दिसंबर 2003 को मंजूरी दे दी थी और इसकी जानकारी पीसीएस अधिकारी आरसी पाल को दे दी गई थी। 2017-2018 में इस प्लाट की बोली लगाने के लिए ट्रस्ट ने सूची जारी की थी।
सिमरनजीत सिंह ने डीसी को बताया कि 2015 में आरसी पाल का देहांत हो गया था, लेकिन ट्रस्ट ने जाली आरसी पाल को तैयार किया और 2020 में बाकायदा आरसी पाल से खाते में पैसे लेकर प्लाट को दोबारा आरसी पाल को दे दिया, लेकिन उसका देहांत 2015 में हो चुका था। 2020 में आरसी पाल से ट्रस्ट ने दो किश्तें वसूल कीं और बाकायदा आरसी पाल का चेक रिसीव किया, जिसका देहांत 2015 में हो चुका था। इसके बाद आरसी पाल ने प्लाट को प्रोमिला नामक महिला को अटार्नी दे दी, जिसने दो किश्तें ट्रस्ट को चेक के जरिये अदा की। इस तरह ट्रस्ट ने नकली दस्तावेजों के सहारे करोड़ों का प्लाट खुर्दबुर्द कर दिया, जिसमें आला अधिकारी के अलावा ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन दलजीत सिंह आहलुवालिया की मिलीभगत है। जिक्रयोग है कि हाल ही में ट्रस्ट में फाइलें चोरी होने का मामला पूर्व चेयरमैन व ट्रस्ट मुलाजिम मल्होत्रा पर दर्ज किया गया था। आहलुवालिया वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हैं और ट्रस्ट के चेयरमैन कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में बने थे। हाल ही में भगवंत मान सरकार ने ट्रस्ट को भंग कर दिया था। जालंधर के डीसी ने ट्रस्ट के ईओ को भी सस्पेंड कर दिया था। ट्रस्ट में भ्रष्टाचार का मामला सीएम भगवंत मान तक पहुंचा हुआ है। वहीं पूर्व चेयरमैन दलजीत सिंह आहलुवालिया का कहना है कि कोई हेराफेरी नहीं की गई है। प्लाट तो अब भी ट्रस्ट के पास है, जिसे अलाट नहीं किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिकायत में कहा है कि पूर्व चेयरमैन दलजीत सिंह आहलुवालिया व उसके स्टाफ ने मिलीभगत कर प्लाट नंबर 20 बीएसएफ कॉलोनी को बेच दिया है। प्लाट 2010 में कैंसल हो चुका है, जिसे किसी समय ट्रस्ट ने आरसी पाल को अलाट किया था। जो पीसीएस अधिकारी थे। ट्रस्ट ने किश्तें न जमा होने के कारण 30 सितंबर 2003 को प्लाट कैंसल कर दिया था, जिसे पंजाब सरकार ने पत्र नंबर जेआईटी 6113 दिनांक 11 दिसंबर 2003 को मंजूरी दे दी थी और इसकी जानकारी पीसीएस अधिकारी आरसी पाल को दे दी गई थी। 2017-2018 में इस प्लाट की बोली लगाने के लिए ट्रस्ट ने सूची जारी की थी।
विज्ञापन
सिमरनजीत सिंह ने डीसी को बताया कि 2015 में आरसी पाल का देहांत हो गया था, लेकिन ट्रस्ट ने जाली आरसी पाल को तैयार किया और 2020 में बाकायदा आरसी पाल से खाते में पैसे लेकर प्लाट को दोबारा आरसी पाल को दे दिया, लेकिन उसका देहांत 2015 में हो चुका था। 2020 में आरसी पाल से ट्रस्ट ने दो किश्तें वसूल कीं और बाकायदा आरसी पाल का चेक रिसीव किया, जिसका देहांत 2015 में हो चुका था। इसके बाद आरसी पाल ने प्लाट को प्रोमिला नामक महिला को अटार्नी दे दी, जिसने दो किश्तें ट्रस्ट को चेक के जरिये अदा की। इस तरह ट्रस्ट ने नकली दस्तावेजों के सहारे करोड़ों का प्लाट खुर्दबुर्द कर दिया, जिसमें आला अधिकारी के अलावा ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन दलजीत सिंह आहलुवालिया की मिलीभगत है। जिक्रयोग है कि हाल ही में ट्रस्ट में फाइलें चोरी होने का मामला पूर्व चेयरमैन व ट्रस्ट मुलाजिम मल्होत्रा पर दर्ज किया गया था। आहलुवालिया वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हैं और ट्रस्ट के चेयरमैन कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में बने थे। हाल ही में भगवंत मान सरकार ने ट्रस्ट को भंग कर दिया था। जालंधर के डीसी ने ट्रस्ट के ईओ को भी सस्पेंड कर दिया था। ट्रस्ट में भ्रष्टाचार का मामला सीएम भगवंत मान तक पहुंचा हुआ है। वहीं पूर्व चेयरमैन दलजीत सिंह आहलुवालिया का कहना है कि कोई हेराफेरी नहीं की गई है। प्लाट तो अब भी ट्रस्ट के पास है, जिसे अलाट नहीं किया गया है।
विज्ञापन